भारत समेत 60 देशों पर चला अमेरिका का चाबुक, फोर्स्ड लेबर के मुद्दे पर लगेगा 12.5% भारी टैक्स
Published by : Soumya Shahdeo Updated At : 03 Jun 2026 11:49 AM
USTR Section 301 Tariff Proposal (Photo: ANI)
USTR Section 301 Tariff Proposal: अमेरिका भारत समेत 60 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैक्स लगा सकता है. USTR ने बंधुआ मजदूरी से जुड़े नियमों को लागू न करने पर यह सख्त कदम उठाने का प्रस्ताव दिया है.
USTR Section 301 Tariff Proposal: अमेरिका और भारत समेत दुनिया के 60 देशों के बीच व्यापार को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत और 59 अन्य देशों से आने वाले सामानों पर 12.5% का अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा है. अमेरिका का आरोप है कि ये देश अपने यहां फोर्स्ड लेबर से बनने वाले सामानों के इंपोर्ट को रोकने में नाकाम रहे हैं. 2 जून को जारी एक बयान में USTR ने साफ किया कि ये 60 देश ऐसे सामानों पर रोक लगाने और नियमों को लागू करने में फेल साबित हुए हैं. आइए समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और इससे कौन से देश प्रभावित हो रहे हैं.
अमेरिका ने यह कड़ा फैसला क्यों लिया?
अमेरिका ने यह कदम अपने ‘व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301’ (Section 301 of the Trade Act of 1974) के तहत उठाया है. अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इन 60 देशों की नीतियां और ढीला रवैया अमेरिकी व्यापार के लिए नुकसानदेह है. इस मुद्दे पर अमेरिकी व्यापार राजदूत जैमिसन ग्रीर ने कहा कि हमारे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों द्वारा बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के इंपोर्ट पर रोक न लगाना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है. इससे अमेरिकी कामगारों को ग्लोबल लेवल पर एक असमान और कठिन प्रतियोगिता का सामना करना पड़ता है. उन्होंने साफ किया कि अमेरिका अब इस भेदभाव को बर्दाश्त नहीं करेगा. हालांकि, कुछ देशों ने ‘USMCA’ और आपसी व्यापार समझौतों के जरिए शुरुआती कदम उठाए हैं, लेकिन ग्लोबल लेवल पर बंधुआ मजदूरी को बढ़ावा न मिले, इसके लिए सभी को और ज्यादा कड़े कदम उठाने होंगे.
किन-किन देशों पर पड़ेगा इसका असर?
अमेरिका के इस प्रस्ताव से दुनिया की कई बड़ी इकोनॉमीज प्रभावित हुई हैं. USTR की सूची में शामिल प्रमुख देशों के नाम इस प्रकार हैं:
- एशिया और पड़ोसी देश: भारत, चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान, हांगकांग, ताइवान.
- विकसित और बड़े देश: ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम (UK), यूरोपीय संघ (EU), कनाडा, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड.
- खाड़ी और मध्य पूर्व देश: सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, इराक, इजरायल, जॉर्डन.
- अन्य प्रमुख देश: रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस, वियतनाम, अर्जेंटीना, कोलंबिया, मिस्र (Egypt), नाइजीरिया, तुर्की.
अब आगे क्या होने वाला है?
अगर यह प्रस्ताव पूरी तरह लागू हो जाता है, तो इन सभी 60 देशों से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर 12.5% का भारी टैक्स बढ़ जाएगा. इससे इंटरनेशनल मार्केट में इन देशों के उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिसका सीधा असर उनके एक्सपोर्ट और इकोनॉमी पर पड़ेगा. अमेरिका ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि यदि इन देशों को उसके साथ बिना किसी बाधा के व्यापार करना है, तो उन्हें बंधुआ मजदूरी से बनने वाले सामानों के इंपोर्ट के खिलाफ अपने नियमों को सख्त और असरदार बनाना ही होगा.
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By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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