Air India News: देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस एयर इंडिया के सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) बदलने वाले हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया के बोर्ड ने वर्तमान सीईओ कैंपबेल विल्सन के उत्तराधिकारी की खोज शुरू कर दी है. यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है, जब जून 2025 में हुई एक भीषण विमान दुर्घटना के बाद एयरलाइन सुरक्षा चूक को लेकर कड़ी जांच के घेरे में है.
दुर्घटना के बाद बढ़ी जांच और सवाल
रॉयटर्स ने मामले से जुड़े दो वरिष्ठ सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि जून में हुई दुर्घटना में 260 लोगों की मौत के बाद एयर इंडिया की परिचालन और सुरक्षा प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठे हैं. इसे एक दशक की सबसे घातक विमानन आपदाओं में गिना जा रहा है. जांच के दौरान नियामकों ने कई गंभीर खामियां चिह्नित की हैं, जिनमें आपातकालीन उपकरणों की जांच के बिना विमानों का उड़ान भरना, इंजन के पुर्जों को बदलने में देरी, रखरखाव रिकॉर्ड में कथित जालसाजी और चालक दल की थकान प्रबंधन में कमजोरियां शामिल हैं.
कैंपबेल विल्सन का कार्यकाल
कैंपबेल विल्सन ने जुलाई 2022 में एयर इंडिया के सीईओ और एमडी के रूप में पदभार संभाला था. इससे पहले, उन्होंने सिंगापुर एयरलाइंस में करीब 26 साल तक काम किया, जहां वे प्रमुख एयरलाइन और इसकी लो-कॉस्ट शाखा स्कूट में कई अहम पदों पर रहे. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कैंपबेल विल्सन का कार्यकाल 2027 के मध्य तक तय है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें इससे पहले ही बदला जा सकता है.
टाटा ग्रुप की भूमिका और असंतोष
एयर इंडिया के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन हैं, जो टाटा ग्रुन के भी चेयरमैन हैं. टाटा ग्रुप एयर इंडिया का बहुसंख्यक मालिक है, जबकि सिंगापुर एयरलाइंस की इसमें 25% हिस्सेदारी है. सूत्रों के अनुसार, टाटा ग्रुप पिछले साल एयरलाइन के प्रदर्शन को लेकर विल्सन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं था. सरकार से एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद टाटा ने कंपनी के पुनर्गठन और सुधार के लिए खुलकर निवेश किया. इसके बावजूद उसे अपेक्षित नतीजे नहीं मिल पाए.
नए सीईओ की तलाश तेज
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एन चंद्रशेखरन ने कैंपबेल विल्सन के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर कम से कम दो प्रमुख यूके और यूएस-आधारित अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के सीईओ से बातचीत की है. इससे संकेत मिलता है कि टाटा ग्रुप एयर इंडिया के लिए वैश्विक अनुभव रखने वाले नेतृत्व की तलाश में है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समूह की लो-कॉस्ट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस में भी इसी तरह के नेतृत्व परिवर्तन संभव हैं.
निजीकरण के बाद भी चुनौतियां बरकरार
एयर इंडिया 2022 में टाटा समूह को बेचे जाने से पहले भारत की सरकारी एयरलाइन थी. निजीकरण के बाद से टाटा ग्रुप ने बेड़े के आधुनिकीकरण और नए रूट्स के विस्तार में भारी निवेश किया है. हालांकि, विमान डिलीवरी और नवीनीकरण में देरी, परिचालन समस्याएं और सुरक्षा संबंधी चिंताएं एयरलाइन के कायाकल्प की राह में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.
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बड़े फैसले की तैयारी में एयर इंडिया
फिलहाल टाटा ग्रुप, सिंगापुर एयरलाइंस, एयर इंडिया और कैंपबेल विल्सन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है. लेकिन बोर्ड स्तर पर उत्तराधिकारी की तलाश से यह साफ है कि एयर इंडिया के भविष्य को लेकर बड़े फैसले लिए जाने की तैयारी है. आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या एयर इंडिया को नया नेतृत्व मिलता है और क्या वह सुरक्षा, भरोसे और प्रदर्शन के मोर्चे पर यात्रियों की उम्मीदों पर खरा उतर पाती है?
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