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'तैयार घरों पर ज्यादा मुनाफा कमाने के फेर में न रहे डेवलपर, जल्द करें बिक्री और समय पर चुकाएं कर्ज'

Updated at : 11 Apr 2020 9:07 PM (IST)
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'तैयार घरों पर ज्यादा मुनाफा कमाने के फेर में न रहे डेवलपर, जल्द करें बिक्री और समय पर चुकाएं कर्ज'

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने शनिवार को कहा कि रियल एस्टेट कंपनियां तैयार घरों को अधिक मुनाफे की आस में रोके रखने की बजाय उन्हें जल्दी बेचने और अपने कर्ज की किस्तें समय से निपटाते रहने पर ध्यान केंद्रित करें.

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नयी दिल्ली : भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने शनिवार को कहा कि रियल एस्टेट कंपनियां तैयार घरों को अधिक मुनाफे की आस में रोके रखने की बजाय उन्हें जल्दी बेचने और अपने कर्ज की किस्तें समय से निपटाते रहने पर ध्यान केंद्रित करें. उन्होंने रियल एस्टेट कंपनियों के संगठन नारेडको के एक कार्यक्रम को वीडियो कांफ्रेंस से संबोधित करते हुए कहा कि यदि रियल एस्टेट कंपनियों को बाजार में बने रहना है और सामान्य कारोबार को यथासंभव शीघ्र पटरी पर लौटना है, तो उन्हें कुछ चीजों पर ध्यान देने की जरूरत है. उन्हें तैयार घरों को जल्दी बेचने, बैंक किस्तों के भुगतान में चूक से बचने तथा रियल एस्टेट क्षेत्र के बारे में आम धारणा बदलने पर ध्यान देने की जरूरत है.

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पांच साल में पैसा दोगुना करने का अब नहीं रहा दौर : उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी हो सके, तैयार पड़ी आवासीय इकाइयों को बेचिए. हमें यह लग रहा था कि कीमतें चढ़ेंगी, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से ऐसा नहीं हो पा रहा है. एक समय था, जब बाजार में ऐसे खरीदार थे, जो पहली बार घर खरीद रहे थे. तब बाजार में निवेशक भी थे और आपके पास पांच साल में निवेश को दो गुना कर लेने की संभावनाएं थीं. अब वह समय गुजर चुका है.

निर्माण समय और लागत में कमी करने की जरूरत : एसबीआई चेयरमैन ने कहा कि अब रियल एस्टेट उद्योग को लागत कम करने तथा निर्माण में लगने वाले समय में कमी लाने पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह देखिए कि हम निर्माण में लगने वाले समय को कैसे कम कर सकते हैं? हम निर्माण सामग्रियों के मामले में लागत कैसे कम रख सकते हैं? उद्योग जगत को राज्य सरकारों तथा स्थानीय प्रशासन को यह आभास करना होगा कि यह क्षेत्र कोई नकद पैसे देने वाली ऐसी गाय नहीं है, जिसे दूहते रहा जा सकता है. इसलिए जरूरत है कि लागत कम की जाए.

ब्याज दरों को कम से कम रखने का किया जाएगा प्रयास : उन्होंने बैंकिंग के मामले में आश्वासन दिया कि वृहद आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से ब्याज की दरों को कम-से-कम रखे जाने का प्रयास किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हर किसी का प्रयास होना चाहिए कि आवास किफायती हो, निर्माण तेजी से हो और कीमत बढ़ने के अनुमान में उन्हें रोके रखे जाने के बजाय जल्दी से बेचा जा रहा हो.

रेरा ने किया है बेहतर, लेकिन लंबी दूरी तय करना बाकी : कुमार ने रियल एस्टेट कंपनियों को लेकर कहा कि रियल एस्टेट नियमन एवं विकास अधिनियम (रेरा) ने इस क्षेत्र में कंपनी संचालन को कुछ बेहतर किया है, लेकिन अभी इस दिशा में लंबी दूरी तय की जानी बाकी है.

टेबल के नीचे से हो जाता है बहुत सारा काम : उन्होंने कहा कि यह मैं नहीं कह रहा हूं, लेकिन आम धारणा यही है कि रियल एस्टेट में खूब मुनाफाखोरी की जाती है. इसमें बहुत सारी चीजें टेबल के नीचे से हो जाती हैं. सभी लेन-देन सफेद नहीं होता है. यह सच हो सकता है या सिर्फ धारणा, मैं नहीं जानता, लेकिन उद्योग जगत के स्तर पर इस धारणा में सुधार लाने की जरूरत है.

अर्थव्यवस्था में रियल एस्टेट का अहम योगदान : एसबीआई चेयरमैन ने कहा कि अर्थव्यवस्था में रियल एस्टेट का महत्वपूर्ण योगदान है. निर्माण क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 15 फीसदी योगदान देता है. यह बड़े स्तर पर लोगों को रोजगार देता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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