बुलियन और रीयल एस्टेट कारोबारी को बड़े सौदों का रखना होगा रिकॉर्ड, वित्त मंत्रालय का नोटिफकेशन जारी

Author : Agency Published by : Prabhat Khabar Updated At : 31 Dec 2020 8:11 PM

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देश में बुलियन (Bullion) और रीयल एस्टेट (Real Estate) कारोबारियों के लिए एक बहुत ही खास खबर है. वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने इन दोनों क्षेत्रों में कारोबारियों द्वारा किए जाने वाले मोटे सौदों (Big Deals) को लेकर अधिसूचना जारी किया है. वित्त मंत्रालय की ओर से जारी की गई अधिसूचना (Notification) के अनुसार, कीमती धातुओं (Bullion) और रत्न (Gemstone) इत्यादि का कारोबार करने वाले कारोबारियों को 10 लाख रुपये मूल्य के नकद सौदे या एक ही ग्राहक के साथ इतनी बड़ी राशि के सौदों का रिकॉर्ड (Record) रखना होगा.

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नयी दिल्ली : देश में बुलियन (Bullion) और रीयल एस्टेट (Real Estate) कारोबारियों के लिए एक बहुत ही खास खबर है. वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने इन दोनों क्षेत्रों में कारोबारियों द्वारा किए जाने वाले मोटे सौदों (Big Deals) को लेकर अधिसूचना जारी किया है. वित्त मंत्रालय की ओर से जारी की गई अधिसूचना (Notification) के अनुसार, कीमती धातुओं (Bullion) और रत्न (Gemstone) इत्यादि का कारोबार करने वाले कारोबारियों को 10 लाख रुपये मूल्य के नकद सौदे या एक ही ग्राहक के साथ इतनी बड़ी राशि के सौदों का रिकॉर्ड (Record) रखना होगा.

इसके साथ ही, वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि महंगी धातु और रत्न कारोबारियों के साथ-साथ धनशोधन रोधक अधिनियम (Money Laundering Law) के दायरे में आने वाले उन रीयल एस्टेट एजेंटों (Real Estate Agent) को भी रिकॉर्ड रखना होगा, जो 20 लाख रुपये से अधिक का सौदा करते हैं. बता दें कि भारत में रीयल एस्टेट का लंबा-चौड़ा कारोबार है. नीति आयोग की फरवरी 2019 की अनुमानित रिपोर्ट के अनुसार, भारत में रीयल एस्टेट का कुल कारोबार करीब 8.3 लाख करोड़ रुपये का है.

नांगिया एंड कंपनी एलएलपी के निदेशक मयंक अरोड़ा ने कहा कि नियमों में इस संशोधन का लक्ष्य कानून की उस कमी को दूर करना है, जहां रत्न और आभूषण क्षेत्र में बिना ग्राहक को जाने दो लाख रुपये तक के नकद सौदे करने की अनुमति है. दो लाख रुपये से अधिक की खरीद पर ग्राहक को पैन कार्ड या आधार संख्या बतानी होती है. उन्होंने कहा कि रीयल एस्टेट एजेंट मनी लॉन्ड्रिंग कानून, 2002 के तहत रिपोर्ट करने वाली इकाई माने जाते हैं.

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Posted By : Vishwat Sen

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