फिनटेक स्टडी में भारत टॉप और सिंगापुर दूसरे स्थान पर, यहां भी पाकिस्तान के हाथ में कटोरा

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :13 Feb 2023 1:19 PM (IST)
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फिनटेक स्टडी में भारत टॉप और सिंगापुर दूसरे स्थान पर, यहां भी पाकिस्तान के हाथ में कटोरा

रोबोकैश दक्षिण-पूर्व एशिया फिनटेक सूचकांक में भी भारत सबसे टॉप है. इसके बाद दूसरे स्थान पर सिंगापुर और तीसर स्थान पर इंडोनेशिया है. सूचकांक जिन मापों का इस्तेमाल करके स्कोर हासिल करता है, उसमें कुल धन का हिस्सा, कुल राजस्व का हिस्सा और कुल सक्रिय कंपनियों का हिस्सा शामिल है.

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सिंगापुर : भारत में ज्यादातर लोग डिजिटल दुनिया को अपना रहे हैं और निकट भविष्य में इसे अपनाने वालों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है. अभी पिछले सप्ताह रोबोकैश ग्रुप की ओर से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के लिए एक फिनटेक स्टडी रिपोर्ट प्रकाशित की गई है, जिसमें भारत टॉप और सिंगापुर दूसरे स्थान पर है. मजे की बात यह है कि इस स्टडी रिपोर्ट में भी पाकिस्तान के हाथ में कटोरा ही दिखाई दे रहा है.

समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, रोबोकैश एशिया और यूरोप में कार्यालयों के साथ एक फिनटेक कंपनी है, जिसे उभरते बाजारों में पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से वंचित लोगों के लिए तकनीकी वित्त समाधान प्रदान करने में विशेषज्ञता हासिल है. दक्षिण एशियाई देशों में भारत पहले भी कई श्रेणियों में पहले स्थान पर आया है, जिसमें सबसे अधिक धनराशि और कुल राजस्व शामिल है. अध्ययन में वर्ष 2000 से लेकर 2022 तक को शामिल किया गया है. सर्वेक्षण में चार क्षेत्रों को शामिल किया गया है. इस दौरान कुल 25.6 बिलियन डॉलर जुटाए गए, जो कुल धनराशि का करीब 48 फीसदी है.

फिनटेक सूचकांक में भारत टॉप पर

एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, रोबोकैश दक्षिण-पूर्व एशिया फिनटेक सूचकांक में भी भारत सबसे टॉप है. इसके बाद दूसरे स्थान पर सिंगापुर और तीसर स्थान पर इंडोनेशिया है. सूचकांक जिन मापों का इस्तेमाल करके स्कोर हासिल करता है, उसमें कुल धन का हिस्सा, कुल राजस्व का हिस्सा और कुल सक्रिय कंपनियों का हिस्सा शामिल है. रोबोकैश रिपोर्ट का उद्देश्य दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र के परिपक्व और उभरते देशों यानी भारत, इंडोनेशिया, सिंगापुर, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका में वित्तीय प्रौद्योगिकियों के विकास की समझ विकसित करना है.

सर्वेक्षण का क्या है आधार

सर्वेक्षण के लिए जिन चार फिनटेक क्षेत्रों को चुना गया, उनमें भुगतान और हस्तांतरण, वैकल्पिक आधार, ई-वॉयलेट और डिजिटल बैंकिंग शामिल हैं. अध्ययन के उद्देश्य के लिए केवल उन कंपनियों का चयन किया गया, जो किसी विशेष देश के क्षेत्र में स्थित हैं, जबकि इस अध्ययन से विदेशी संस्थाओं को बाहर रखा गया है. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 के अंत तक नौ देशों में करीब 1254 सक्रिय फिनटेक कपंनियां है और चार क्षेत्रों में अध्ययन किया गया है. यह वर्ष 2000 से पहले मौजूद 28 कंपनियों में से करीब 45 गुना वृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे फर्मों की वृद्धि 2015 से 2020 के बीच तेज हुई, जब अध्ययन में 62 फीसदी से अधिक कंपनियों की स्थापना की गई.

अध्यन में भारत की 541 और पाकिस्तान की 51 कंपनियां शामिल

भारत में ऐसी कंपनियों की संख्या सबसे अधिक 541 है, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की कुल कंपनियों की करीब 43.1 फीसदी का प्रतिनिधित्व करती है. इसके बाद इंडोनेशिया की 165 (13.2 फीसदी), सिंगापुर 162 (12.9 फीसदी), फिलीपींस 125 (10) और मलेशिया की 84 (6.7 फीसदी) और वियतनाम की 78 (6.2 फीसदी) शामिल हैं. इसमें पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश की क्रमश: 51, 27 और 21 कंपनियों पर अध्ययन किया गया, जो सर्वेक्षण में शामिल फिनटेक कंपनियों की संख्या में सबसे कम है.

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किसकी कितनी हिस्सेदारी

रोबोकैश की ओर से जिन कंपनियों का सर्वेक्षण किया गया, उनमें से सबसे बड़ी संख्या में 543 (43.4 फीसदी) कंपनियों के साथ भारत वैकल्पिक ऋण क्षेत्र में शामिल है. इसके बाद अध्ययन में कुल 39.6 फीसदी का प्रतिनिधित्व करने वाली 496 कंपनियों के साथ भुगतान और स्थानांतरण, 118 कंपनियों (9.4 फीसदी) के साथ ई-वॉयलेट और 96 कंपनियों के साथ डिजिटल बैंकिंग शामिल है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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