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Jharkhand: कोयला तस्करी में ‘बाइकर्स गैंग’ की रफ्तार के आगे सिस्टम फेल, कई चेकिंग प्वाइंट पर वसूली

Updated at : 19 Oct 2022 9:51 AM (IST)
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Jharkhand: कोयला तस्करी में ‘बाइकर्स गैंग’ की रफ्तार के आगे सिस्टम फेल, कई चेकिंग प्वाइंट पर वसूली

धनबाद जिले में कोयला का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है. खदानों से डिपो या उद्योगों तक कोयला पहुंचाने में बाइक, स्कूटर व साइकिल का सहारा लिया जाता है. वर्तमान में ‘बाइकर्स गैंग’ का बोलबाला है.

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Dhanbad News: धनबाद जिले में कोयला का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है. खदानों से डिपो या उद्योगों तक कोयला पहुंचाने में बाइक, स्कूटर व साइकिल का सहारा लिया जाता है. वर्तमान में ‘बाइकर्स गैंग’ का बोलबाला है. हालांकि पर्दे के पीछे एक सिंडिकेट सुनियोजित तरीके से काम करता है. सूत्रों के अनुसार अभी मैथन का एक गिरोह इन दिनों कई लोगों का सरगना बना हुआ है और उसके इशारे पर ही पूरा कार्य संचालित हो रहा है. सक्रिय गिरोह झरिया, निरसा व बाघमारा अंचल में अवस्थित बीसीसीएल की विभिन्न कोलियरियों एवं खदानों से उत्पादित कोयला को साइकिल, मोटरसाइकिल के जरिए ढुलाई कर जीटी रोड स्थित भट्ठों, डिपो तक पहुंचाते हैं.

साइकिल को ठेलते हैं बाइकर्स

कोयलांचल में साइकिल से कोयला चोरी लंबे समय से हो रही है. अब ‘बाइकर्स गैंग’ साइकिल वालों के सहयोगी बन गये हैं. चढ़ाई पर पैर से ठेल कर साइकिल वालों की मदद करते हैं. साथ ही रास्ते में पड़ने वाले थाना एवं चेक प्वाइंट को मैनेज करते हैं. इस खेल में शामिल लोगों को अच्छी राशि मिल जाती है. यही कारण है कि दूसरे धंधों को छोड़ कर युवा इस धंधे में शामिल हो रहे हैं.

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दूरी और बोरा के हिसाब से तय होता है रेट

पहले कोयला ढोने वाले का रेट तय होता था. परंतु वर्तमान में यह सिस्टम बदल दिया गया है. अवैध खदान संचालक कोयला का रेट तय करते हैं. बाइर्क्स को प्रतिट्रिप ढुलाई मिलती है. रेट दूरी व बोरा के हिसाब से तय होता है.

जिला के कई चेकिंग प्वाइंट पर होती है ‘बाइकर्स गैंग’ से वसूली

जिले में अवैध कोयले की पासिंग का खेल बड़े ही शातिराना अंदाज में संचालित हो रहा है. खास कर जिला मुख्यालय स्थित केंदुआडीह, धनसार, बैंक मोड़, धनबाद, सरायढेला व गोविंदपुर थाना व आसपास के क्षेत्रों में सुबह के समय में सबसे ज्यादा अवैध कोयला की पासिंग का खेल चलता है. बाइक और साइकिल के जरिए ढुलाई करने वाले और ड्यूटी पर तैनात पुलिसवालों के बीच आंखों ही आंखों में इशारा होता है. इसके पश्चात तय राशि व चढ़ावा देने के बाद उन्हें जाने का सिग्नल मिल जाता है. जानकारी के मुताबिक जिले के कई चेकिंग प्वाइंट पर अवैध कोयला पासिंग से वसूली का यह खेल हर दिन होता है. यही कारण है कि कई थानों, यहां तक एसएसपी व डीसी कार्यालय हो कर भी गुजरते ‘बाइकर्स गैंग’ को रोकने की हिमाकत कोई नहीं करता.

बदल दिया जाता है बाइक का ढांचा

अवैध कोयला की ढुलाई में बाइक का इस्तेमाल करने से पहले उसके मॉडल व ढांचे में बदलाव किया जाता है. यदि टंकी फ्लैट नहीं है, तो सबसे पहले टंकी को ठोक कर फ्लैट कर दिया जाता है. इसके बाद सीट हटा कर वहां लोहा का चदरा लगाया जाता है. एक की जगह दोनों ओर तीन-तीन शॉकर लगाये जाते हैं. यदि बाइक चोरी की है, तो हैंडल के पास पंच चेचिस नंबर को वेल्डिंग कर मिटा दिया जाता है. इसके बाद एक बाइक से लगभग तीन क्विंटल कोयला ढोया जाता है.

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