Russian Crude Import: फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पश्चिमी देशों की ओर से रूस पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बीच भारत रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है. यूरोपीय शोध संस्था सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीईआरए) के अनुसार, भारत ने युद्ध की शुरुआत से जनवरी 2026 तक रूस से लगभग 143.88 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल आयात किया है.
रूस की तेल कमाई में भारत-चीन की बड़ी भूमिका
मंगलवार को जारी सीईआरए की रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2022 से अब तक रूस ने वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधन की बिक्री से करीब 1,000 अरब यूरो से ज्यादा की कमाई की है. इस दौरान चीन रूस का सबसे बड़ा खरीदार रहा, जबकि भारत दूसरे स्थान पर रहा. चीन ने इस अवधि में रूस से 210.3 अरब यूरो का तेल, 42.7 अरब यूरो का कोयला और 40.6 अरब यूरो की गैस खरीदी. कुल मिलाकर चीन की ऊर्जा खरीद 293.7 अरब यूरो तक पहुंच गई.
भारत ने कितने अरब यूरो का ईंधन खरीदा?
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने इस अवधि में रूस से कुल 162.5 अरब यूरो मूल्य के जीवाश्म ईंधन खरीदे. इसमें 143.88 अरब यूरो का कच्चा तेल और 18.18 अरब यूरो का कोयला शामिल है. भारत की यह खरीद दिखाती है कि कैसे युद्ध और प्रतिबंधों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सस्ते रूसी तेल का बड़े पैमाने पर आयात किया.
यूरोपीय संघ भी पूरी तरह नहीं तोड़ पाया ऊर्जा रिश्ता
हालांकि, यूरोपीय संघ ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाए, लेकिन पूरी तरह ऊर्जा आयात बंद नहीं कर पाया. रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संघ ने इस अवधि में रूस से 218.1 अरब यूरो का जीवाश्म ईंधन खरीदा. इसमें 106.3 अरब यूरो तेल, 3.5 अरब यूरो कोयला और 108.2 अरब यूरो गैस शामिल है. सीईआरए के मुताबिक, दिसंबर 2022 और फरवरी 2023 में प्रतिबंध लागू होने के बाद यूरोपीय संघ के आयात में लगातार गिरावट आई, लेकिन हंगरी और स्लोवाकिया अब भी रूसी तेल का आयात कर रहे हैं.
प्रतिबंधों के बावजूद रूस को कैसे हुई कमाई?
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिबंध लगाने वाले कई देश रूसी कच्चे तेल से बने परिष्कृत उत्पादों का आयात करते रहे, जिससे रूस के राजस्व को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिला. सीईआरए का दावा है कि रूस ने जीवाश्म ईंधन की बिक्री से होने वाली कमाई का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया.
भारत क्यों बना रूसी तेल का बड़ा खरीदार?
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के दूरी बनाने से रूस को अपना तेल रियायती दरों पर बेचना पड़ा. इसका सबसे बड़ा फायदा भारत ने उठाया. परंपरागत रूप से पश्चिम एशिया पर निर्भर भारत ने सस्ता रूसी तेल मिलने से आयात तेजी से बढ़ा दिया. नतीजतन, भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई.
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अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद घटने लगी रूस की हिस्सेदारी
अमेरिका ने नवंबर 2025 में रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और ल्यूकऑयल पर नए प्रतिबंध लगाए. इससे पहले रूस भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 35 प्रतिशत आपूर्ति करता था. प्रतिबंध लागू होने के बाद रूस की हिस्सेदारी घटकर 25 प्रतिशत से भी नीचे आ गई.
भाषा इनपुट के साथ
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