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SIP का नियम 7-5-3-1 क्या है, जिसमें छुपा है करोड़पति बनने का राज?

Updated at : 04 Oct 2024 7:13 PM (IST)
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SIP: व्यवस्थित निवेश योजना को संक्षेप में एसआईपी कहा जाता है. एसआईपी म्यूचुअल फंड कंपनियों द्वारा पेश किया जाने वाला एक लोकप्रिय निवेश सशक्त विकल्प है. वे निवेशकों को नियमित रूप से म्यूचुअल फंड स्कीम में एक निश्चित राशि निवेश करने में सक्षम बनाते हैं.

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SIP: महंगाई के इस दौर में हर आदमी पैसा कमाना चाहता है. बिना पैसा के लोगों को अपना जीवन कष्टमय दिखाई देता है. लोग पैसा जमा करने के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स, बचत खाता, फिक्स्ड डिपॉजिट, कंपनियों के शेयर, म्यूचुअल फंड्स और न जाने कहां-कहां पैसा जमा करते हैं. फिर भी करोड़पति नहीं बन पाते. इसका कारण यह है कि ऐसे लोग पैसा जमा करते तो हैं, लेकिन सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के नियमों को फॉलो नहीं करते. एसआईपी के नियमों को फॉलो करते हुए अगर आप किसी भी म्यूचुअल फंड में पैसा जमा करेंगे, तो आप मोटा रिटर्न पाने के साथ-साथ दूसरी बचत योजनाओं के मुकाबले कई गुना अधिक पैसा जमा कर पाएंगे. एसआईपी के इन्हीं नियमों में से एक 7-5-3-1 का नियम है, जो आपको कम समय में छोटी-छोटी रकम के निवेश के बावजूद मालामाल करने की ताकत रखता है.

एसआईपी को जानें

व्यवस्थित निवेश योजना को संक्षेप में एसआईपी कहा जाता है. एसआईपी म्यूचुअल फंड कंपनियों द्वारा पेश किया जाने वाला एक लोकप्रिय निवेश सशक्त विकल्प है. वे निवेशकों को नियमित रूप से म्यूचुअल फंड स्कीम में एक निश्चित राशि निवेश करने में सक्षम बनाते हैं. इससे रुपया-लागत औसत का लाभ मिलता है और बाजार में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है.

एसआईपी का नियम 7 क्या है?

एसआईपी का 7-5-3-1 नियम निवेशकों को कम से कम 7 साल तक इक्विटी फंड में निवेश करने की सलाह देता है. कम से कम सात साल तक इक्विटी एसआईपी में निवेश करने से चक्रवृद्धि ब्याज की शक्ति अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचती है. एसआईपी की यह रणनीति बाजार में उतार-चढ़ाव को स्थिर करने और निवेश की गई पूंजी को बढ़ने के लिए पर्याप्त समय देती है.

एसआईपी का नियम 5 क्या है?

एसआईपी के 7-5-3-1 नियम का दूसरा सिद्धांत स्थिरता और विकास के लिए अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाना है. 5 फिंगर फ्रेमवर्क जोखिम और रिटर्न को प्रभावी ढंग से संतुलित करने के लिए 5 प्रमुख एसेट क्लासेज में निवेश करने की सलाह देता है. इन एसेट क्लास में हाई-क्वालिटी या लार्ज-कैप स्टॉक, वैल्यू स्टॉक, ग्रैप (उचित मूल्य पर वृद्धि) स्टॉक, मिडकैप या स्मॉल-कैप स्टॉक और ग्लोबल स्टॉक शामिल हैं.

