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दिसंबर से दौड़ने लगेगी पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया कन्फर्म

Updated at : 19 Nov 2025 7:25 PM (IST)
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Vande Bharat sleeper train

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की टेस्टिंग के बाद मामूली सुधार किया जा रहा है.

Vande Bharat Train: भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन दिसंबर से यात्रियों के लिए शुरू होने जा रही है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की है कि परीक्षण में मिली छोटी कमियों को दूर करने के बाद ट्रेन संचालन के लिए तैयार की जा रही है. बीईएमएल और आरडीएसओ की निगरानी में डिजाइन में अंतिम सुधार किए जा रहे हैं. आधुनिक सुविधाओं, बेहतर सुरक्षा और आरामदायक स्लीपर कोचों के साथ यह ट्रेन लंबी दूरी की यात्राओं को बिल्कुल नए अनुभव में बदलेगी.

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Vande Bharat Train: भारत की आधुनिक वंदे भारत की पहली स्लीपर ट्रेन जल्द ही पटरी पर दौड़ने वाली है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को पुष्टि की है कि देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन दिसंबर से यात्रियों के लिए शुरू कर दी जाएगी. यह पहली बार होगा, जब वंदे भारत ट्रेनें रात की लंबी दूरी की यात्रा के लिए स्लीपर सुविधा के साथ चलेंगी. यात्रियों की आरामदायक यात्रा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन के डिजाइन में अंतिम चरण के मामूली सुधार किए जा रहे हैं.

परीक्षण में मिली कमी, डिजाइन में हो रहे सुधार

रेल मंत्री ने बताया कि पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के व्यापक परीक्षण के दौरान डिब्बों और सीटों में कुछ सुधार की जरूरत महसूस की गई थी. परीक्षण के आधार पर विशेषज्ञों ने सुझाव दिए कि यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए कुछ छोटे बदलाव जरूरी हैं. इन्हीं सुझावों पर काम जारी है और ट्रेन को अंतिम रूप देने में तेजी लाई जा रही है. वैष्णव के अनुसार, ये बदलाव भले ही तकनीकी रूप से छोटे हों, लेकिन इन्हें काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यात्रियों के लिए सर्वोत्तम अनुभव सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है.

यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता

अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट कहा कि रेलवे ‘शॉर्टकट’ में विश्वास नहीं करता. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को अगली पीढ़ी का उत्पाद बनाते समय सुरक्षा, आराम और विश्वसनीयता को सर्वोच्च स्तर पर रखा गया है. उन्होंने कहा कि जब यात्री लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, तो उनकी सुविधा का हर पहलू महत्वपूर्ण होता है. इसी सोच के साथ इस ट्रेन का डिजाइन तैयार किया गया है, जिसमें साउंड इंसुलेशन, बेहतर शॉक एब्जॉर्बिंग सिस्टम और एडवांस्ड ब्रेकिंग तकनीक शामिल है. ये सभी फीचर यात्रियों को एक शांत, सुरक्षित और सहज यात्रा प्रदान करेंगे.

बीईएमएल और रेलवे संगठनों की संयुक्त निगरानी

भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) 10 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का निर्माण कर रहा है. उसने बताया कि अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) और रेलवे सुरक्षा आयुक्त की निगरानी में ट्रेन के सभी परीक्षण पूरे हो चुके हैं. पहली यूनिट को मामूली बदलावों के लिए फिर से बीईएमएल भेजा गया है, जहां डिजाइन में अंतिम सुधार किए जा रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि सभी टेक्निकल एन्हांसमेंट समय पर पूरे हो जाएंगे और ट्रेन दिसंबर की शुरुआत में ही संचालन के लिए तैयार होगी.

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यात्रियों के लिए नए युग की शुरुआत

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन न केवल भारतीय रेलवे के तकनीकी विकास का प्रतीक है, बल्कि यह लंबी दूरी की यात्राओं को एक नए स्तर पर ले जाएगी. तेज रफ्तार, आधुनिक सुविधाओं और आरामदायक स्लीपर कोचों के साथ यह ट्रेन देश के प्रमुख मार्गों पर यात्रा की गुणवत्ता को बदल देगी. दिसंबर से इसका संचालन शुरू होने के साथ ही यात्री एक नई, उन्नत और अधिक सुरक्षित यात्रा प्रणाली का अनुभव कर सकेंगे.

भाषा इनपुट के साथ

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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