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प्याज की कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने उठाया कठोर कदम, जानिए कितना मिलेगा आपको बेनिफिट

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध.
प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध.
फाइल फोटो.

नयी दिल्ली : देश में बेतहाशा बढ़ती प्याज की कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने कठोर कदम उठाने का फैसला किया है. घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने फिलहाल इसके निर्यात पर रोक लगा दी है. विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से जारी एक अधिसूचना के मुताबिक, ‘प्याज की सभी किस्मों के निर्यात को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है. डीजीएफटी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कार्य करता है. यह आयात और निर्यात से जुड़े मु्द्दों को देखने वाली इकाई है. संक्रमणकालीन व्यवस्था के तहत आने वाले प्रबंधों के प्रावधान इस अधिसूचना के दायरे में नहीं आएंगे.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्याज के दाम 40 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में हैं. अगस्त में प्याज के लिए थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में 34.48 फीसदी की गिरावट रही. महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात मुख्य प्याज उत्पादक राज्य हैं. देश के कुल प्याज पैदावार का 40 फीसदी खरीफ फसल के दौरान उत्पादन होता है. बाकी उत्पादन रबी के मौसम में होता है. हालांकि, खरीफ फसल के उत्पाद का संग्रह नहीं किया जाता है.

केंद्र सरकार ने नियमों में किया बदलाव

केंद्र सरकार ने सिर्फ तीन महीने पहले ही पुराने आवश्यक कमोडिटी अधिनियम, 1955 में बदलाव कर अनाज, खाद्य तेल, आलू, प्याज, टमाटर और अन्य आवश्यक कमोडिटीज के भंडारण सीमा और निर्यात पर प्रतिबंध के बारे में जरूरी बदलाव किया था. बदलाव के अनुसार, भंडारण सीमा या निर्यात प्रतिबंध अत्यंत गंभीर स्थिति ​जैसे युद्ध या प्राकृतिक आपदा के समय ही लगाया जा सकता है.

प्याज की कीमतों में जारी रहेगी तेजी

कारोबारियों के अनुसार, प्याज की कीमतों में आगे भी तेजी बने रहने की आशंका है. इसका कारण यह है कि अनलॉक प्रक्रिया और आगे बढ़ने के साथ ही त्योहारी सीजन शुरू होने वाले हैं. ऐसी स्थिति में घरेलू सब्जी मंडियों में प्याज की मांग बढ़ना स्वाभाविक है. प्याज की नयी फसल की आवक नवंबर के बाद ही होने की संभावना है. ऐसे में कीमतों में तेजी बने रहने की आशंका बरकरार है.

बारिश ने प्याज की फसल को किया चौपट

इसके साथ ही, इस साल कई राज्यों में मानसून की झमाझम बारिश की वजह से प्याज की फसल बर्बाद हो गयी. बारिश की वजह से इस साल कर्नाटक से बाजार में आने वाला प्याज पूरी तरह से चौपट हो गया. अमूमन, सितंबर के पहले हफ्ते में यहां से प्याज की फसल बाजार में आ जाती है. इसके अलावा, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में पहले से स्टॉक में रखा गया प्याज भी बाजार में बिक गया, जिससे मंडियों में इसकी आवक में गिरावट दर्ज की जा रही है.

प्याज के निर्यात से नासिक के किसानों में नाराजगी

सरकार की ओर से प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने की वजह से महाराष्ट्र में नासिक के किसान नाराज हैं. इन किसानों का कहना है कि प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना सरकार का उचित फैसला नहीं है. मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक, किसान कहते हैं कि बाजार में बड़ी मात्रा में प्याज आ रहे हैं. ऐसें में हम इस फसल का क्या करेंगे औ उसे कहां बेचेंगे? प्याज उत्पादक किसानों को भाव में भी काफी गिरावट आने डर सता रहा है. उनका कहना है कि नासिक मंडी में प्याज 20-25 रुपये प्रति किलो पर बिक रहा है. निर्यात पर रोक लग गई, तो यह भाव 2 से 3 रुपये प्रति किलो पर आ जाएंगे.

Posted By : Vishwat Sen

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