International Women’s Day 2024: पहली बार कब मनाया गया था अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, जानें इतिहास

Published by : Shaurya Punj Updated At : 08 Mar 2024 6:00 AM

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happy international women's day 2024 History

happy international women's day 2024 History,Significance,Theme: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है. राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्रों में अपने अधिकारों की लड़ाई में महिलाओं की उपलब्धियों और वे कितनी दूर तक पहुंची हैं, इसका जश्न मनाया जाता है.

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International Women’s Day 2024: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) महिलाओं की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का उत्सव मनाने वाला एक वैश्विक दिवस है. यह दिन दुनिया भर में लैंगिक असमानता के खिलाफ कार्रवाई करने के समर्थन में भी मनाया जाता है. हम सभी जानते हैं कि दुनिया महिलाओं के बिना नहीं चल सकती. यह उनके प्रयासों की सराहना करने का दिन है.

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2024 आज

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है. राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्रों में अपने अधिकारों की लड़ाई में महिलाओं की उपलब्धियों और वे कितनी दूर तक पहुंची हैं, इसका जश्न मनाया जाता है.

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास

सुसान बी एंथोनी एक राजनीतिक कार्यकर्ता और महिलाओं के अधिकारों की हिमायती थीं. गृहयुद्ध के बाद, उन्होंने 14वें संशोधन के लिए लड़ाई लड़ी, जिसका उद्देश्य सभी प्राकृतिक और मूल-निवासी अमेरिकियों को इस उम्मीद में नागरिकता प्रदान करना था कि इसमें मताधिकार के अधिकार शामिल होंगे. हालांकि 1868 में 14वें संशोधन की पुष्टि की गई थी, फिर भी यह उनके वोट को सुरक्षित नहीं कर पाया. 1869 में, महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखने के लिए एलिजाबेथ कैडी स्टैंटन और सुसान बी एंथोनी द्वारा नेशनल वुमन सफरेज एसोसिएशन (NWSA) की स्थापना की गई थी.

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2023 थीम और लक्ष्य

हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अलग-अलग थीम रखी जाती है. वहीं इस साल महिला दिवस की कैंपेन थीम इंस्पायर इंक्लुजन (Inspire Inclusion) है. इंस्पायर इंक्लुजन का मतलब है महिलाओं की अहमियत को समझने के लिए लोगों को जागरूक करना. साथ ही इस थीम का अर्थ महिलाओं के लिए एक ऐसे समाज का निर्माण करना भी है जहां महिलाएं खुद को जुड़ा हुआ और सशक्त महसूस कर सकें.

15,000 महिलाओं ने अपने अधिकारों की मांग की थी

1900 की शुरुआत में, महिलाओं को वेतन असमानता, मतदान के अधिकार की कमी का सामना करना पड़ रहा था, और उन पर अधिक काम किया जा रहा था. इन सबके जवाब में, 1908 में 15,000 महिलाओं ने अपने अधिकारों की मांग के लिए न्यूयॉर्क शहर से मार्च किया. 1909 में, अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी द्वारा एक घोषणा के अनुसार पहला राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया. यह 1913 तक फरवरी के अंतिम रविवार को मनाया जाता था.

महिला कार्यालय की नेता ने इस दिवस का आयोजन किया

अगस्त 1910 में क्लारा जेटकिन, एक जर्मन मताधिकारवादी और महिला कार्यालय की नेता द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया था. जेटकिन ने प्रतिवर्ष एक विशेष महिला दिवस आयोजित करने का प्रस्ताव रखा और अगले वर्ष ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विटजरलैंड में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को सम्मानित किया गया, जिसमें रैलियों में दस लाख से अधिक लोग शामिल हुए. 18 अगस्त 1920 को 19वें संशोधन की पुष्टि की गई और श्वेत महिलाओं को यू.एस. में मतदान का अधिकार दिया गया.

सभी महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला

1960 के दशक में मुक्ति आंदोलन हुआ और इस प्रयास के कारण मतदान अधिकार अधिनियम पारित हुआ, जिससे सभी महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला. जब इंटरनेट अधिक सामान्य हो गया, नारीवाद और लैंगिक असमानता के खिलाफ लड़ाई ने पुनरुत्थान का अनुभव किया. जिसके बाद अब हम हर साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हैं क्योंकि हम एक पूरी तरह से समान समाज बनाने की आशा के औरसाथ लगातार आगे बढ़ते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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