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एलआईसी चीफ का बड़ा बयान, पॉलिसीधारकों का सुरक्षा कवच बनेगा सबका बीमा सबकी रक्षा कानून

Updated at : 19 Dec 2025 7:56 PM (IST)
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Insurance Amendment Bill

एलआईसी के सीईओ आर दुरईस्वामी.

Insurance Amendment Bill: एलआईसी के सीईओ आर दुरईस्वामी ने कहा कि संसद से पारित सबका बीमा सबकी रक्षा कानून पॉलिसीधारकों की सुरक्षा को मजबूत करेगा और बीमा क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव लाएगा. इस विधेयक से 100% एफडीआई का रास्ता खुला है, जिससे प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और इनोवेशन बढ़ेगा. मजबूत नियामकीय ढांचा, बेहतर सेवा मानक और बीमा की पहुंच बढ़ाने में यह कानून अहम भूमिका निभाएगा.

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Insurance Amendment Bill: भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक (एमडी) आर दुरईस्वामी ने कहा है कि संसद से पारित ‘सबका बीमा सबकी रक्षा’ (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक 2025 भारतीय बीमा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम है. उनके अनुसार, यह कानून न सिर्फ बीमा उद्योग के विकास को गति देगा, बल्कि पॉलिसीधारकों की सुरक्षा को भी पहले से अधिक मजबूत बनाएगा.

पॉलिसीधारकों की सुरक्षा पर खास जोर

दुरईस्वामी ने अपने बयान में कहा कि यह विधेयक पॉलिसीधारकों के हितों को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है. पुराने कानूनों को अपडेट कर और गवर्नेंस मानकों को मजबूत बनाकर बीमा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विवेकपूर्ण निगरानी को बढ़ाया गया है. इससे पॉलिसीधारकों को बेहतर सेवा मानक, मजबूत सुरक्षा उपाय और लंबी अवधि की बीमा योजनाओं पर अधिक भरोसा मिलेगा.

पारदर्शिता और जवाबदेही होगी मजबूत

एलआईसी प्रमुख के मुताबिक, संशोधित कानून बीमा कंपनियों के संचालन में स्पष्टता और अनुशासन लाएगा. इससे पूरे सेक्टर में जवाबदेही बढ़ेगी और नियामकीय निगरानी ज्यादा प्रभावी होगी. उन्होंने कहा कि भरोसे पर टिके बीमा उद्योग के लिए यह एक आवश्यक सुधार है, जिससे आम लोगों का विश्वास और मजबूत होगा.

100% एफडीआई से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

संसद ने बुधवार को सबका बीमा सबकी रक्षा विधेयक 2025 को पारित कर दिया, जिससे बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का रास्ता साफ हो गया है. दुरईस्वामी ने कहा कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, नई पूंजी आएगी और बीमा उत्पादों को अधिक सुलभ और किफायती बनाने में मदद मिलेगी. इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा.

बीमा पहुंच बढ़ाना जरूरी

विधेयक पर बहस के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश भर में बीमा की पहुंच और जागरूकता बढ़ाने की तत्काल जरूरत पर जोर दिया था. सरकार का लक्ष्य है कि बीमा को केवल शहरी या मध्यम वर्ग तक सीमित न रखकर ग्रामीण और कमजोर वर्गों तक भी पहुंचाया जाए. नया कानून इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

इनोवेशन और नए उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा

दुरईस्वामी ने कहा कि यह कानून बीमाकर्ताओं को अधिक परिचालन चपलता और इनोवेशन की आजादी देता है. इसके तहत, कंपनियां सेवानिवृत्ति सुरक्षा, दीर्घायु समाधान, स्वास्थ्य बीमा और बदलती सामाजिक जरूरतों के अनुरूप नए और लक्षित उत्पाद तैयार कर सकेंगी. इससे बीमा बाजार में विविधता और उपभोक्ता विकल्प दोनों बढ़ेंगे.

आईआरडीएआई की भूमिका होगी और मजबूत

एलआईसी प्रमुख के अनुसार, संशोधित ढांचे में भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडाई) की भूमिका को और सशक्त बनाया गया है. यह संस्था अब उपभोक्ता हितों की बेहतर रक्षा करेगी, व्यवस्थित क्षेत्रीय विकास को दिशा देगी और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप नवाचार को प्रोत्साहित करेगी.

एलआईसी को मिलेगा विस्तार का मौका

आर दुरईस्वामी ने कहा कि इन सुधारों से एलआईसी को अपनी पहुंच और मजबूत करने का अवसर मिलेगा. बड़े पैमाने पर तकनीक के इस्तेमाल, बेहतर उत्पाद डिजाइन और मजबूत वितरण नेटवर्क के जरिए एलआईसी सार्वभौमिक बीमा कवरेज के राष्ट्रीय लक्ष्य में अहम भूमिका निभा सकेगी.

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भरोसे की नींव होगी और मजबूत

कुल मिलाकर, सबका बीमा सबकी रक्षा विधेयक 2025 को बीमा क्षेत्र में भरोसे, सुरक्षा और विकास की नई नींव के रूप में देखा जा रहा है. एलआईसी प्रमुख के अनुसार, यह कानून पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा करते हुए भारतीय बीमा उद्योग को अगले स्तर तक ले जाने में सहायक साबित होगा.

भाषा इनपुट के साथ

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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