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आरबीआई का गजब आइडिया, कटे-फटे नोटों से बनेगा लकड़ी का बोर्ड

Updated at : 29 May 2025 9:04 PM (IST)
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RBI

RBI waste notes

RBI: आरबीआई अब कटे-फटे और पुराने नोटों का पर्यावरण-अनुकूल निपटान करेगा. इन नोटों से लकड़ी के पार्टिकल बोर्ड बनाए जाएंगे, जिससे लगभग 15,000 टन अपशिष्ट का पुनर्चक्रण संभव होगा. RBI ने इस परियोजना के लिए बोर्ड निर्माताओं को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह पहल सतत विकास और हरित भारत अभियान को बढ़ावा देती है.

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RBI: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब पुराने और कटे-फटे नोटों के निपटान के लिए पारंपरिक तरीकों से हटकर एक हरित (ग्रीन) विकल्प अपनाने जा रहा है. इसके तहत, RBI इन बेकार नोटों का इस्तेमाल पार्टिकल बोर्ड (लकड़ी के बोर्ड) बनाने में करेगा, जिससे पर्यावरण पर बोझ कम किया जा सके.

15,000 टन नोटों का दोबारा इस्तेमाल

RBI की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 15,000 टन कटे-फटे बैंक नोट या उनसे बने ब्रिकेट्स पैदा होते हैं. अब तक इनका निपटान जमीन भरने या जलाने के माध्यम से किया जाता था, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है.

अध्ययन से मिला समाधान

RBI ने एक अध्ययन के लिए पर्यावरण मंत्रालय के तहत आने वाले काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान को नियुक्त किया. इस अध्ययन में यह पाया गया कि नोटों से बने ब्रिकेट्स की गुणवत्ता इतनी अधिक है कि वह लकड़ी के बोर्ड के तकनीकी मानकों को पूरा करती है.

पार्टिकल बोर्ड निर्माता होंगे शामिल

RBI ने ऐसे पार्टिकल बोर्ड विनिर्माताओं को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो इन ब्रिकेट्स को लकड़ी के कणों की जगह उपयोग में लाएंगे. ये बोर्ड विभिन्न औद्योगिक और फर्नीचर निर्माण में इस्तेमाल किए जाएंगे.

मुद्रा प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम

RBI का मुद्रा प्रबंधन विभाग अब नोटों के निपटान के लिए और अधिक टिकाऊ, हरित विकल्पों की खोज को “सक्रिय रूप से आगे” बढ़ाएगा. इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षा को बल मिलेगा, बल्कि अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक मजबूत पहल भी होगी.

क्यों जरूरी है यह पहल?

बैंक नोटों में इस्तेमाल होने वाले सुरक्षा धागे, विशेष स्याही और रसायन पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं. ऐसे में उनका सुरक्षित और उपयोगी पुनर्चक्रण समय की मांग बन चुका है.

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आरबीआई का अनोखा प्रयोग

भारतीय रिजर्व बैंक का यह कदम पुराने नोटों को पर्यावरण हितैषी तरीके से उपयोग में लाने की दिशा में एक अभिनव और प्रेरणादायक पहल है. इससे सतत विकास और ग्रीन इंडिया की ओर देश का एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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