Viral Video: मील के पत्थरों से सड़कों की पहचान, फेसबुक पर वीडियो वायरल

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Viral Video: सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो मील के पत्थरों से सड़कों की पहचान करने का तरीका बता रहा है. ट्रैफिक पुलिस विवेकानंद तिवारी द्वारा साझा इस वीडियो में मील के पत्थरों के ऊपरी हिस्से पर रंगों के आधार पर नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे, डिस्ट्रिक्ट हाईवे और गांव की सड़कों की पहचान समझाई गई है. फेसबुक पर इस वीडियो को लाखों लोगों ने पसंद किया और शेयर किया, जिससे यह सड़क सुरक्षा और जानकारी फैलाने का एक रोचक माध्यम बन गया है.
Viral Video: अक्सरहां आप सड़कों से ही आवाजाही करते हैं. चाहे आप किसी वाहन से सफर रहे हों तो या फिर पैदल चल रहे हों, रास्ते के तौर पर आपको सड़क को ही चुनना पड़ता है. लेकिन, आप जिस सड़क पर सफर कर रहे होते हैं, उसकी पहचान कैसे करेंगे कि यह सड़क नेशनल हाईवे है, हाईवे है, स्टेट हाईवे है, डिस्ट्रिक्ट हाईवे है या गांव की सड़क है? हर सड़कों की अपनी एक अलग पहचान होती है. अगर आपको सड़कों की पहचान करनी है, तो आपको उसके किनारे लगे मील के पत्थरों को गौर से देखना होगा. ये मील के पत्थर ही सड़कों की पहचान बता देते हैं.
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मील के पत्थरों के जरिए सड़कों की पहचान बताने वाला एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मील के पत्थरों के ऊपरी चौथाई हिस्से पर पुते हुए रंगों से सड़कों की पहचान बताई जा रही है. सोशल मीडिया के प्रमुख मंच फेसबुक पर ट्रैफिक पुलिस विवेकानंद तिवारी ने अपने अकाउंट से सड़कों की पहचान बताने वाले वीडियो को पोस्ट किया है. इस वीडियो में एक ट्रैफिक पुलिस का कर्मचारी मील के पत्थर के रंगों के जरिए सड़कों की पहचान बताई जा रही है. फेसबुक पर पोस्ट किए गए इस वीडियो को करीब 7,73,180 लोग ने लाइक किया है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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