भारत में कोरोना वायरस के कहर का असर : दिल्ली और NCR में दवा दुकानों पर मास्क और सैनिटाइजर की किल्लत

भारत में कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी है. इसके प्रकोप से बचने के लिए लोग-बाग सबसे पहले दवा की दुकानों पर जाकर मास्क और सैनिटाइजर की मांग कर रहे हैं. आलम यह कि देश की राजधानी दिल्ली और इसके आसपास की दवा दुकानों में मास्क और सैनिटाइजर की किल्लत हो गयी है.
नयी दिल्ली : भारत में कोरोना वायरस फैलने के खबरों के बीच देश की राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र समेत आसपास के शहरों में दवा की दुकानों पर हैंड सैनिटाइजर और फेस मास्क की किल्लत देखने को मिल रही है. कई क्षेत्रों की दवा की दुकानों में सैनिटाइजर और मास्क का भंडार खत्म हो गया है और पिछले कुछ दिन में इन वस्तुओं की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण उत्पादक दुकानों में आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं. जिन दुकानों में मास्क उपलब्ध हैं वे दोगुने दाम पर बेच रहे हैं.
नाम न बताने की शर्त पर एक विक्रेता ने कहा कि पिछले दो महीने में हैंड सैनिटाइजर और मास्क की मांग सामान्य थी, लेकिन जब से दिल्ली में कोरोना वायरस का एक मामला सामने आया है, इन वस्तुओं की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. साधारण तौर पर इस्तेमाल किये जाने वाले ब्रांड जैसे डिटोल और हिमालया के सैनिटाइजर बहुत सी दुकानों पर उपलब्ध नहीं हैं.
हालांकि, कुछ दुकानों पर मेडिकल हैंड रब उपलब्ध हैं, जिनका मूल्य दो सौ से छह सौ रुपये के बीच है. डेढ़ सौ रुपये के मास्क की कीमत बढ़कर तीन सौ रुपये हो जाने के बारे में पूछे जाने पर एक दुकानदार ने कहा कि जब मांग इतनी ज्यादा बढ़ गयी है, तो हम क्या करें? खान मार्केट जैसे पॉश इलाके में भी किसी दवा दुकानदार के पास सैनिटाइजर उपलब्ध नहीं हैं.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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