एसबीआई रिसर्च ने रघुराम राजन के 'हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ' वाले बयान को खारिज किया, कहा- टिप्पणी पक्षपातपूर्ण
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 07 Mar 2023 5:18 PM
आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने दो दिन पहले समाचार एजेंसी भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि जीडीपी वृद्धि के आंकड़े इसके खतरनाक रूप से हिंदू वृद्धि दर के बेहद करीब पहुंच जाने के संकेत दे रहे हैं.
नई दिल्ली : भारत की मौजूदा आर्थिक वृद्धि दर को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ वाले बयान को एसबीआई रिसर्च ने पक्षपातपूर्ण, बचकाना और बिना सोचा-समझा हुआ बताते हुए मंगलवार को खारिज कर दिया है. एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट ‘इकोरैप’ कहती है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के हाल में आए आंकड़े और बचत एवं निवेश के उपलब्ध आंकड़ों को देखने पर इस तरह के बयानों में कोई आधार नजर नहीं आता है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, तिमाही आंकड़ों के आधार पर जीडीपी वृद्धि को लेकर व्याख्या करना सच्चाई को छिपाने वाले भ्रम को फैलाने की कोशिश जैसा है.
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने दो दिन पहले समाचार एजेंसी भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि जीडीपी वृद्धि के आंकड़े इसके खतरनाक रूप से हिंदू वृद्धि दर के बेहद करीब पहुंच जाने के संकेत दे रहे हैं. उन्होंने इसके लिए निजी निवेश में गिरावट, उच्च ब्याज दरों और धीमी पड़ती वैश्विक वृद्धि जैसे कारकों को जिम्मेदार बताया था.
‘हिंदू वृद्धि दर’ शब्दावली का इस्तेमाल 1950-80 के दशक में भारत की 3.5 फीसदी की औसत वृद्धि दर के लिए किया गया था. भारतीय अर्थशास्त्री राज कृष्णा ने सबसे पहले 1978 में ‘हिंदू वृद्धि दर’ शब्दावली का इस्तेमाल किया था. देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की शोध टीम की तरफ से जारी रिपोर्ट में राजन के इस दावे को नकार दिया गया है. रिपोर्ट कहती है कि तिमाही आंकड़ों के आधार पर किसी भी गंभीर व्याख्या से परहेज करना चाहिए.
एसबीआई ग्रुप के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है. घोष ने कहा है कि बीते दशकों के निवेश एवं बचत आंकड़े कई दिलचस्प पहलू रेखांकित करते हैं. रिपोर्ट कहती है कि सरकार की तरफ से सकल पूंजी सृजन (जीसीएफ) वित्त वर्ष 2021-22 में 11.8 फीसदी हो गया, जबकि 2020-21 में यह 10.7 फीसदी था. इसका निजी क्षेत्र के निवेश पर भी प्रभाव पड़ा और यह इस दौरान 10 फीसदी से बढ़कर 10.8 फीसदी पर पहुंच गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में कुल मिलाकर सकल पूंजी सृजन के बढ़कर 32 फीसदी हो जाने का अनुमान है. पिछले वित्त वर्ष में यह 30 फीसदी और उसके पहले 29 फीसदी रहा था. इसके अलावा, सकल बचत भी वित्त वर्ष 2021-22 में बढ़कर 30 फीसदी हो गई, जो उसके एक साल पहले 29 फीसदी थी. चालू वित्त वर्ष में इसके 31 फीसदी से अधिक रहने का अनुमान है, जो 2018-19 के बाद का सर्वोच्च स्तर होगा.
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हालांकि एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की संभावित वृद्धि दर पहले की तुलना में अब कम रहेगी. उस लिहाज से भी देखें, तो सात फीसदी की जीडीपी वृद्धि दर किसी भी मानक से एक अच्छी दर है. देश की जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में घटकर 4.4 फीसदी पर आ गई. इसके साथ ही एनएसओ ने चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर के सात फीसदी पर रहने का अनुमान जताया है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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