डीसी बिल के चक्कर में विधायक फंड का करोड़ों रुपया फंसा, कोषागार में पड़ी है राशि

Jharkhand news, Dhanbad news : 70 फीसदी से अधिक डीसी बिल लंबित रहने के कारण धनबाद जिला में विधायक फंड का 27 करोड़ से अधिक राशि कोषागार में पड़ी हुई है. एक वर्ष से भी अधिक समय से इस फंड का यहां काम बंद है.
Jharkhand news, Dhanbad news : धनबाद (संजीव झा) : 70 फीसदी से अधिक डीसी बिल लंबित रहने के कारण धनबाद जिला में विधायक फंड का 27 करोड़ से अधिक राशि कोषागार में पड़ी हुई है. एक वर्ष से भी अधिक समय से इस फंड का यहां काम बंद है.
झारखंड के सभी विधायकों को विधायक फंड में प्रति वर्ष 4 करोड़ रुपये मिलते हैं. इस राशि के तहत योजना तथा एजेंसी (जो काम करेगी) का चयन संबंधित क्षेत्र के विधायक करते हैं. विधायक योजनाओं का चयन कर उसे उप विकास आयुक्त कार्यालय (DDC office) भेजते हैं. विधायक फंड के नोडल पादधिकारी डीडीसी ही होते हैं. योजना एवं एजेंसी की अनुशंसा मिलने के बाद डीडीसी राशि संबंधित एजेंसी को हस्तानांतरित करते हैं. इसके बाद ही इस योजना से काम होता है. 3 साल पहले धनबाद के तत्कालीन डीडीसी शशि रंजन ने आदेश जारी किया कि विधायक की अनुशंसा के आलोक में 80 फीसदी राशि ही संबंधित एजेंसी को प्रथम किश्त में मिलेगी. शेष 20 फीसदी राशि काम पूर्ण होने के बाद दी जायेगी. यह व्यवस्था आज भी लागू है. एजेंसियां काम पूर्ण होने के बाद डीसी बिल (वाउचर) जमा करती हैं. जिसे डीडीसी जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) कार्यालय से महालेखाकार (एजी) दफ्तर भेजते हैं.
एजी कार्यालय में जब तक विधायक फंड से खर्च होने वाली राशि का कम से कम 66 फीसदी राशि का डीसी बिल जमा नहीं किया जाता. तब तक नये योजना के लिए राशि विमुक्त करने का आदेश नहीं मिलता. धनबाद जिला के सभी 6 विधानसभा क्षेत्र धनबाद, सिंदरी, निरसा, झरिया, टुंडी एवं बाघमारा विधानसभा क्षेत्र के विधायक फंड का वित्तीय वर्ष 2019-20 की 80 फीसदी राशि भी खर्च नहीं हो पायी है. इस फंड का अब तक 30 फीसदी डीसी बिल ही जमा हो पाया है. इसलिए वित्तीय वर्ष 2019-20 का विधायक फंड का 20 फीसदी राशि कोषागार में ही पड़ा है. चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए भी सभी विधायकों के कोटा का 4-4 करोड़ यानी 24 करोड़ रुपया भी आवंटित होकर राज्य सरकार से आकर कोषागार में पड़ी हुई है.
धनबाद जिला में विधायक फंड का काम जिला परिषद, एनआरइपी, विशेष प्रमंडल, बीडीओ कार्यालय, जमाडा सहित कई सरकारी संस्थान करती है. इन एजेंसियों का ही काम है कि योजना का प्राक्कलन तैयार करे. उसका क्रियान्वयन करा कर खर्च हुई राशि का डीसी बिल तैयार कर डीआरडीए को देती है. डीसी बिल में अक्सर परेशानी होती है.
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कागज पर भले ही विधायक निधि का काम सरकारी एजेंसी को आवंटित होती है. लेकिन, धरातल पर सड़क, नाली, सामुदायिक भवन, डीप बोरिंग सहित अन्य योजनाएं जिसकी अनुशंसा विधायक करते हैं, उसका काम राजनीतिक दल के कार्यकर्ता करते हैं. जिस दल के विधायक होते हैं उसी दल के कार्यकर्ताओं को अमूमन काम मिलता है. एक योजना में काम करने वाले कार्यकर्ताओं को 15 से 20 फीसदी राशि की बचत होती है. कोरोना काल में इस योजना के पूरी तरह बंद रहने से राजनीतिक दल के कार्यकर्ता भी परेशान हैं.
सरकारी नियमों के अनुसार, 8 लाख रुपये तक का काम विभागीय यानी बिना टेंडर के हो सकता है. विधायक फंड के तहत सामान्यत: 8 लाख रुपये से कम लागत की ही एक योजना होती है. एक कार्यकर्ता को 3 से 5 लाख रुपये तक का काम मिलता है. धनबाद जिला में विधायक फंड का अधिकांश काम बिना टेंडर के ही होता है.
डीडीसी सह नोडल पदाधिकारी, एमएलए फंड दशरथ चंद्र दास कहते हैं कि विधायक फंड का वित्तीय वर्ष 2019-20 का लगभग 30 फीसदी डीसी बिल जमा हो चुका है. संबंधित एजेंसियों से 8 करोड़ रुपये का बिल जमा हो रहा है. उम्मीद है कि 2-3 दिनों में 66 फीसदी डीसी बिल जमा हो जायेगा. इसके बाद वित्तीय वर्ष 2019-20 की बची हुई 20 फीसदी राशि के अलावा चालू वित्तीय वर्ष के लिए भी आवंटित राशि का कुछ हिस्सा विधायकों की अनुशंसा पर एजेंसियों को आवंटित कर दी जायेगी.
Posted By : Samir Ranjan.
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