राहत पैकेज की इस शर्त से छोटे कारोबारी परेशान, आखिर कैसे बचेंगी लाखों नौकरियां?

Updated at : 04 Jun 2020 4:37 PM (IST)
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राहत पैकेज की इस शर्त से छोटे कारोबारी परेशान, आखिर कैसे बचेंगी लाखों नौकरियां?

सरकार की ओर से पिछले महीने घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज में सूक्ष्म, लघु और मध्यम (एमएसएमई) इकाइयों को 3 लाख करोड़ रुपये आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (जीईसीएल स्कीम) के तहत बिना गारंटी कर्ज (कोलैटरल लोन) पर बैंकों की शर्त से छोटे कारोबारी परेशान नजर आ रहे है. देश के बैंकों की ओर से छोटे कारोबारियों के सामने आपातकालीन कर्ज की मंजूरी के बदले पहले के बकाया भुगतान की शर्त रखे जाने से एमएसएमई क्षेत्र में काम करने वाले लाखों मजदूरों के सामने भी रोजगार के संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

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नयी दिल्ली : सरकार की ओर से पिछले महीने घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज में सूक्ष्म, लघु और मध्यम (एमएसएमई) इकाइयों को 3 लाख करोड़ रुपये आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (जीईसीएल स्कीम) के तहत बिना गारंटी कर्ज (कोलैटरल लोन) पर बैंकों की शर्त से छोटे कारोबारी परेशान नजर आ रहे है. देश के बैंकों की ओर से छोटे कारोबारियों के सामने आपातकालीन कर्ज की मंजूरी के बदले पहले के बकाया भुगतान की शर्त रखे जाने से एमएसएमई क्षेत्र में काम करने वाले लाखों मजदूरों के सामने भी रोजगार के संकट के बादल मंडरा रहे हैं. सरकार ने इस क्षेत्र में काम करने वाले करीब 12 करोड़ श्रमिकों की नौकरियां बचाने के लिए ही छोटे कारोबारियों को जीईसीएल स्कीम के तहत 3 लाख करोड़ रुपये के कोलैटरल लोन देने की सुविधा प्रदान की है.

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अंग्रेजी की न्यूज वेबसाइट मनी कंट्रोल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, जीईएसीएल स्कीम के तहत छोटे कारोबारियों को कोलैटरल लोन उपलब्ध कराने के बदले देश के कुछ बैंक उनके सामने एक शर्त रख रहे हैं. वह शर्त यह है कि बैंक उनके कोलैटरल लोन की मंजूरी तो दे देगा, लेकिन इस कर्ज के पैसों से पहले उन्हें पूर्व के लोन का बकाया भुगतान करना होगा.

वेबसाइट ने अपनी खबर में एक छोटे कारोबारी के हवाले से लिखा है, ‘हम आपको गारंटीड इमरजेंसी क्रेडिट लाइन (जीईसीएल) स्कीम के तहत लोन देंगे, लेकिन आप अपने मौजूदा लोन की बकाया राशि का भुगतान करने के लिए इस पैसे का उपयोग करें.’ खबर में यह भी कहा गया है कि ये वही कुछ बैंक हैं, एमएसएमई के छोटे कारोबारियों को क्रेडिट गारंटी का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हैं.

नाम न छापने की शर्त पर एमएसएमई के एक छोटे कारोबारी ने बताया, ‘मैं एक चमड़े की जूता बनाने की एक छोटी कंपनी चलाता हूं. जब मैंने इस योजना के तहत लोन के लिए बैंक से संपर्क किया, तो उन्होंने मुझे एक लेटर दिया, जिसमें कहा गया था कि लोन दिया जाएगा, लेकिन मुझे इस राशि का इस्तेमाल क्रेडिट की एक पुराने बकाये का भुगतान करने के लिए करना होगा. इसका मतलब है कि मैं इन पैसों का इस्तेमाल अपने व्यवसाय के पुनरुद्धार के लिए नहीं कर सकता.’

दरअसल, इस छोटे कारोबारी के पास किसी एक सरकारी बैंक का लोन बकाया था. उन्होंने कार्यशील पूंजीगत उद्देश्यों के लिए इस साल जनवरी में उक्त सरकारी बैंक से 7.5 लाख रुपये की क्रेडिट सुविधा हासिल की थी. इस लोन की मैच्यूरिटी डेट एक साल की है. बैंक ने अब जीईसएल स्कीम के तहत नए 7 लाख रुपये के लोन की पेशकश की है, लेकिन जनवरी में लिये गये लोन को बंद करने के लिए इस नए लोन को समायोजित करने के लिए प्रस्ताव पत्र में एक शर्त जोड़ रखी है. यह शर्त बैंक द्वारा मूल योजना परिपत्र में जोड़ी गयी है.

गौरतलब है कि सरकार ने कोविड-19 महामारी के इस दौर में बाजार में नकदी उपलब्ध कराने के लिए पिछले महीने करीब 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया था. इसमें से करीब 3 लाख करोड़ रुपये से एमएसएमई क्षेत्र छोटे कारोबारियों को जीईसीएल स्कीम के तहत बिना गारंटी के लोन सुविधा भी प्रदान की गयी है. इसके पीछे सरकार का उद्देश्य से इस क्षेत्र में काम करने वाले देश के करीब 12 करोड़ श्रमिकों की नौकरियों को बचाना था.

इस 3 लाख करोड़ रुपये के जीईसीएल स्कीम के तहत छोटे कारोबारियों को बिना गारंटी के लोन उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने यह नियम भी तय किये हैं कि करीब 25 करोड़ रुपये तक की आमदनी और 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाले एमएसएमई देश के बैंकों और एनबीएफसी से 29 फरवरी, 2020 तक पूरे बकाया लोन का 20 फीसदी तक आवेदन कर सकते हैं. सरकारी बैंकों ने आपातकालीन क्रेडिट लाइन योजना के तहत एक जून तक 10,361.75 करोड़ रुपये के बिना गारंटी वाले लोन की मंजूरी भी दे दी है.

Posted By : Vishwat Sen

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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