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ट्रंप के टैरिफ से जोरदार तरीके से टूटा शेयर बाजार, 2020 में हुई थी बड़ी गिरावट

Updated at : 07 Apr 2025 4:22 PM (IST)
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Stock Market Close

Stock Market Close with fall.

Stock Market: 7 अप्रैल 2025 को ट्रंप के रेसिपोकल टैरिफ के ऐलान से वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई. सेंसेक्स 2226 अंक और निफ्टी 742 अंक लुढ़क गया. पहले भी 2020 में कोविड, 2024 में चुनाव और 2008 के वित्तीय संकट में बाजार बुरी तरह टूटा था. जानें पूरी खबर और इतिहास की बड़ी गिरावटें.

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Stock Market: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए रेसिपोकल टैरिफ के लागू होने से पहले दुनियाभर के शेयर बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है. इसके असर से भारतीय शेयर बाजार में भी चौतरफा हाहाकार मचा हुआ है. साप्ताहिक कारोबार के पहले दिन सोमवार 7 अप्रैल 2025 को बंबई स्टॉक एक्सेचेंज (बीएसई) का प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स करीब 2.95% या 2226.79 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 73,137.90 अंकों पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 3.24% या 742.85 अंक टूटकर 22,161.60 अंक पर पहुंच गया.

शुरुआती कारोबार में ही आई भारी गिरावट

सोमवार की सुबह बाजार का कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स 5.22% या 3,939.68 अंक के भारी गिरावट के साथ 71,425.01 अंक पर आ गया. इसके साथ ही, एनएसई निफ्टी 5.06% या 1,160.8 अंक फिसलकर 21,743.65 अंक पर पहुंच गया था.

4 जून 2024 को भी बाजार में मचा था हाहाकार

मनी कंट्रोल हिंदी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले, शेयर बाजार में 4 जून 2025 को तब बड़ी गिरावट आई थी, जब देश में आम चुनाव का रिजल्ट जारी किया गया था. इस दिन शेयर बाजार करीब 5% तक गिर गया था. हालांकि, इसके बाद बाजार ने जल्द ही रिकवरी कर लिया था.

23 मार्च 2020 को भी क्रैश कर गया था शेयर बाजार

वैश्विक महामारी कोरोना की शुरुआत में लॉकडाउन लगने से दो दिन पहले और जनता कर्फ्यू के एक दिन बाद 23 मार्च, 2020 को सेंसेक्स 3,953 अंकों तक गिर गया था. इस दिन सेंसेक्स करीब 13.2% तक गिरकर 25,881 पर आ गया था. उस समय किसी को कोरोना बीमारी के असर का अंदाज नहीं था. हालांकि, इसके कुछ महीनों के अंदर ही बाजार ने रिकवरी की और फिर शानदार प्रदर्शन दिखाना शुरू कर दिया.

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21 जनवरी 2008 को भी बाजार धराशायी

लेहमैन ब्रदर्स का 15 सितंबर 2008 को दिवालिया घोषित होने से पहले वैश्विक वित्तीय संकट की वजह से 21 जनवरी 2008 को भी बाजार में बड़ी गिरावट आई थी. लेहमैन ब्रदर्स का दिवालिया घोषित होते ही पूरी दुनिया महामंदी की चपेट में आ गया था. इस तारीख को सेंसेक्स 7.4% या 1,408 अंक टूट गया था. उस समय अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका से निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी थी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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