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Indian Railways News: अब देश में ही बनेंगे रेल की पटरी और पहिये, रेलमंत्री ने कही यह बात

Updated at : 10 Sep 2022 8:22 PM (IST)
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Indian Railways News: अब देश में ही बनेंगे रेल की पटरी और पहिये, रेलमंत्री ने कही यह बात

Indian Railways Make In India Initiative: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे ने पहली बार रेल पहिया संयंत्र लगाने के लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित किया है. इस 'मेक इन इंडिया' संयंत्र में तेज रफ्तार वाली ट्रेनों और यात्री कोचों के लिए पहिये बनाए जाएंगे.

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Indian Railways News: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि रेलवे ने पहिया कारखाना लगाने के लिए निविदा जारी की है जहां हर साल कम-से-कम 80,000 पहियों का विनिर्माण किया जाएगा. साथ ही रेल पहियों का निर्यातक बनने के लिए खाका तैयार किया गया है. वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि रेलवे ने पहली बार रेल पहिया संयंत्र लगाने के लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित किया है.

इस ‘मेक इन इंडिया’ संयंत्र में तेज रफ्तार वाली ट्रेनों और यात्री कोचों के लिए पहिये बनाये जाएंगे. हर साल यहां बनने वाले 80,000 पहियों की 600 करोड़ रुपये मूल्य में सुनिश्चित खरीद की जाएगी. उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब रेलवे ने पहिये के विनिर्माण के लिए निजी क्षेत्र को आमंत्रित करने वाली निविदा जारी की है. भारतीय रेल को हर साल दो लाख पहियों की जरूरत है.

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इस योजना के मुताबिक, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) जहां एक लाख पहियों का विनिर्माण करेगी, वहीं बाकी एक लाख पहिये इस नये ‘मेक इन इंडिया’ संयंत्र में बनाये जाएंगे. वैष्णव ने यहां संवाददाताओं को बताया कि यह निविदा इसी शर्त पर दी जाएगी कि इस संयंत्र में बनने वाले रेल पहियों का निर्यात भी किया जाएगा और यह निर्यात यूरोपीय बाजार को किया जाएगा. निविदा में यह प्रावधान भी किया गया है कि संयंत्र को 18 महीनों के भीतर स्थापित कर लिया जाएगा.

फिलहाल रेलवे बड़े पैमाने पर यूक्रेन, जर्मनी और चेक गणराज्य से पहिये आयात करता है. लेकिन यूक्रेन पर रूस के हमले की वजह से पहियों की खरीद अटक गई है और रेलवे को विकल्प तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ा है. रेल मंत्री ने कहा, आज यह निविदा जारी की गई है. हम 1960 से ही यूरोपीय देशों से पहियों का आयात करते रहे हैं. अब हमने इनका विनिर्माण और निर्यात करने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरे तकनीकी विश्लेषण और इसके लिए जरूरी कच्चे माल की देश में उपलब्धता जैसे बिंदुओं पर चर्चा के बाद लिया गया है.

रेल अधिकारियों ने अनुमान जताया कि घरेलू स्तर पर रेल पहिये बनने से रेलवे को काफी बचत होने की उम्मीद है क्योंकि उसे एक पहिये के आयात पर 70,000 रुपये का भुगतान करना होता है. वैष्णव ने कहा कि भारत ने माल ढुलाई के लिए बनाये गये गलियारा और बुलेट ट्रेन के लिए उच्च क्षमता वाली पटरियों (रेल) का आयात किया था लेकिन अब देश में ही इन्हें बनाने के लिए एक समझौता होने वाला है. उन्होंने कहा, इस मेक इन इंडिया समझौते के तहत देश के भीतर ही उच्च क्षमता वाली पटरियां बनायी जाएंगी. रेलवे ने मई में वंदे भारत ट्रेनों के लिए 39,000 पहियों की आपूर्ति का 170 करोड़ रुपये का ठेका चीन की एक कंपनी को दिया था. (इनपुट : भाषा)

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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