फलों को पकाने के लिए 'मसाले' का इस्तेमाल पड़ेगा भारी, FSSAI ने जारी किए सख्त आदेश

Published by :Soumya Shahdeo
Published at :17 Apr 2026 1:13 PM (IST)
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FSSAI Calcium Carbide Ban

एफएसएसएआई द्वारा कैल्शियम कार्बाइड पर बैन (Photo: ANI)

FSSAI Calcium Carbide Ban: क्या आप भी जहरीले 'मसाले' से पके फल खा रहे हैं? FSSAI ने कैल्शियम कार्बाइड पर लगाया बैन, उल्लंघन करने वालों को होगी जेल. जानें कैसे केमिकल से पके फल आपकी सेहत को बना रहे हैं बीमार.

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FSSAI Calcium Carbide Ban: गर्मियों का सीजन आते ही मार्केट में रसीले और ताजे फलों की मांग बढ़ जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो फल आप सेहत बनाने के लिए खा रहे हैं, वे आपको बीमार भी कर सकते हैं? भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लेते हुए सभी राज्यों को आदेश दिया है कि फलों को नकली तरीके से पकाने वाले ‘मसाले’ (कैल्शियम कार्बाइड) पर कड़ा एक्शन लिया जाए. 

क्या फलों में ‘मसाला’ डालना गैरकानूनी है?

जी हां, ANI की रिपोर्ट के अनुसार, जिसे फल व्यापारी आम भाषा में ‘मसाला’ कहते हैं, वह असल में कैल्शियम कार्बाइड नाम का एक खतरनाक केमिकल है. FSSAI के नियमों के मुताबिक, इसका इस्तेमाल फलों को पकाने के लिए पूरी तरह बैन है. यह केमिकल इतना खतरनाक है कि इससे फल जल्दी तो पक जाते हैं, लेकिन उनमें जहर घुल जाता है. इसे पकड़ने के लिए अब अधिकारी बाजारों और गोदामों में ‘स्ट्रिप पेपर टेस्ट’ का इस्तेमाल करेंगे, जिससे तुरंत पता चल जाएगा कि फल प्राकृतिक रूप से पका है या केमिकल से. 

यह केमिकल आपकी सेहत के लिए कितना खतरनाक है?

नकली तरीके से पकाए गए फल दिखने में तो बहुत पीले और सुंदर लगते हैं, लेकिन इनका स्वाद फीका होता है. FSSAI के मुताबिक, कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल से फल खाने वाले व्यक्ति को निगलने में दिक्कत, उल्टी, और त्वचा पर अल्सर (घाव) जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसे फलों का सेवन शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसीलिए सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर किसी फल गोदाम में यह बैन्ड ‘मसाला’ पाया गया, तो बिना किसी देरी के सख्त कानूनी कार्रवाई और जेल तक हो सकती है. 

क्या एथिलीन का इस्तेमाल भी गलत तरीके से हो रहा है?

अक्सर व्यापारी एथिलीन गैस का उपयोग फल पकाने के लिए करते हैं, जिसे सुरक्षित माना जाता है. लेकिन यहां भी एक बड़ा खेल हो रहा है. कुछ लोग फल को सीधे एथिलीन के लिक्विड या पाउडर में डुबो देते हैं, जो कि नियमों के खिलाफ है. FSSAI ने स्पष्ट किया है कि फल और केमिकल का सीधा संपर्क नहीं होना चाहिए. सिर्फ कंट्रोल वातावरण में गैस के जरिए ही फलों को पकाया जा सकता है. इसके अलावा, फलों पर चमक लाने के लिए इस्तेमाल होने वाले वैक्स (Wax) और सिंथेटिक रंगों पर भी अब कड़ी निगरानी रखी जाएगी. 

सरकार ने क्या दिए हैं सख्त निर्देश?

सभी राज्यों के फूड सेफ्टी कमिश्नरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे फल मंडियों और होलसेल बाजारों में अचानक छापेमारी करें. अब सिर्फ शक के आधार पर नहीं, बल्कि अगर फल के पास कार्बाइड का पैकेट भी मिल जाता है, तो उसे पुख्ता सबूत मानकर व्यापारी पर मुकदमा चलाया जाएगा. इस मुहीम का मकसद सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता तक पहुंचने वाले फल शुद्ध और सुरक्षित हों. 

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लेखक के बारे में

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सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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