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सैलून किंग जावेद हबीब का 115 शहरों में फैला है साम्राज्य, जानें कितनी हो सकती है संपत्ति?

Updated at : 08 Oct 2025 9:26 PM (IST)
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Jawed Habib Net Worth

सैलून किंग जावेद हबीब

Jawed Habib Net Worth: सैलून किंग जावेद हबीब का भारत के 115 शहरों में फैला साम्राज्य 850 सैलून और 65 हेयर इंस्टीट्यूट्स तक पहुंच चुका है. उनकी कंपनी जावेद हबीब हेयर एंड ब्यूटी लिमिटेड ब्यूटी सेक्टर में बड़ा नाम है. हालांकि, हाल में उन पर 5 से 7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं, लेकिन उनकी कुल संपत्ति लगभग 250 करोड़ रुपये बताई जाती है.

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Jawed Habib Net Worth: सैलून किंग जावेद हबीब का भारत के 115 शहरों में साम्राज्य फैला है. इस साम्राज्य में करीब 850 सैलून और करीब 65 हेयर इंस्टीट्यूट्स हैं. इतना ही नहीं, उनकी कंपनी जावेद हबीब हेयर एंड ब्यूटी लिमिटेड फेमिना मिस इंडिया का आधिकार पार्टनर है. सबसे खास यह है कि 24 घंटे के अंदर 410 लोगों के बाल काटने का रिकॉर्ड भी उनकी कंपनी के नाम है. इसके लिए उन्हें लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया है. यह बात दीगर है कि अभी हाल के दिनों में संभल पुलिस ने उन पर 5 से 7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है. फिर भी इतना कुछ होने के बाद क्या आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि जावेद हबीब के पास कितनी संपत्ति हो सकती है? वे लोगों के बाल काटने के पैसे कितने लेते होंगे? आइए, उनकी संपत्ति और कारोबार के बारे में विस्तार से जानते हैं.

जावेद हबीब हेयर एंड ब्यूटी लिमिटेड की स्थापना कब हुई?

जावेद हबीब भारत के प्रमुख हेयर स्टाइलिस्ट और उद्यमी हैं. उन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत में वर्ष 2000 के दौरान जावेद हबीब हेयर एंड ब्यूटी लिमिटेड की स्थापना की. बताया जाता है कि उनके दादा नजीर अहमद ने लॉर्ड माउंटबेटन और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं को हेयर स्टाइलिंग सेवाएं प्रदान की थी, जबकि उनके पिता हबीब अहमद राष्ट्रपति भवन में काम करते थे. उनका जन्म भी राष्ट्रपति भवन में ही हुआ है.

जावेद हबीब पर आरोप क्या है?

अंग्रेजी की वेबसाइट एनडीटीवी डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, संभल पुलिस ने अभी हाल के दिनों में 5 से 7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है. इसमें उनके बेटे अनीश और एफएलसी कंपनी की संस्थापक पत्नी का नाम भी शामिल है. रिपोर्ट में बताया गया है कि जावेद हबीब, उनके बेटे और पत्नी के खिलाफ करीब 20 एफआईआर दर्ज हैं. इन तीनों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है.

जावेद हबीब की कुल संपत्ति

फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016 में जावेद हबीब की कुल संपत्ति लगभग 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 250 करोड़ रुपये) आंकी गई थी. उस समय देश में उनका करीब 550 से अधिक सैलूनों का साम्राज्य फैला था, जिससे उनकी आमदनी होती थी. 2022 की एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि जावेद हबीब की सालाना कमाई करीब 30 करोड़ रुपये है.

बाल काटने के कितने पैसे लेते हैं जावेद हबीब

जावेद हबीब जोरहाट डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, जावेद हबीब के सैलून में बाल काटने के दाम लोकेशन और जेंडर पर निर्भर करता है. साल 2025 की जोरहाट ब्रांच की प्राइस लिस्ट के अनुसार, जावेद हबीब के सैलून में पुरुषों के बाल काटने के 299 रुपये और महिलाओं के लिए 499 रुपये लिये जाते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि लखनऊ गोमती नगर में शैंपू और स्टाइलिंग के साथ पुरुषों के बाल काटने 350 रुपये और महिलाओं के लिए 590 रुपये लिये जाते हैं. क्वोरा और रेडिट यूजर्स के अनुसार, यह बड़े शहरों में 500 से 600 रुपये तक हो सकता है. फर्स्ट लॉ कॉमिक डॉट कॉम के अनुसार, सेलिब्रिटी क्लाइंट्स के लिए पर्सनल सर्विसेज 1 लाख रुपये से अधिक फीस हो सकती हैं, लेकिन स्टैंडर्ड सैलून में ये किफायती हैं.

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सैलून इंडस्ट्री के शिखर पर जावेद हबीब

जावेद हबीब भारत के ब्यूटी और सैलून सेक्टर के सबसे बड़े नामों में से एक हैं. देश के 115 शहरों में फैले उनके 850 से अधिक सैलून और 65 हेयर इंस्टीट्यूट्स उनके बिजनेस साम्राज्य की ताकत को दर्शाते हैं. हालांकि हाल के दिनों में उन पर धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं, लेकिन उनका ब्रांड आज भी भारत की ब्यूटी इंडस्ट्री में भरोसे का प्रतीक माना जाता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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