एनपीएस से सरकारी कर्मचारियों को पैसा निकालना कितना आसान? जानें निकासी के नियम और शर्तें

एनपीएस से पैसे निकासी के नियम और शर्तें
NPS Withdrawal Rules: सरकारी कर्मचारी एनपीएस अकाउंट बंद किए बिना भी कुछ शर्तों पर पैसा निकाल सकते हैं. एनपीएस ट्रस्ट के नियमों के अनुसार, तीन साल पूरे होने के बाद अपने योगदान का 25% तक आंशिक निकासी की अनुमति है. बच्चों की पढ़ाई, शादी, घर खरीदने, गंभीर बीमारी, स्किल डेवलपमेंट और स्टार्टअप के लिए पैसा निकाला जा सकता है. टियर-II अकाउंट से कभी भी निकासी संभव है, जबकि टैक्स सेवर टियर-II में लॉक-इन लागू होता है.
NPS Withdrawal Rules: नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) को आमतौर पर रिटायरमेंट के बाद की आय से जोड़ा जाता है, लेकिन बहुत से सरकारी कर्मचारियों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या 60 साल की उम्र से पहले या सुपरएनुएशन पर एनपीएस से पैसा निकाला जा सकता है? एनपीएस ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक, सरकारी कर्मचारी अपना एनपीएस अकाउंट बंद किए बिना भी कुछ शर्तों के तहत आंशिक निकासी (पार्शियल विड्रॉल) कर सकते हैं.
पैसा निकालने के लिए कौन है एलिजिबल?
एनपीएस से आंशिक निकासी की सुविधा उन्हीं सरकारी कर्मचारियों को मिलती है, जो कम से कम 3 साल से एनपीएस सब्सक्राइबर हों. यह अवधि उस तारीख से गिनी जाती है, जब कर्मचारी पहली बार एनपीएस में शामिल हुआ था. तीन साल पूरे होने से पहले किसी भी तरह की आंशिक निकासी की अनुमति नहीं होती.
कितनी बार और कितना पैसा निकाल सकते हैं?
एनपीएस के नियम सरकारी कर्मचारियों को सीमित लेकिन जरूरी लचीलापन देते हैं. पूरे एनपीएस कार्यकाल में अधिक से अधिक 3 बार आंशिक निकासी की जा सकती है. हर बार आप अपने खुद के योगदान का अधिकतम 25% निकाल सकते हैं. एम्प्लॉयर (सरकार) की ओर से किए गए योगदान पर निकासी की अनुमति नहीं होती है. दो निकासी के बीच भी केवल आपके योगदान का ही 25% निकाला जा सकता है. इसका मतलब साफ है कि एनपीएस को पूरी तरह खाली नहीं किया जा सकता, ताकि रिटायरमेंट सुरक्षा बनी रहे.
किन शर्तों पर निकाल सकते हैं एनपीएस का पैसा?
एनपीएस ट्रस्ट ने कुछ खास परिस्थितियों में ही आंशिक निकासी की इजाजत दी है.
- बच्चों की पढ़ाई और शादी: इसमें बच्चों की उच्च शिक्षा और उनकी शादी शामिल है. बच्चों में कानूनी तौर पर गोद लिए गए बच्चे भी शामिल है.
- घर या फ्लैट खरीदना: अपने नाम या जीवनसाथी के साथ जॉइंट नाम पर घर या फ्लैट खरीदने या बनवाने के लिए आंशिक निकासी कर सकते हैं. शर्त यह है कि पहले से पुश्तैनी संपत्ति को छोड़कर खुद के नाम कोई रिहायशी घर नहीं होना चाहिए.
- गंभीर बीमारियों का इलाज: कैंसर, किडनी फेलियर, हार्ट सर्जरी, स्ट्रोक, अंग प्रत्यारोपण, लकवा, गंभीर एक्सीडेंट, कोमा और कोविड-19 जैसी बीमारियों के इलाज और अस्पताल खर्च के लिए पैसा निकाला जा सकता है.
- विकलांगता या अक्षमता: अगर सब्सक्राइबर को स्थायी विकलांगता या अक्षमता हो जाती है, तो उससे जुड़े मेडिकल और अन्य खर्चों के लिए निकासी संभव है.
- स्किल डेवलपमेंट और स्टार्टअप: स्किल डेवलपमेंट या री-स्किलिंग के साथ-साथ खुद का स्टार्टअप या वेंचर शुरू करने के लिए भी एनपीएस से पैसा निकाला जा सकता है.
एनपीएस से पैसा निकालने की प्रक्रिया क्या है?
एनपीएस से आंशिक निकासी के लिए सब्सक्राइबर को अपने पीओपी या नोडल ऑफिस में जरूरी दस्तावेजों के साथ विड्रॉल रिक्वेस्ट सबमिट करनी होती है. अगर सब्सक्राइबर गंभीर बीमारी से पीड़ित है, तो परिवार का कोई सदस्य भी यह रिक्वेस्ट कर सकता है.
टियर-II अकाउंट से पैसा निकालना कितना आसान है?
टियर-II अकाउंट से पैसा निकालना काफी आसान है. इसके तहत कभी भी पूरा या आंशिक पैसा निकाला जा सकता है. इसकी कोई लिमिट नहीं होती है. जरूरी यह है कि आपका अकाउंट एक्टिव होना चाहिए. हालांकि, अगर टियर-I अकाउंट बंद होता है, तो टियर-II अकाउंट अपने आप बंद हो जाता है.
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टियर-II टैक्स सेवर स्कीम का नियम
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए टियर-II टैक्स सेवर स्कीम में लॉक-इन पीरियड होता है. इस अवधि से पहले पैसा निकालने की अनुमति नहीं होती.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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