  • लार्ज-कैप स्टॉक: हाई क्वालिटी वाले या लार्ज-कैप स्टॉक एक मजबूत निवेश पोर्टफोलियो की नींव होते हैं, क्योंकि उनके पास मजबूत आर्थिक बुनियादी तत्व और परफॉर्मेंस के रिकॉर्ड होते हैं. वे बाजार में गिरावट के दौरान स्थिरता प्रदान करते हैं और पोर्टफोलियो की अस्थिरता को कम करने में मदद करते हैं.
  • वैल्यू स्टॉक: वैल्यू स्टॉक फिलहाल बाजार में कम मूल्यांकित हैं और उनमें निवेश करना लंबी अवधि में लाभदायक हो सकता है, क्योंकि उनके मूल्य में वृद्धि होने की संभावना है.
  • ग्रैप स्टॉक्र: ग्रैप स्टॉक उभरते या तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में आशाजनक कंपनियां हैं. ये स्टॉक विकास और मूल्य निवेश दोनों को मिलाते हैं. भारत में ड्रोन और दूरसंचार जैसे क्षेत्र इसके उदाहरण हैं, जहां ग्रैप स्टॉक पाए जा सकते हैं. ये भविष्य में महत्वपूर्ण विकास की संभावना प्रदान करते हैं.
  • मिडकैप और स्मॉल-कैप स्टॉक: मिडकैप और स्मॉल-कैप स्टॉक पर्याप्त विकास क्षमता वाली कंपनियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि इनमें लार्ज-कैप स्टॉक की तुलना में अधिक जोखिम उठाते हैं. ऐसे स्टॉक बंपर रिटर्न दे सकते हैं.
  • ग्लोबल स्टॉक: ग्लोबल स्टॉक में निवेश करने से पोर्टफोलियो में भौगोलिक विविधता आती है. यह स्थानीय आर्थिक मंदी से बचाती है. यह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अवसर भी खोलता है, घरेलू जोखिमों के खिलाफ बचाव प्रदान करता है और पोर्टफोलियो रिटर्न को बढ़ाता है.

एसआईपी का नियम 3 क्या है?

एसआईपी के 7-5-3-1 नियम का तीसरा सिद्धांत तीन प्रकार की चुनौतीपूर्ण फेज के लिए तैयार रहना है, जिनका सामना एसआईपी निवेशक अक्सर किया करते हैं. ये तीन चरण निराशा, चिड़चिड़ापन और घबराहट हैं.

  • निराशा वाला चरण (7-10% रिटर्न): एसआईपी के जरिए म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने के बाद निवेशक बंपर रिटर्न की उम्मीद करते हैं. ऐसे में पैसा लगाने के बाद औसत रिटर्न मिलने के बाद वे असंतुष्ट महसूस करते हैं. यह समझना बेहद जरूरी है कि औसत या मध्यम रिटर्न मिलने पर अभी भी आपको हमेशा सकारात्मक सोच बनाए रखना है और अपने निवेश को जारी रखना है. इसका कारण यह है कि आप सकारात्मक सोच के साथ प्रगति का प्रतिनिधित्व करते हैं और निवेश प्रक्रिया का हिस्सा हैं. एसआईपी का यह नियम आपको निराश होने से बचाने के लिए तैयार होने में मदद करेंगे.
  • चिड़चिड़ापन वाला चरण (0-7% रिटर्न): एसआईपी में निवेश के बाद 0-7% रिटर्न मिलने पर निवेशक परेशानी महसूस कर सकते हैं. वह यह सोचकर परेशान होते हैं कि फिक्स्ड डिपॉजिट बेहतर रिटर्न दे सकते थे. निवेशकों को यह स्वीकार करना चाहिए कि बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है और एसआईपी अल्पकालिक रिटर्न से परे दीर्घकालिक विकास के लिए हैं.
  • घबराहट (नकारात्मक रिटर्न): एसआईपी में निवेश के बाद कम रिटर्न मिलने पर घबराहट का चरण तब शुरू होता है, जब पोर्टफोलियो का मूल्य शुरुआती निवेश से नीचे गिर जाता है. हालांकि, ऐसी स्थिति में निवेशकों को शांत रहना चाहिए और घबराहट में बिक्री से बचना चाहिए. ध्यान रखें कि बाजार समय के साथ ठीक हो जाते हैं, और एसआईपी जारी रखने से अंततः लाभ हो सकता है.

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एसआईपी का नियम 1 क्या है?

एसआईपी के 7-5-3-1 नियम का अंतिम और चौथा सिद्धांत यह है कि अपने पोर्टफोलियो को बढ़ाने के लिए हर साल अपनी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में निवेश की रकम को बढ़ाएं. अपनी वार्षिक एसआईपी राशि को लगातार बढ़ाना (चाहे मामूली राशि से ही क्यों न हो) दीर्घ अवधि में आपके निवेश पोर्टफोलियो के अंतिम मूल्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है और तभी आपको बंपर रिटर्न मिल सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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