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Grant: मोदी सरकार ने झारखंड और राजस्थान के लिए खोला खजाना, ग्रामीण निकायों के लिए 723 करोड़ जारी

Updated at : 27 Dec 2025 9:18 PM (IST)
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15th Finance Commission Grant

15वें वित्त आयोग ने झारखंड और राजस्थान के लिए जारी किए पैसे.

Grant: केंद्र सरकार ने 15वें वित्त आयोग के तहत राजस्थान और झारखंड के ग्रामीण स्थानीय निकायों को 723 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान जारी किया है. पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, यह राशि ग्राम, ब्लॉक और जिला पंचायतों को मजबूत करने के लिए दी गई है. अनुदान का उपयोग स्वच्छता, पेयजल, कचरा प्रबंधन और अन्य बुनियादी सेवाओं में किया जाएगा, जिससे ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी.

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Grant: केंद्र सरकार ने राजस्थान और झारखंड के ग्रामीण स्थानीय निकायों (रूरल लोकल बॉडीज) की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए 723 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि जारी की है. पंचायती राज मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह राशि 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर की पंचायतों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से दी गई है.

राजस्थान को 448 करोड़ से अधिक का अनुदान

राजस्थान के लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले हिस्से के रूप में 303.0419 करोड़ रुपये जारी किए हैं. यह धनराशि राज्य की 24 जिला पंचायतों, 339 ब्लॉक पंचायतों और 3,857 ग्राम पंचायतों के लिए निर्धारित की गई है. इसके अलावा, राजस्थान को 145.24 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी दी गई है, जो वर्ष 2024-25 की पहली और दूसरी किस्त में रोकी गई थी. यह राशि उन ग्रामीण स्थानीय निकायों को दी गई, जिन्होंने तय मानदंडों को पूरा किया था.

झारखंड को 275 करोड़ रुपये की सहायता

झारखंड के लिए केंद्र सरकार ने 275.1253 करोड़ रुपये जारी किए हैं. यह वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनुदान की पहली किस्त थी. इस राशि से राज्य की सभी 24 जिला पंचायतों, 253 ब्लॉक पंचायतों और 4,342 ग्राम पंचायतों को सहायता मिली है. सरकार का उद्देश्य इन निधियों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देना है.

अनुदान जारी करने की प्रक्रिया क्या है

प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) की सिफारिश पर वित्त मंत्रालय द्वारा राज्यों को अनुदान जारी किया जाता है. 15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली यह राशि आमतौर पर एक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में जारी की जाती है.

दो तरह के अनुदान

इस निधि को दो श्रेणियों में बांटा गया है. अप्रतिबंधित अनुदान के तहत पंचायतें अपने क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार कार्य कर सकती हैं. वे संविधान की 11वीं अनुसूची में शामिल 29 विषयों में से किसी पर भी खर्च कर सकती हैं, लेकिन इस धन का उपयोग वेतन या कार्यालयी खर्चों के लिए नहीं किया जा सकता.

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ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार

बंधित अनुदान का उपयोग अनिवार्य बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाता है. इसमें गांवों को खुले में शौच से मुक्त करना, ठोस और तरल कचरा प्रबंधन, स्वच्छ पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संरक्षण और अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण जैसे कार्य शामिल हैं. सरकार का मानना है कि इन अनुदानों से पंचायतों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता, जल प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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