रसोई गैस की सप्लाई अब होगी और भी तेज: भारत में बिछ रहा है 2500 KM लंबा पाइपलाइन नेटवर्क

सांकेतिक तस्वीर (फोटो: energy.economictimes)
PNG Pipline: भारत अब रसोई गैस की सप्लाई के लिए ट्रकों पर निर्भरता कम करेगा. ₹12,500 करोड़ के निवेश से 2500 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है. जानिए इससे आपको क्या फायदा होगा.
PNG Pipline: भारत सरकार देश के कोने-कोने तक रसोई गैस (LPG) पहुँचाने के तरीके में बड़ा बदलाव करने जा रही है. अब गैस को भारी-भरकम टैंकरों और ट्रकों के बजाय पाइपलाइन के जरिए सीधे बॉटलिंग प्लांट तक पहुंचाया जाएगा. इसके लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने ₹12,500 करोड़ के निवेश वाले बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू कर दिया है.
क्या है नया प्लान?
सड़क मार्ग से होने वाली गैस की सप्लाई को कम करने के लिए 4 बड़ी पाइपलाइनों के लिए बोली (Bidding) प्रक्रिया अंतिम चरण में है. इनकी कुल लंबाई करीब 2,500 किलोमीटर होगी. ये पाइपलाइनें रिफाइनरी और बंदरगाहों को सीधे उन प्लांट्स से जोड़ेंगी जहाँ सिलेंडरों में गैस भरी जाती है.
इन 4 रूट्स पर बिछेगी पाइपलाइन
चेरलापल्ली – नागपुर पाइपलाइन
शिकरापुर – हुबली – गोवा पाइपलाइन
पारादीप – रायपुर पाइपलाइन
झांसी – सितारगंज पाइपलाइन
कुल मिलाकर ऐसे 9 पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स की पहचान की गई है, जो देश के एनर्जी लॉजिस्टिक्स को मजबूत बनाएंगे.
पाइपलाइन के 4 बड़े फायदे
- सुरक्षा (Safety): सड़कों पर गैस टैंकरों के साथ होने वाले हादसों का खतरा कम हो जाएगा. पाइपलाइन परिवहन का सबसे सुरक्षित जरिया मानी जाती है.
- सप्लाई में रुकावट नहीं (Supply Security): ये पाइपलाइनें जरूरत के समय ‘स्टोरेज’ की तरह भी काम करेंगी, जिससे गैस की किल्लत होने पर सप्लाई बनी रहेगी.
- पर्यावरण के लिए बेहतर: ट्रकों की आवाजाही कम होने से प्रदूषण घटेगा और ईंधन की बचत होगी.
- दक्षता और रफ्तार: रिफाइनरी से सीधे बॉटलिंग प्लांट तक गैस पहुँचना ज्यादा तेज और असरदार होगा.
अभी क्या है स्थिति?
भारत में खाना पकाने और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एलपीजी की खपत बहुत ज्यादा है. हालांकि पाइपलाइन सबसे अच्छा तरीका है, लेकिन आज भी एक बड़ा हिस्सा टैंकरों के जरिए सड़कों पर ढोया जाता है. नई पाइपलाइनें इस निर्भरता को खत्म कर देंगी. यह कदम भारत के एनर्जी नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा. इससे न केवल वितरण लागत कम होगी, बल्कि उपभोक्ताओं तक गैस की पहुंच भी अधिक भरोसेमंद हो जाएगी.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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