क्या लोन सस्ता करने के लिए रेपो रेट में फिर कटौती करेगा आरबीआई? एक्सपर्ट तो फिलहाल दे रहे हैं यही सलाह...

Author : Agency Published by : Prabhat Khabar Updated At : 30 Jul 2020 8:26 PM

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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जून में रिजर्व बैंक के लक्ष्य के हिसाब से अधिकतम सीमा 6 फीसदी को पार कर गयी. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खुदरा मुद्रास्फीति जून महीने में बढ़कर 6.09 फीसदी रही. मुख्य रूप से खाने-पीने का सामान महंगा होने से महंगाई दर बढ़ी. रिजर्व बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पर विचार करते समय खुदरा मुद्रास्फीति पर गौर करता है.

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मुंबई : विदेशी ब्रोकरेज कंपनी बार्कलेज के विशेषज्ञों ने गुरुवार को कहा कि रिजर्व बैंक को अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज करने के लिए सकल मुद्रास्फीति में वृद्धि के बावजूद अगले सप्ताह मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट में एक बार फिर कटौती करनी चाहिए. बार्कलेज के विश्लेशकों ने कहा कि मुद्रास्फीति की ऊंची दर आरबीआई के नीति परिदृश्य को लेकर भ्रम पैदा कर रही है, लेकिन उसने ‘हवा के रुख को भांपते हुए’ मांग बढ़ाने के लिये रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की वकालत की.

बता दें कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जून में रिजर्व बैंक के लक्ष्य के हिसाब से अधिकतम सीमा 6 फीसदी को पार कर गयी. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खुदरा मुद्रास्फीति जून महीने में बढ़कर 6.09 फीसदी रही. मुख्य रूप से खाने-पीने का सामान महंगा होने से महंगाई दर बढ़ी. रिजर्व बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पर विचार करते समय खुदरा मुद्रास्फीति पर गौर करता है.

इससे पहले, केंद्रीय बैंक ने कोविड-19 महामारी के बाद दो बार में रेपो रेट में 1.15 फीसदी की कटौती की है. इस महामारी का अर्थव्यवस्था पर व्यापक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. विश्लेषकों ने कहा, ‘हमारा अनुमान है कि आरबीआई अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में नरम नीतिगत रुख को कायम रखते हुए रेपो रेट में कम-से-कम 0.25 फीसदी की कटौती करेगा.

विश्लेषकों ने 4 से 6 अगस्त के बीच होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक से पहले यह बात कही. विश्लेषकों ने यह भी कहा कि गतिविधियों पर जो प्रभाव पड़ा है, वह रेपो रेट को और नरम बनाने तथा तेजी से कटौती का समर्थन करता है. उनका कहना है, ‘हम इस बात पर भरोसा नहीं करते कि नीतिगत दर में कटौती का लाभ ब्याज दरों में कमी के रूप में ग्राहकों को लाभ मिलने में लगने वाले समय को देखते हुए भविष्य के लिए ‘हथियार बचाये रखने’ की जरूरत है.’

इस बीच, सिंगापुर के डीबीएस बैंक ने कहा कि अगले सप्ताह पेश होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को यथावत रखने की संभावना है, लेकिन अक्टूबर से मार्च 2021 के बीच इसमें 0.50 फीसदी की कटौती की जा सकती है.

Also Read: क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट? जानिए इसमें कटौती से क्या होगा फायदा ?

Posted By : Vishwat Sen

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