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PhonePe, Google Pay को राहत : NPCI ने UPI मार्केट कैप की समय सीमा दिसंबर 2024 तक बढ़ाई

Updated at : 02 Dec 2022 8:58 PM (IST)
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UPI payments

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एनपीसीआई ऐप-वार आंकड़ों के अनुसार, फोनपे की अक्टूबर महीने के लिए वॉल्यूम में 47 फीसदी बाजार हिस्सेदारी थी. जबकि, Google पे का महीने में कुल वॉल्यूम का 34 फीसदी हिस्सा और पेटीएम का 15 फीसदी था.

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नई दिल्ली : नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) प्लेयर्स के लिए 30 फीसदी मार्केट कैप का पालन करने की समय सीमा दो साल बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2024 कर दी है. कुछ कंपनियों के हाथों में यूपीआई वॉल्यूम की एकाग्रता से बचने के प्रयास में पहली बार नवंबर 2020 में 30 फीसदी लेनदेन वॉल्यूम कैप की शुरुआत की गई थी. फिलहाल, यूपीआई के मासिक वॉल्यूम तीन कंपनियों (PhonePe, Google Pay और Paytm) की करीब 96 फीसदी हिस्सेदारी है.

एनपीसीआई की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि यूपीआई के वर्तमान के उपयोग, भविष्य की क्षमता और अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा टीपीएपी के अनुपालन की समयसीमा को दो साल यानी 31 दिसंबर, 2024 तक बढ़ा दिया गया है. एनपीसीआई की ओर से पहले की यह समय सीमा 31 दिसंबर, 2022 निर्धारित की गई थी. इसके बाद सभी कंपनियों को मासिक यूपीआई वॉल्यूम में 30 फीसदी या उससे कम की हिस्सेदारी रखनी होगी.

किसकी कितनी बाजार हिस्सेदारी

एनपीसीआई ऐप-वार आंकड़ों के अनुसार, फोनपे की अक्टूबर महीने के लिए वॉल्यूम में 47 फीसदी बाजार हिस्सेदारी थी. जबकि, Google पे का महीने में कुल वॉल्यूम का 34 फीसदी हिस्सा और पेटीएम का 15 फीसदी था. फोनपे के संस्थापक और सीईओ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हम यूपीआई मार्केट शेयर कैप को दो साल के लिए बढ़ाए जाने से राहत महसूस कर रहे हैं. यहां तक कि जब नवंबर 2020 में मार्केट शेयर कैप की घोषणा की गई थी, तब भी हमने बार-बार इसका विरोध किया था, क्योंकि किसी भी मार्केट भागीदार के पास अपने खुद के मार्केट को कम करने का कोई तरीका नहीं था.

यूपीआई की बाजार हिस्सेदारी से करोड़ों भारतीयों को नुकसान

उन्होंने आगे कहा कि फोनपे के मुकाबले हमारे यूपीआई की बाजार हिस्सेदारी को 30 फीसदी तक कम करने के लिए हम करोड़ों भारतीयों को यूपीआई भुगतान सेवाओं से वंचित करने के लिए मजबूर होंगे और यह हाल भारतीय डिजिटल भुगतान विकास के लिए पूरी तरह से हानिकारक होगा. उन्होंने कहा कि फिलहाल अन्य कंपनियां जैसे कि अमेजॉन पे, व्हाट्सएप पे और अन्य के पास हिस्सा न के बराबर है, क्योंकि यूजर्स ने टॉप तीन यूपीआई ऐप्स में से एक के साथ रहना पसंद किया है.

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यूपीआई को हो सकता है नुकसान

उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राहकों को कई यूपीआई ऐप की आवश्यकता नहीं दिखती है. इसके बजाय वे अपने पसंदीदा ऐप का इस्तेमाल करते हैं. इससे डिजिटल भुगतान के टॉप कंपनियों को बाजार में हिस्सेदारी हासिल करने में मदद मिलती है. नवंबर 2020 के बाद से यूपीआई की मात्रा नवंबर 2022 में 2,210 मिलियन से 230 फीसदी से अधिक बढ़कर 7,309 मिलियन हो गई. विशेषज्ञों के अनुसार, इस बिंदु पर बाजार हिस्सेदारी को लागू करने से यूपीआई के लिए विकास की गति धीमी हो सकती है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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