Australia vs India 1st T20I : Concussion substitute बने युजवेंद्र चहल ने जिताया मैच, जानें क्या होता है ‘कॉन्कशन रिप्लेसमेंट’
Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 04 Dec 2020 8:36 PM
Australia vs India 1st T20I : भारत और आस्ट्रेलिया के बीच खेले गये सीरीज के पहले टी-20 मैच में युजवेंद्र चहल प्लेयर आफ दि मैच चुने गये, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि चहल इस मैच में प्लेइंग इलेवेशन का हिस्सा नहीं थे.
कैनबरा : भारत और आस्ट्रेलिया के बीच खेले गये सीरीज के पहले टी-20 मैच में युजवेंद्र चहल प्लेयर आफ दि मैच चुने गये, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि चहल इस मैच में प्लेइंग इलेवेशन का हिस्सा नहीं थे.
चहल को ‘कॉन्कशन रिप्लेसमेंट’(सिर में चोट लगने पर किसी दूसरे खिलाड़ी को टीम में शामिल करना) के तौर पर रविंद्र जडेजा की जगह टीम में शामिल किया गया था. जडेजा को भारतीय पारी के आखिरी ओवर में मिशेल स्टार्क की बाउंसर से चोट लगी थी.
मैदान पर वह विकेट के बीच दौड़ते हुए दर्द से तड़पते नजर आये थे. हालांकि जडेजा ने शानदार खेल दिखाया था और मात्र 23 बॉल में 44 रन बनाये थे.
भारत के 161 रन के स्कोर को भारत बचा पायी और आस्ट्रेलिया को 11 रन से हराया तो इसका श्रेय चहल की शानदार गेंदबाजी को जाता है. चहल ने चार ओवर में 25 रन देकर तीन विकेट हासिल किया, उनकी शानदार गेंदबाजी टीम के जीत का प्रमुख कारण बनी.
भारत की गेंदबाजी के दौरान चहल को मैदान पर उतारा गया. हालांकि आस्ट्रेलिया के कप्तान एरोन फिंज ने चहल को मैदान पर उतारे जाने का विरोध नहीं किया और कहा कि आप डॉक्टर की सलाह को चुनौती नहीं दे सकते, लेकिन आस्ट्रेलिया के कई अन्य खिलाड़ी इसके विरोध में नजर आये और मैच के बाद हेनरिक्स ने अपना पक्ष रखा और कहा कि चहल गेंदबाज हैं जबकि जडेजा आलराउंडर. खिलाड़ी जडेजा की तरह ही होना चाहिए था.
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‘कॉन्कशन सब्सटिच्यूट’ क्या है
आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर फिलिप ह्यूज ( Phillip Hughes) की मौत ग्राउंड पर सिर में गेंद लगने की वजह से हुई थी. जिसके बाद सुरक्षा को लेकर काफी चर्चा हुई. वेल्स क्रिकेट में भी इसकी शुरुआत वर्ष 2018 के बाद हुई थी. लेकिन आईसीसी ने 2019 में इसे अनुमति दी और सभी अंतरराष्ट्रीय मैचों में यह लागू हो गया. खिलाड़ी जिसे चोट लगी हो और ‘कॉन्कशन सब्सटिच्यूट’ को एक जैसा होना चाहिए और इसके लिए मैच रेफ्ररी की अनुमति भी जरूरी होती है.
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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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