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Onion: किसानों के पास नहीं पहुंच रहा प्याज का मुनाफा,खा रहा है कौन?

Updated at : 04 Oct 2024 5:31 PM (IST)
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Indian Farmer

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक शोध पत्र में खुलासा किया गया है कि प्याज, टमाटर और आलू के किसानों को उपभोक्ताओं द्वारा किए गए खर्च का केवल एक छोटा हिस्सा मिलता है

Onion: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक शोध पत्र में खुलासा किया गया है कि प्याज, टमाटर और आलू के किसानों को उपभोक्ताओं द्वारा किए गए खर्च का केवल एक छोटा हिस्सा मिलता है. प्याज के लिए यह हिस्सा 36%, टमाटर के लिए 33%, और आलू के लिए 37% है. इस असमानता को दूर करने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए शोध पत्र में कृषि विपणन क्षेत्र में सुधार की सिफारिश की गई है, जिसमें निजी मंडियों की संख्या बढ़ाने, ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एनएएम) का अधिक उपयोग करने और किसान उपज संगठनों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है. साथ ही, सर्दियों की प्याज फसल के लिए वायदा कारोबार शुरू करने की भी वकालत की गई है ताकि मूल्य स्थिरता और जोखिम प्रबंधन को बेहतर किया जा सके.

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Onion: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक शोध पत्र में कहा गया है कि प्याज किसानों को उपभोक्ताओं के खर्च का केवल 36 प्रतिशत मिलता है. वहीं टमाटर के लिए यह 33 प्रतिशत और आलू के मामले में 37 प्रतिशत है.

शोध पत्र में स्थिति में सुधार के लिए कृषि विपणन क्षेत्र में सुधार का सुझाव दिया गया है. इसमें किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद के लिए निजी मंडियों की संख्या बढ़ाने की बात शामिल है.

टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों को लेकर सब्जियों की महंगाई पर अध्ययन पत्र में कहा गया है.

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कृषि विपणन में सुधार की सिफारिशें

‘‘चूंकि सब्जियां जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं हैं, ऐसे में टमाटर, प्याज और आलू के विपणन में पारदर्शिता में सुधार के लिए निजी मंडियों की संख्या को बढ़ाया जा सकता है. प्रतिस्पर्धा से स्थानीय स्तर की कृषि उपज बाजार समिति के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है.’’

सकल मुद्रास्फीति पर हाल के दबाव के पीछे खाद्य मुद्रास्फीति को जिम्मेदार ठहराया गया है. इसमें टमाटर, प्याज और आलू के दाम में भारी उतार-चढ़ाव सबसे चुनौतीपूर्ण रही हैं.

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शोध पत्र को आर्थिक अनुसंधान विभाग (डीईपीआर) के कर्मचारियों तथा बाहर के लेखकों ने मिलकर तैयार किया है. शोधकर्ताओं ने पाया कि बाजारों में मौजूदा कमियों को कम करने में मदद के लिए ई-राष्ट्रीय कृषि बाजारों (ई-एनएएम) का लाभ उठाया जाना चाहिए. इससे किसानों को प्राप्त कीमतों में वृद्धि होगी जबकि दूसरी तरफ उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान की जाने वाली कीमतें कम होंगी.

उपज संगठनों को बढ़ावा देना

शोध पत्र में टमाटर, प्याज और आलू के मामले में किसान उपज संगठनों को बढ़ावा देने की बात कही गयी है. साथ ही प्याज में खासकर सर्दियों की फसल के लिए वायदा कारोबार शुरू करने की वकालत की गयी है. इससे अनुकूलतम मूल्य खोज और जोखिम प्रबंधन में मदद मिलेगी.

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इसमें इन सब्जियों के भंडारण, उनके प्रसंस्करण और उत्पादकता बढ़ाने के तरीकों के बारे में सुझाव दिये गये हैं.

इस बीच, चना, तुअर और मूंग पर जोर के साथ दाल की मुद्रास्फीति पर इसी तरह के एक अध्ययन में कहा गया है कि चने पर उपभोक्ता खर्च का लगभग 75 प्रतिशत किसानों के पास गया. मूंग और अरहर के मामले में यह क्रमश: 70 प्रतिशत तथा 65 प्रतिशत है.

आरबीआई ने साफ किया है कि शोध पत्र में विचार लेखकों के हैं और उससे उसका कोई लेना-देना नहीं है.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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