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स्टॉक मार्केट के धुरंधरों के छक्के छुड़ा देंगे ये सवाल, जवाब जानने पर कहेंगे 'आंय?'

Updated at : 04 Dec 2024 9:39 AM (IST)
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स्टॉक मार्केट के धुरंधरों के छक्के छुड़ा देंगे ये सवाल, जवाब जानने पर कहेंगे 'आंय?'

Stock Market FAQ

Stock Market FAQ: विशेषज्ञों की सलाह पर किसी कंपनी के शेयर में पैसा लगाना आसान है, लेकिन बाजार में इस्तेमाल होने वाले टर्मोलॉजी को समझना काफी कठिन है. बाजार के दिग्गज खिलाड़ी भी कई ऐसे सवालों का जवाब नहीं जानते.

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Stock Market FAQ: क्या आप किसी कंपनी के शेयर में पैसा लगाते हैं या लगाने का प्लान बना रहे हैं? बाजार विशेषज्ञों की सलाह पर तो आप किसी भी कंपनी के शेयर में पैसा लगा देंगे, लेकिन शेयर बाजार को समझ नहीं पाएंगे. शेयर बाजार से संबंधित आपके दिमाग में कई कठिन सवाल कौंधते रहेंगे और आपके विशेषज्ञ आपको बरगलाते रहेंगे. शेयर बाजार से संबंधित सैकड़ों ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब मठाधीश बने बैठे कई विशेषज्ञों को भी पता नहीं होता. यहां पर हम आपके लिए शेयर बाजार से संबंधित कुछ ऐसे जटिल सवालों का आसान शब्दों में जवाब पेश कर रहे हैं. इन्हें जानने के बाद स्टॉक मार्केट के खिलाड़ी के भी मुंह से ‘आंय’ शब्द निकल जाएगा.

शेयर क्या है?

मुख्य रूप से शेयर बांटने की एक प्रक्रिया है. आर्थिक बाजार के हिसाब से कहा जाए, तो शेयर किसी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बनाने का एक तरीका है. किसी कंपनी का शेयर खरीदने का अर्थ यह होता है कि वह उस कंपनी का आंशिक हिस्सेदार या मालिक बनने जा रहा है.

भारत में शेयर कितने प्रकार के होते हैं?

आम भाषा में केवल इक्विटी शेयर को ही शेयर कहा जाता है, लेकिन भारत में निवेशकों को शेयरों के दो विकल्प उपलब्ध हैं. इनमें इक्विटी शेयर और प्रीफरेंस शेयर शामिल हैं.

शेयर होल्डर या शेयरधारक किसे कहते हैं?

कोई भी व्यक्ति या संस्था का साधारण शेयर या प्रिफरेंस शेयर पर मालिकाना हक होता है, वह शेयर होल्डर कहलाता है. शेयरों के मालिकाना सबूत के तौर पर शेयर सर्टिफिकेट भी जारी किए जाते हैं.

सेंसेक्स को संवेदी सूचकांक क्यों कहा जाता है?

सेंसेक्स मूल्य आधारित सूचकांक है. इसकी गणना फ्री फ्लो कैपिटलाइजेंशन प्रक्रिया के आधार पर होती है. सेंसेक्स को संवेदी सूचकांक इसलिए कहा जाता है, क्योंकि सेंसेक्स का मतलब ‘स्टॉक एक्सचेंज सेंसिटिव इंडेक्स’ (शेयर विनिमय संवेदी सूचकांक) होता है. यह निवेशकों की संवेदना या धारणा से चलता है. चूंकि, इसमें निवेशकों की संवेदना जुड़ी है, इसीलिए इसे संवेदी सूचकांक कहा जाता है.

गिफ्ट निफ्टी क्या है?

गिफ्ट निफ्टी भारतीय शेयर बाजार सूचकांक डेरिवेटिव प्रोडक्ट है, जो एनएसएई (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) के बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी 50 के संकेतक के तौर पर काम करता है.

सूचकांक या इंडेक्स क्या है?

सूचकांक या इंडेक्स एक संख्या है, जो एक ग्रुप की कीमतों में समय के साथ आए बदलावों का आकलन करने के बाद प्रदर्शित करती है. किसी सेक्टर या ग्रुप में समय के साथ आए बदलावों को इंडेक्स के माध्यम से समझना आसान हो जाता है.

प्राथमिक बाजार अथवा प्राइमरी मार्केट क्या है?

प्राथमिक बाजार वह जगह है, जहां सिक्योरिटीज यानी प्रतिभूतियों को अस्तित्व में लाया जाता है. जब कोई कंपनी अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए नए शेयर या डिबेंचर जारी करके सीधे निवेशकों से धन जुटाती है, तो वह प्राथमिक बाजार का इस्तेमाल करती है. प्राथमिक बाजार में कंपनियां धन जुटाने के लिए आईपीओ के जरिए निवेशकों के लिए नया शेयर जारी करती है.

सेकंडरी मार्केट या द्वितीयक बाजार क्या है?

सेकंडरी मार्केट वह स्थान है, जहां विभिन्न कंपनियों की ओर से पहले से जारी किए गए शेयर, डिबेंचर या अन्य सिक्योरिटीज का लेनदेन किया जाता है.

कैपिटल इश्यू किसे कहते हैं?

जब कोई कंपनी पूंजी जुटाने के लिए शेयर जारी करती है, तो उसे कैपिटल इश्यू कहते हैं.

प्रीमियम इश्यू क्या है?

जब कोई कंपनी नए शेयरों की कीमत उसकी फेस वैल्यू से ऊपर रखकर जारी करती है, तो उसे प्राइमरी इश्यू कहते हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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