इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के उद्‌घाटन के लिए LG वीके सक्सेना और CM अरविंद केजरीवाल दोनों पहुंचे, ऐसे हुआ सामना

Edited by Rajneesh Anand
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यूनिवर्सिटी कैंपस का उद्‌घाटन एलजी वीके सक्सेना और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मिलकर किया. उद्‌घाटन के मौके पर मोदी जी जिंदाबाद के नारे भी लगाये गये. सीएम अरविंद केजरीवाल और एलजी वीके सक्सेना ने इस मौके पर एक साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं

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गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के नये कैंपस के उद्घाटन को लेकर दिल्ली सरकार और दिल्ली एलजी के बीच तकरार के बीच आज सुबह एलजी वीके सक्सेना और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचे. एएनआई न्यूज एजेंसी द्वारा जारी वीडियो के अनुसार यूनिवर्सिटी कैंपस का उद्‌घाटन एलजी वीके सक्सेना और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मिलकर किया. उद्‌घाटन के मौके पर मोदी जी जिंदाबाद के नारे भी लगाये गये. सीएम अरविंद केजरीवाल और एलजी वीके सक्सेना ने इस मौके पर एक साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं, हालांकि यूनिवर्सिटी कैंपस के उद्‌घाटन को लेकर विवाद जारी है साथ ही दोनों के बीच पावर शेयरिंग को लेकर हमेशा तकरार होती रहती है.


अध्यादेश विवाद

अभी भी पावर शेयरिंग के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को बदला है जिसमें यह कहा गया था कि प्रदेश की चुनी हुई सरकार को ही ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार मिलना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल की जीत हुई थी, लेकिन केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर एक बार फिर दिल्ली सरकार पर लगाम कसी है. इस अध्यादेश के खिलाफ अरविंद केजरीवाल पूरे देश में विपक्ष को एकजुट करने में जुटे हैं और कई राज्यों में जाकर मदद मांग रहे हैं.

यूनिवर्सिटी के उद्‌घाटन को लेकर भी विवाद

अध्यादेश विवाद के बाद पहली बार एलजी वीके सक्सेना और सीएम अरविंद केजरीवाल एक फ्रेम में नजर आये हैं. हालांकि गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी को बनाने का श्रेय आम आदमी पार्टी लेना चाहती है और वे इसे मनीष सिसौदिया का सपना बता रही है. आतिशी ने ट्वीट कर भाजपा को चैलेंज दिया है कि भाजपा वालों, अब ये करके दिखाओ. वे यह बता रही हैं कि दिल्ली सरकार द्वारा बनाये गये गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी का आज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उद्‌घाटन करेंगे, लेकिन इस कार्यक्रम में एलजी वीके सक्सेना का पहुंच जाना और कैंपस का उद्‌घाटन करना एक अलग ही विवाद को जन्म दे रहा है.दरअसल जब आतिशी ने ट्‌वीट किया तो एलजी आॅफिस के तरफ से यह आपत्ति की गयी कि गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी का उद्‌घाटन एलजी द्वारा किया जाना पहले से ही तय था, इसलिए वही इसका उद्‌घाटन करेंगे.


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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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