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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, 30 साल में 30,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा भारत

Updated at : 06 Sep 2022 12:53 PM (IST)
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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, 30 साल में 30,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा भारत

विदेशों में रह रहे भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट से गोयल ने कहा कि वे भारत में आने वाले निवेश को बढ़ाने में मदद देकर देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि आप अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को भारत में अपार निवेश अवसरों की जानकारी दे सकते हैं.

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सेन फ्रांसिस्को : वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यहां भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट से कहा कि वे ‘ब्रांड इंडिया’ के प्रतिनिधि के तौर पर काम करें और निवेशों को भारत की ओर आकर्षित करने में मदद करें. गोयल ने यहां सोमवार को इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अगले 30 साल में 30,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा. अभी भारत की अर्थव्यवस्था 3300 अरब डॉलर की है.

ब्रांड इंडिया के एम्बेसडर सकते हैं सीए

विदेशों में रह रहे भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट से गोयल ने कहा कि वे भारत में आने वाले निवेश को बढ़ाने में मदद देकर देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि आप अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को भारत में अपार निवेश अवसरों की जानकारी दे सकते हैं. आप भारत और अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों के बीच सेतु बन सकते हैं. गोयल ने कहा कि आप ‘ब्रांड इंडिया’ के ‘ब्रांड एम्बेसडर’ बन सकते हैं. उद्योग मंत्री ने सीए से कहा कि वे ‘भारत में निर्मित उत्पादों’ का उपयोग करें. इस तरह उत्पादों की विविधता और उस विरासत मूल्य का भी प्रदर्शन करें जिसकी कि भारत पेशकश करता है. उन्होंने आईसीएआई के सदस्यों से कहा कि वे हर अवसर और त्योहार पर भेंट देने के लिए भारत निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता दें.

ब्रिटेन के साथ एफटीए जल्द होने की उम्मीद

लिज ट्रस के ब्रिटेन की प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उम्मीद जताई कि ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर बातचीत जल्द पूरी होगी. गोयल ने यहां सोमवार को इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीतिक स्तर पर बदलाव होने से इसमें (एफटीए को लेकर बातचीत पूरी होने में) कुछ हफ्तों का विलंब भले हो, लेकिन लिज ट्रस के ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनने के साथ मुझे उम्मीद है कि जो वक्त ज़ाया गया है हम उसकी भरपाई कर लेंगे.

जनवरी में भारत ने एफटीए पर शुरू की थी बातचीत

भारत के अधिकारी व्यापार समझौते पर बातचीत का समापन 31 अगस्त तक कर लेना चाहते थे, लेकिन ब्रिटेन में राजनीतिक स्तर पर हुए परिवर्तनों से इसमें और देरी हो सकती है. इसी साल जनवरी में दोनों देशों ने द्विपक्षीय कारोबार और निवेश को बढ़ावा देने की खातिर मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए बातचीत औपचारिक रूप से शुरू की थी. उस वक्त ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन थे और ट्रस विदेश मंत्री थीं.

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दीपावली तक ब्रिटेन के साथ हो सकता है समझौता

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ब्रिटेन के साथ एफटीए की वार्ता आगे बढ़ चुकी है. मौजूदा व्यापार एवं निवेश मंत्री एनी मैरी के साथ हम नियमित संपर्क में हैं और हम भारत तथा ब्रिटेन के बीच अगले कुछ महीनों, संभवत: दीपावली तक समझौता करने का प्रयास कर रहे हैं. वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत विश्व के आकर्षक निवेश स्थलों में से एक बन गया है, जो इस बात से जाहिर होता है कि विश्व के नेता और विकसित देश भारत में व्यापार और निवेश बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं और द्विपक्षीय समझौते करना चाहते हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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