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68 साल बाद फिर टाटा की हुई एयर इंडिया, 1932 में जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा ने की थी स्थापना

Air India Sale कर्ज में डूबी सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया (Air India) के अधिग्रहण की बोली टाटा संस (Tata Sons) ने जीत ली है. इसके साथ ही टाटा समूह में एयर इंडिया की फिर से वापसी हुई है. जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (JRD Tata) ने 1932 में एयरलाइन की स्थापना की. तब इसे टाटा एयरलाइंस कहा जाता था.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Welcome back, Air India, Tweeted Tata Group chairman emeritus Ratan Tata.
Welcome back, Air India, Tweeted Tata Group chairman emeritus Ratan Tata.
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Air India Sale कर्ज में डूबी सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया (Air India) के अधिग्रहण की बोली टाटा संस (Tata Sons) ने जीत ली है. इसके साथ ही टाटा समूह में एयर इंडिया की फिर से वापसी हुई है. जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (JRD Tata) ने 1932 में एयरलाइन की स्थापना की. तब इसे टाटा एयरलाइंस कहा जाता था. 1946 में टाटा संस के विमानन प्रभाग को एयर इंडिया के रूप में सूचीबद्ध किया गया था और 1948 में एयर इंडिया इंटरनेशनल को यूरोप के लिए उड़ानों के साथ शुरू किया गया था.

अंतरराष्ट्रीय सेवा भारत में पहली सार्वजनिक-निजी भागीदारी में से एक थी, जिसमें सरकार की 49 प्रतिशत, टाटा की 25 प्रतिशत और जनता की शेष हिस्सेदारी थी. 1953 में एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण किया गया था. सरकार सरकारी स्वामित्व वाली एयरलाइन में अपनी सौ फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है. जिसमें एयर इंडिया की एआई एक्सप्रेस लिमिटेड में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी और एयर इंडिया एसएटीएस एयरपोर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है.

एयर इंडिया के अधिग्रहण की दौड़ में टाटा संस ने स्पाइसजेट के प्रवर्तक अजय सिंह को पीछे छोड़ा, जिन्होंने व्यक्तिगत क्षमता में बोली लगायी थी. टाटा की 18 हजार करोड़ रुपये की बोली में 15,300 करोड़ रुपये का कर्ज लेना और बाकी का नकद भुगतान करना शामिल है. बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित मंत्रियों के एक समूह ने 4 अक्टूबर को एयर इंडिया के लिए विजेता बोली को मंजूरी दी.

बता दें कि एयरलाइन ने छह सीटों वाली Miles Merlin के साथ बॉम्बे से त्रिवंद्रम के बीच अपनी पहली घरेलू उड़ान की शुरुआत की. साल 1938 में इसका नाम बदलकर टाटा एयरलाइंस कर दिया गया. 1938 में इसके गंतव्यों में कॉलम्बो और दिल्ली को जोड़ा गया. दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान एयरलाइन ने रॉयल एयर फोर्स की उनकी सेना की आवाजाही, सप्लाई ले जाने, शरणार्थियों को बचाने और एयरक्राफ्ट के रखरखव में मदद की.

साल 1953 में भारस सरकार ने एयर कॉरपोरेशन एक्ट को पास किया और टाटा संस से एयरलाइन में मालिकाना हक खरीद लिया. हालांकि, जेआरडी टाटा 1977 तक चेयरमैन के तौर पर बने रहे. कंपनी का नाम बदलकर एयर इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड कर दिया गया. 21 फरवरी 1960 को एयर इंडिया इंटरनेशनल ने अपने पहले बोइंग 707-420 को बेड़े में शामिल किया. एयरलाइन ने 14 मई 1960 को न्यू यॉर्क को सेवाएं शुरू कर दी. 8 जून 1962 को एयरलाइन के नाम को आधिकारिक तौर पर एयर इंडिया कर दिया गया और 11 जून 1962 को एयर इंडिया दुनिया की पहली ऑल जेट एयरलाइन बन गई.

साल 2000 में एयर इंडिया ने शांघाई, चीन को सेवाओं की शुरुआत ती. 23 मई 2001 को नगर विमानन मंत्रालय ने उस समय कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर माइकल मस्कारेनहास (Michael Mascarenhas) पर भ्रष्टाचार का चार्ज फिक्स किया. साल 2007 में एयर इंडिया और इंडियन एयरालइंस को एयर इंडिया लिमिटेड का मर्जर किया गया. इसके बाद साल 2017 में केंद्रीय कैबिनेट ने एयर इंडिया के निजीकरण को मंजूरी दी. साल 2018 में एयर इंडिया को बेचने की कोशिश की गई, जो असफल रही.

रतन टाटा (Ratan Tata) ने एयर इंडिया की बोली Tata Sons के जीतने पर बधाई दी और ट्वीट किया ‘वेलकम बैक, एअर इंडिया!’ इसी के साथ उन्होंने एयर इंडिया की 1932 में शुरुआत करने वाले विजनरी बिजनेसमैन जेआरडी. टाटा का एअर इंडिया के साथ एक फोटो और मेसेज भी शेयर किया. अपने संदेश में रतन टाटा ने लिखा कि एयर इंडिया का टाटा समूह के पास लौटना एक अच्छी खबर है. ये स्वीकार करने वाली बात है कि एयर इंडिया को फिर से बनाने में बहुत मेहनत लगेगी. साथ ही एविएशन मार्केट में इससे टाटा समूह को पहुंच बढ़ाने का ठोस अवसर मिलेगा. खुश होंगेहों गे JRD Tata!

एअर इंडिया के जनक जेआरडी टाटा को याद करते हुए उन्होंने लिखा कि एक समय था, जब उनके नेतृत्व में एयर इंडिया दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एयरलाइंस थी. टाटा के पास मौका है कि एयर इंडिया को ये पहचान दोबारा दिलाए. अगर, हम ऐसा कर पाते हैं तो जेआरडी टाटा खुश होंगे. हम सरकार के भी शुक्रगुजार हैं कि उसने हाल में कई इंडस्ट्री को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलने की नीति अपनाई है.

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