आटा सस्ता होगा? FCI ने तीसरे दौर की ई-नीलामी में 5.08 लाख टन गेहूं बेचा, 1 मार्च को फिर होगी बिक्री

Updated at : 23 Feb 2023 1:21 PM (IST)
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आटा सस्ता होगा? FCI ने तीसरे दौर की ई-नीलामी में 5.08 लाख टन गेहूं बेचा, 1 मार्च को फिर होगी बिक्री

एफसीआई ने ई-नीलामी के तीसरे दौर में आटा चक्की जैसे थोक उपभोक्ताओं को 5.08 लाख टन गेहूं की बिक्री की. पहले दो दौर में, खाद्यान्न और गेहूं के आटे की खुदरा कीमतों को कम करने के कदमों के तहत खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत लगभग 13 लाख टन गेहूं थोक उपयोगकर्ताओं को बेचा गया है.

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नई दिल्ली : भारत के खुदरा बाजार में गेहूं के आटे की कीमत बढ़ी हुई है. आटे की कीमत को कम करने के लिए सरकार बफर स्टॉक से खुला बाजार में गेहूं की बिक्री कर रही है. इसकी जिम्मेदारी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को दी गई है. एफसीआई ई-नीलामी के जरिए खुले बाजार में थोक उपभोक्ताओं को गेहूं की बिक्री करता है. ई-नीलामी के जरिए एफसीआई ने तीन दौर में गेहूं की बिक्री की है. खबर है कि तीसरे दौर की ई-नीलामी में खाद्य निगम ने करीब 5.08 लाख टन गेहूं की बिक्री की है.

एक मार्च को चौथे दौर की नीलामी

समाचार एजेंसी भाषा की खबर के अनुसार, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने बुधवार को हुई ई-नीलामी के तीसरे दौर में आटा चक्की जैसे थोक उपभोक्ताओं को 5.08 लाख टन गेहूं की बिक्री की. पहले दो दौर में, खाद्यान्न और गेहूं के आटे की खुदरा कीमतों को कम करने के कदमों के तहत खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत लगभग 13 लाख टन गेहूं थोक उपयोगकर्ताओं को बेचा गया है. अगली साप्ताहिक ई-नीलामी एक मार्च को होगी.

खुले बाजार में 30 लाख टन बेचेगी सरकार

एफसीआई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अशोक के मीणा ने कहा कि आज ओएमएसएस के तहत थोक उपभोक्ताओं को करीब 5.08 लाख टन गेहूं बेचा गया है. सरकार ने 25 जनवरी को घोषणा की कि वह बफर स्टॉक से 30 लाख टन गेहूं खुले बाजार में उतारेगी. गेहूं और गेहूं आटा की खुदरा कीमतों को कम करने के लिए ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री की जा रही है. खुदरा गेहूं की कीमतों को और नरम करने के लिए सरकार ने हाल ही में थोक उपयोगकर्ताओं को एफसीआई गेहूं की आरक्षित कीमत भी कम कर दी और खुले बाजार में अतिरिक्त 20 लाख टन गेहूं की बिक्री की भी घोषणा की.

महंगाई का आंकड़ा 6.52 फीसदी पर

ओएमएसएस नीति की घोषणा के बाद खाद्य मंत्रालय ने कहा है कि गेहूं और आटे की कीमतों में कमी आई है लेकिन फिर भी जनवरी 2023 के लिए मुद्रास्फीति का आंकड़ा तीन महीने के उच्च स्तर 6.52 फीसदी पर था. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को प्रमुख शहरों में गेहूं की औसत कीमत 33.09 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि गेहूं आटा की औसत कीमत 38.75 रुपये प्रति किलोग्राम थी.

सरकार ने घटाया आरक्षित मूल्य

पिछले सप्ताह मंत्रालय ने उचित और औसत (एफएक्यू) गुणवत्ता वाले गेहूं का आरक्षित मूल्य घटाकर 2,150 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया, जबकि कुछ गुणवत्ता में कमी वाले (यूआरएस) गेहूं का आरक्षित मूल्य 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया. ये नए आरक्षित मूल्य ई-नीलामी के जरिए गेहूं की तीसरी बिक्री से लागू थे. इसके अलावा, एनसीसीएफ, नेफेड, केंद्रीय भंडार, राज्य सरकार सहकारी समितियों, महासंघों के साथ-साथ सामुदायिक रसोई, धर्मार्थ और एनजीओ आदि को गेहूं को आटे में बदलने और फिर उपभोक्ताओं को 27.50 रुपये प्रति किलो के भाव बेचने के लिए गेहूं की दर को घटाकर 21.50 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है.

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45 लाख टन गेहूं बेचेगा एफसीआई

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 50 लाख टन गेहूं में से एफसीआई 45 लाख टन गेहूं, आटा मिलों जैसे थोक उपभोक्ताओं को ई-नीलामी के माध्यम से और 2 लाख टन गेहूं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बेच रहा है. गेहूं को आटे में बदलने के लिए तीन लाख टन गेहूं संस्थानों और राज्य-सार्वजनिक उपक्रमों को रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है. कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र ने पिछले साल मई में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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