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Venezuela Crisis: वेनेजुएला संकट से सोने-चांदी और कच्चे तेल पर प्रभाव नहीं, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

Venezuela Crisis: वेनेजुएला संकट को लेकर वैश्विक बाजारों में हलचल जरूर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सोने, चांदी और कच्चे तेल की कीमतों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा. लंबे समय से प्रतिबंधों के चलते वेनेजुएला की वैश्विक आपूर्ति में भूमिका सीमित है.

Venezuela Crisis: अमेरिका और वेनेजुएला के बीच हाल के दिनों में घटे सैन्य और राजनीतिक घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर हलचल जरूर पैदा की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर सोने, चांदी और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर सीमित ही रहेगा. वर्षों से प्रतिबंधों के अधीन रहने के कारण वेनेजुएला की वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली में भूमिका पहले ही काफी कमजोर हो चुकी है.

लंबे प्रतिबंधों से कमजोर हुआ वेनेजुएला

बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, पिछले एक दशक में वेनेजुएला का वैश्विक आर्थिक महत्व तेजी से घटा है. उन्होंने बताया कि 2012 में जहां वेनेजुएला की जीडीपी करीब 350 अरब डॉलर थी, वहीं 2025 तक यह घटकर लगभग 80 अरब डॉलर रह गई है. 116 ट्रिलियन डॉलर की वैश्विक अर्थव्यवस्था के मुकाबले यह आंकड़ा बेहद नगण्य है. ऐसे में किसी भी संकट का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ना स्वाभाविक नहीं है.

कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर नहीं

कच्चे तेल के संदर्भ में अजय बग्गा का कहना है कि भले ही वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक हो, लेकिन उसकी तेल अवसंरचना बेहद जर्जर हो चुकी है. वर्तमान में सरकारी तेल कंपनी के अलावा केवल अमेरिकी कंपनी शेवरॉन ही कुछ तेल क्षेत्रों का संचालन कर रही है. वेनेजुएला का कुल उत्पादन करीब 9.5 लाख बैरल प्रतिदिन है, जबकि वैश्विक तेल उत्पादन लगभग 103 मिलियन बैरल प्रतिदिन है. ऐसे में, वेनेजुएला के पूरे उत्पादन के रुक जाने से भी वैश्विक तेल कीमतों पर खास असर पड़ने की संभावना नहीं है.

सोना और चांदी की कीमतें कैसे हो रहीं प्रभावित

कीमती धातुओं पर टिप्पणी करते हुए अजय बग्गा ने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में जो उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, उसका संबंध वेनेजुएला संकट से नहीं है. उन्होंने कहा कि इन दोनों धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की मांग से है. उन्होंने कहा कि इसी तरह की सुरक्षित निवेश की प्रवृत्ति अमेरिकी डॉलर में भी दिखाई दे रही है, जो हाल के दिनों में मजबूत हुआ है. यानी सोना-चांदी की कीमतों में बदलाव के पीछे वेनेजुएला नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक कारक हैं.

बाजार में तत्काल झटका नहीं

ऊर्जा नीति विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा का भी मानना है कि वेनेजुएला संकट से तेल बाजार में तत्काल कोई बड़ा व्यवधान नहीं आएगा. उन्होंने बताया कि वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी श्रेणी का है, जिसे दुनिया की अधिकांश रिफाइनरियां प्रोसेस करने के लिए डिजाइन नहीं की गई हैं. इसके अलावा, देश का अधिकांश तेल निर्यात चीन को जाता है। ऐसे में वैश्विक सप्लाई चेन पर इसका प्रभाव सीमित रहता है.

भविष्य में बढ़ सकता है उत्पादन

नरेंद्र तनेजा के अनुसार, यदि आने वाले समय में वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में ढील मिलती है और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ती है, तो देश अगले एक साल के भीतर प्रतिदिन 30 लाख बैरल तक उत्पादन करने की क्षमता हासिल कर सकता है. यदि ऐसा होता है, तो यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए नकारात्मक नहीं, बल्कि सकारात्मक संकेत होगा, क्योंकि इससे बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आएगी.

अमेरिका-वेनेजुएला तनाव का ताजा घटनाक्रम

3-4 जनवरी 2026 के सप्ताहांत में अमेरिका द्वारा कराकस में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए जाने और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिका की बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि जब तक सुरक्षित और विवेकपूर्ण तरीके से सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका देश का संचालन करेगा.

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बाजारों के लिए फिलहाल राहत

कुल मिलाकर, बाजार विशेषज्ञों और ऊर्जा नीति विश्लेषकों की राय स्पष्ट है कि वेनेजुएला संकट से निकट भविष्य में सोने, चांदी और कच्चे तेल की कीमतों पर कोई बड़ा या स्थायी असर पड़ने की संभावना नहीं है. वैश्विक निवेशकों के लिए असली संकेतक अन्य बड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक कारक बने रहेंगे, जबकि वेनेजुएला का प्रभाव सीमित ही रहेगा.

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KumarVishwat Sen
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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