₹10, ₹20, ₹50 और ₹100 के पुराने नोट 1 जुलाई से बंद ? RBI ने वायरल दावे पर बताई पूरी सच्चाई

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Fact Check

Fact Check : क्या 1 जुलाई 2026 से ₹10, ₹20, ₹50 और ₹100 के पुराने नोट बंद होने जा रहे हैं? जानें इस वायरल खबर का सच और RBI व PIB की आधिकारिक प्रतिक्रिया.

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Fact Check : सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर इन दिनों एक पोस्टर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि 1 जुलाई 2026 से ₹10, ₹20, ₹50 और ₹100 के पुराने नोट बंद कर दिए जाएंगे. इस खबर ने आम जनता के मन में डर पैदा कर दिया है कि कहीं उनके पास रखे पैसे बेकार तो नहीं हो जाएंगे. यदि आप भी इस खबर को लेकर असमंजस में हैं, तो यह लेख आपके लिए है. आइए, इस दावे का पूरा सच और सरकार की आधिकारिक स्थिति को समझते हैं.

क्या है वायरल पोस्ट का सच?

सोशल मीडिया पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र के लोगो का इस्तेमाल करके एक पोस्टर शेयर किया जा रहा है. इसमें कहा गया है कि आरबीआई ने पुराने नोटों को चलन से बाहर करने का फैसला किया है.

वास्तविकता यह है कि यह पूरी तरह से नकली (Fake) खबर है. प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इस वायरल दावे का ‘फैक्ट चेक’ किया है. PIB के अनुसार, सरकार या आरबीआई की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है. बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने भी ऐसी किसी आधिकारिक सूचना को जारी करने से साफ इनकार किया है.

RBI के पुराने नोटों पर नियम क्या हैं?

अक्सर लोग पुराने नोटों की वैधता को लेकर भ्रमित हो जाते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समय-समय पर पुराने नोटों को सिस्टम से हटाता है, लेकिन इसे ‘नोटबंदी’ नहीं कहा जा सकता. वर्तमान में आपके पास मौजूद ₹10, ₹20, ₹50 और ₹100 के सभी नोट पूरी तरह से वैध (Legal Tender) हैं. कई साल पहले आरबीआई ने 2005 से पहले छपे नोटों को धीरे-धीरे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन वे अभी भी बैंकों में बदले जा सकते हैं. उनका वैध होना खत्म नहीं हुआ है, बस बैंक उन्हें वापस जमा करवाकर नए नोट जारी करते हैं.

ऐसी अफवाहें क्यों फैलती हैं?

सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें अक्सर ‘क्लिकबेट’ (Clickbait) पाने के लिए फैलाई जाती हैं. इसका असर यह होता है.

लोग बिना सोचे-समझे अपने पास जमा कैश को बदलने के लिए बैंकों की ओर भागने लगते हैं.
दुकानदार कई बार भ्रम के कारण पुराने दिखने वाले नोट लेने से मना कर देते हैं, जो कि गलत है.
ऐसी खबरों के साथ कई बार फर्जी लिंक भेजे जाते हैं, जिनसे आपकी निजी जानकारी चोरी होने का खतरा रहता है.

निवेशकों और आम नागरिकों के लिए सलाह

अगर आप ऐसी कोई खबर देखते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें.

  • आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें: आरबीआई (rbi.org.in) या पीआईबी फैक्ट चेक (pib.gov.in) की वेबसाइट ही सही जानकारी देती हैं.
  • बैंक पर जाकर पूछें: यदि आपको किसी नोट की वैधता पर संदेह है, तो बैंक शाखा जाकर पूछें, न कि सोशल मीडिया की सुनी-सुनाई बातों पर.
  • नोट न बदलें: बिना किसी आधिकारिक सरकारी आदेश के अपने नोटों को किसी भी अनौपचारिक स्थान पर न बदलें.

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अभिषेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By अभिषेक पाण्डेय

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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