रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से 2008 के बाद रिकॉर्ड हाई पर क्रूड ऑयल, भारत में महंगे हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Mar 2022 11:11 AM
Crude oil price hike: रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2008 में वैश्विक महामंदी शुरू होने से पहले जुलाई 2008 के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 139.13 डॉलर प्रति बैरल के बेंचमार्क पर था. वहीं, क्रूड ऑयल 130.50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था.
Crude oil price hike: रूस-यूक्रेन युद्ध का आज 12वां दिन है. इन दोनों देशों के बीच हो रहे आपसी सैन्य टकराव की वजह से पूरा विश्व अशांत है. इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम पर भी दिखाई देने लगा है. आलम यह कि इन दोनों देशों के आपसी सैन्य टकराव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ब्रेंट क्रूड के दाम जुलाई 2008 के बाद अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का दाम 11.67 डॉलर या 9.9 फीसदी बढ़कर 129.78 डॉलर प्रति बैरल हो गया. वहीं, कच्चे तेल का दाम 10.83 डॉलर या 9.4 फीसदी बढ़कर 126.51 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जो मई 2020 के बाद दैनिक कीमतों के आधार पर ऑलटाइम हाई और जुलाई 2008 के बाद रिकॉर्ड हाई है.
द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने और अमेरिका और पश्चिमी देशों की ओर से रूस के कच्चे तेल की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ब्रेंट क्रूड की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई हैं. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार की शाम तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 11.67 डॉलर या 9.9 फीसदी बढ़कर 129.78 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल 10.83 डॉलर या 9.4 फीसदी बढ़कर 126.51 डॉलर प्रति बैरल हो गया.
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2008 में वैश्विक महामंदी शुरू होने से पहले जुलाई 2008 के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 139.13 डॉलर प्रति बैरल के बेंचमार्क पर था. वहीं, क्रूड ऑयल 130.50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था. जुलाई 2008 के अनुबंध में 147.50 डॉलर प्रति बैरल के साथ ब्रेंट क्रूड और 147.27 डॉलर प्रति बैरल के साथ क्रूड ऑयल(Crude Oil) अपने रिकॉर्ड स्तर पर था.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी की वजह से भारत में पेट्रोल-डीजल के साथ उपभोक्ता वस्तुओं के दामों में भी बढ़ोतरी होने की आशंका जाहिर की जा रही है. हालांकि, भारत में पिछले साल की दिवाली के समय से पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी नहीं की गई है, लेकिन इसके दामों में बढ़ोतरी का सिलसिला रुके होने के पीछे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को अहम कारण माना जा रहा है. आशंका यह जाहिर की जा रही है विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित होने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां एक बार फिर कीमत बढ़ाना शुरू कर देंगी.
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जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (जेएसपीएल) के प्रबंध निदेशक वीआर शर्मा ने कहा कि रूस-यूक्रेन की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा हो गया है, जिसका असर कच्चे माल की कीमतों पर पड़ना शुरू हो गया है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की कीमतों को काबू करने की जरूरत है. यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि कुछ तेल कंपनियां हालात का फायदा उठा रही हैं. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल थी और अब यह 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. उन्होंने आशंका जाहिर की है कि कुछ दिनों में कच्चा तेल 180 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा.
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