भारत के साथ जंग बर्दाश्त नहीं कर सकता पाकिस्तान, रेटिंग एजेंसी मूडीज ने दी चेतावनी

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India Pakistan War

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India Pakistan War: भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान युद्ध की धमकी दे रहा है. लेकिन, मूडीज ने चेताया है कि वह भारत से जंग बर्दाश्त नहीं कर सकता. भारी विदेशी कर्ज, कम विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक बदहाली के बीच पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई उसकी स्थिति और बिगाड़ सकती है. भारत की जवाबी कार्रवाई से उसकी आर्थिक रीढ़ पर गहरा असर पड़ सकता है, क्योंकि उसके पास सिर्फ तीन महीने के आयात करने तक ही विदेशी मुद्रा भंडार बचा है.

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India Pakistan War: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है. भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत मिसाइलों के जरिए पड़ोसी देश में घुसे बिना ही आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तय्यबा ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया. भारत की इस सैन्य कार्रवाई के बाद अब पाकिस्तान भारत पर जवाबी कार्रवाई करने की गीदड़ भभकी दे रहा है. उसकी इस हरकत पर रेटिंग एजेंसी मूडीज ने चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ कभी भी जंग बर्दाश्त कर ही नहीं सकता.

ताकत दिखाने को मिसाइल परीक्षण कर रहा पाकिस्तान

अंग्रेजी की वेबसाइट सीएनबीसी टीवी18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ओर से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में स्थित आतंकी ठिकानों पर हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. इस्लामाबाद अपनी ताकत दिखाने के लिए मिसाइल परीक्षण कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज की रिपोर्ट पाकिस्तान की कंगाली भी उजागर की गई है. मूडीज ने 5 मई 2025 को अपने निवेशकों को भेजे एक नोट में साफ चेतावनी दी कि अगर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ा, तो पाकिस्तान की विदेशी वित्तीय सहायता बाधित हो सकती है. इससे उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ेगा.

सिर्फ तीन महीने ही आयात कर सकता है पाकिस्तान

पाकिस्तान पहले से ही गहरे आर्थिक कंगाली के दौर से जूझ रहा है. कोविड महामारी के बाद की आर्थिक सुस्ती, रूस-यूक्रेन युद्ध से बढ़ती वैश्विक महंगाई और घरेलू राजनीतिक अस्थिरता ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है. दिसंबर 2024 के अंत तक पाकिस्तान पर 131 बिलियन डॉलर से अधिक का विदेशी कर्ज था. इतना ही नहीं, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार महज तीन महीनों के आयात बिल कवर करने लायक है.

ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ पर प्रहार

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में बहावलपुर, मुजफ्फराबाद और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जहां जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों का संचालन होता है. यह कार्रवाई सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि पाकिस्तान को यह भी स्पष्ट संदेश है कि भारत अब प्रतिकार करेगा. लेकिन, भारत की यह जवाबी कार्रवाई पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक रीढ़ पर और प्रहार करती है.

भारत की कार्रवाई से चिंता में चीन

चीन ने हाल ही में पाकिस्तान को 2 बिलियन डॉलर का कर्ज दिया है. युद्ध जैसी स्थिति में पाकिस्तान की कर्ज चुकाने की क्षमता और घट सकती है, जो चीन जैसे कर्जदाताओं को भी जोखिम में डाल सकती है. ऐसे में पाकिस्तान के लिए किसी भी सैन्य टकराव की कीमत उसकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा सकती है.

भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत

मूडीज के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच आर्थिक संबंध बहुत ही सीमित हैं. भारत के कुल निर्यात का मात्र 0.5% पाकिस्तान को जाता है. ऐसे में तनाव बढ़ने पर भी भारत की आर्थिक गतिविधियों पर बहुत बड़ा ��सर नहीं पड़ेगा. हालांकि, बढ़ा हुआ रक्षा खर्च भारत के राजकोषीय समेकन को धीमा कर सकता है.

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भारत के साथ जंग पाकिस्तान का आत्मघाती कदम

पाकिस्तान यदि भारत के साथ तनाव बढ़ाता है, तो यह केवल उसकी अर्थव्यवस्था को और डुबोने वाला आत्मघाती कदम साबित होगा. भारत ने जहां निर्णायक सैन्य कार्रवाई कर आतंकवाद को जवाब दिया है, वहीं पाकिस्तान को पहले अपनी आंतरिक आर्थिक स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए, ना कि युद्धोन्माद को भड़काना चाहिए.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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