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क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट? जानिए इसमें कटौती से क्या होगा फायदा ?

By AvinishKumar Mishra
Updated Date
क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट? जानिए इसमें कटौती से क्या होगा फायदा ?
क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट? जानिए इसमें कटौती से क्या होगा फायदा ?
PTI

Rbi, Repo rate, Moratorium : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लॉकडाउन 4.0 के बीच आम लोगों को बड़ी राहत दी है. आरबीआई ने 0.40 बेसिक प्वाइंट की कटौती करते हुए रेपो रेट को 4.40 से 4.0 कर दिया है, जबकि रिवर्स रेपो रेट को भी 3.75 से 3.35 कर दिया है. आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि कोरोनावायरस के कारण अर्थव्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है, जिसके कारण यह फैसला लिया गया है. रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कटौती के बाद माना जा रहा है कि बाजार में नकद प्रवाह बढ़ेगा. आइये जानते हैं क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट?

रेपो रेट- रेपो रेट वो रेट होती है, जिस रेट पर बैंक आरबीआई से पैसे उधार लेती है. बैंक भी आम आदमी के तरह आरबीआई से लोन लेती है, जिसके एवज में उसे आरबीआई को ब्याज देना होता है. आरबीआई बाजार में नगदी का प्रवाह बढ़ाने के लिए रेपो रेट में कटौती करती है. यानी इससे बैंकों को आरबीआई कम ब्याज में पैसा देगी, जिस कारण बैंक आरबीआई से पैसे लेकर बाजार में नकद प्रवाह बढ़ाती है.

रिवर्स रेपो रेट- जिस दर पर बैंक अपनी जमा राशि आरबीआई के पास रखती है, वह रिवर्स रेपो रेट कहलाती है. अगर आरबीआई रिवर्स रेपो रेट में कटौती कर रही है तो इसका सीधा मतलब ये होता है कि बैंकों को अब अपनी जमा राशि पर ब्याज कम मिलेगा. जिस कारण वो अपनी जमा राशि आरबीआई के पास ना रख कर लोगों को पैसा देगी. जिससे बाजार में नगदी का प्रवाह बढ़ेगा.

क्या होगा असर- लॉकडाउन की वजह से छोटे और मध्यम उद्योग बेपटरी हो चुकी है. बाजार बंद होने की वजह से आपूर्ति कम हो गयी है. इस सबको फिर से पटरी पर लाने के लिए नकद की जरूरत है. लॉकडाउन खुलने के बाद माना जा रहा है कि मांग में बढ़ोतरी होगी और पूरा करने के लिए पैसे की जरूरत होगी. इसी वजह से आरबीआई ने यह कदम उठाया है.

आरबीआई की चुनौती- रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कटौती के बाद भी कई बार देखा जाता है कि बैंक अपने लोन में कोई बदलाव नहीं करता है, जिसके कारण आम ग्राहकों को इसका फायदा नहीं मिल पाता है. लॉकडाउन के बाद आरबीआई के पास सबसे बड़ी चुनौती यह है कि रेपो रेट कटौती के बाद बैंक भी ग्राहकों को आसानी से सस्ते लोन उपलब्ध कराए.

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