भूख, प्यास और नींद त्याग कर की तैयारी, सिर्फ एक महीने की सेल्फ स्टडी,18 साल की तन्वी बनीं मर्चेंट नेवी में अफसर

तन्वी शर्मा
18 Year Old Tanvi Sharma: राजौरी जिले की बेटी तन्वी शर्मा इंडियन मर्चेंट नेवी में शामिल हुई हैं. उन्होंने न सिर्फ अपने जिले बल्कि पूरे जम्मू कश्मीर की बेटियों के लिए मिसाल पेश की है. तन्वी सिर्फ 18 साल की हैं. आइए, जानते हैं उनकी कहानी.
18 Year Old Tanvi Sharma: तन्वी शर्मा के पास NEET और JEE जैसी परीक्षाओं में शामिल होने का ऑप्शन था. लेकिन उन्होंने मर्चेंट नेवी का रास्ता चुना. दिलचस्प बात ये है कि उनकी उम्र सिर्फ 18 साल है, जिस उम्र में दूसरे युवा इस बात पर उलझे होते हैं कि कौन सा कोर्स चुनें, उस उम्र में तन्वी ने इतिहास रच दिया. वे जम्मू कश्मीर के ऐसे इलाके से आती हैं जहां संसाधन की कमी है, फिर भी उन्होंने अपने लिए मुश्किल रास्ता चुना.
मुझे कुछ अलग करना था: तन्वी शर्मा
तन्वी ने 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और ऑप्शनल में बायोलॉजी विषय से परीक्षा दी थी. तन्वी ने मीडिया को दिए एक इटरव्यू में बताया कि उनके पास ऑप्शन तो कई थे, जैसे कि NEET और JEE का, लेकिन उन्होंने मर्चेंट नेवी को चुना. तन्वी को एक ऐसे करियर की तलाश थी, जो सबसे अलग हो, जिससे वे आने वीली पीढ़ी के लिए एग्जाम्पल सेट कर सकें.
बिना कोचिंग के की तैयारी
तन्वी ने मर्चेंट नेवी की परीक्षा के लिए कोई कोचिंग नहीं ली है. आश्चर्य तो इस बात का है कि उन्होंने 12वीं के बाद सिर्फ एक महीने की सेल्फ स्टडी की और परीक्षा में सफलता हासिल कर ली. तन्वी ने बताया कि परीक्षा का सिलेबस 11वीं-12वीं के विषयों पर और थोड़ा बहुत जेईई के लेवल का होता है.
पिता और भाई के विरोध का करना पड़ा सामना
तन्वी के लिए मर्चेंट नेवी तक का सफर इतना आसान नहीं था. शुरू में उनके पिता और भाई ने उन्हें सपोर्ट नहीं किया. मां ने बेटी का सपोर्ट किया. तन्वी ने पिता को खूब मनाया कि कम-से-कम वे परीक्षा तो दे दें. इसी तरह उनके सफर की शुरुआत हुई. लेकिन इस दौरान उन्हें कई बार पिता के विरोध का सामना करना पड़ा.
मां ने किया सपोर्ट, परीक्षा दिलाने ले जाती थीं
तन्वी को परीक्षा देने के लिए भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. एग्जाम सेंटर उनके घर से काफी दूर था. परीक्षा के लिए उन्हें कभी दिल्ली, मुंबई तो कभी गोवा जाना पड़ता था. उनकी मां ने इसमें उनका पूरा साथ दिया और वे अपनी बेटी के साथ ट्रैवल करती थीं.
भूख, प्यास त्याग कर लड़ो
तन्वी का मानना है कि अगर आपके पास लक्ष्य है तो उसके लिए लड़ना होगा. भूख, प्यास, नींद और आराम भूलकर कम्फर्ट जोने से बाहर निकलना होगा. कंफर्ट जोन में सपने पूरे नहीं होते हैं. तन्वी ने कई रातें जागकर मर्चेंट नेवी परीक्षा की तैयारी की.
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By Shambhavi Shivani
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