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रेंट पर रहने वालों के लिए बड़ी जंग, क्या शहरों में घर लेना अब होगा गरीबों के लिए मुश्किल?

Updated at : 16 Jan 2026 2:57 PM (IST)
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Budget Demand 2026

AI Generated Image

Budget Demand 2026: Budget 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी उम्मीदें हैं. एक्सपर्ट्स ने सस्ते घरों की कमी और रेंट के बढ़ते दामों को लेकर सरकार से बड़े बदलावों की मांग की है.

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Budget Demand 2026: Union Budget 2026 आने वाला है और रियल एस्टेट मार्केट के बड़े खिलाड़ी अपनी डिमांड्स लेकर सरकार के सामने खड़े हैं. असल बात ये है कि पिछले कुछ सालों में बड़े और लग्जरी घरों की सेल तो खूब बढ़ी है, लेकिन वो घर जिन्हें एक आम आदमी या मिडिल क्लास फैमिली खरीद सके, यानी ‘अफोर्डेबल हाउसिंग’, उनकी हालत काफी पतली है. ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि 2025 में घरों की बिक्री 14 परसेंट कम हुई है, फिर भी मार्केट की वैल्यू 6 परसेंट बढ़कर 6 लाख करोड़ पहुंच गई है. इसका सीधा मतलब ये है कि अमीर लोग और महंगे घर खरीद रहे हैं, जबकि आम आदमी की पहुंच से घर बाहर होता जा रहा है.

क्या 45 लाख में अब घर मिलना मुमकिन है?

रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब वक्त आ गया है कि सरकार ‘अफोर्डेबल हाउसिंग’ की अपनी पुरानी परिभाषा को बदले. आज के महंगाई वाले दौर में 45 लाख का कैप अब प्रैक्टिकल नहीं रहा है. मांग ये है कि मुंबई जैसे महंगे शहर में 95 लाख तक के घर को और बाकी बड़े शहरों में 75 लाख तक के घर को ‘अफोर्डेबल’ माना जाए. अगर ऐसा होता है, तो मिडिल क्लास बायर्स को टैक्स में फायदा मिलेगा और डेवलपर्स को भी नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने का हौसला मिलेगा. इसके साथ ही सेक्शन 80-IBA के तहत मिलने वाली टैक्स छूट को वापस लाने की मांग भी जोरों पर है ताकि डेवलपर्स सस्ते घरों की तरफ दोबारा रुख कर सकें.

रेंट पर रहना क्या अब और सस्ता होगा?

किराये के घर यानी रेंटल हाउसिंग को लेकर भी इस बार बजट से काफी उम्मीदें हैं. NAREDCO के निरंजन हिरानंदानी का कहना है कि ‘Housing for All’ का सपना तब तक पूरा नहीं होगा जब तक रेंटल हाउसिंग को बढ़ावा नहीं मिलता है. उन्होंने सुझाव दिया है कि रेंटल इनकम पर लगने वाले टैक्स और स्टैंप ड्यूटी के नियमों में ढील दी जानी चाहिए. फिलहाल, अगर कोई रेंट के लिए घर में इन्वेस्ट करता है, तो उसे टैक्स के मोर्चे पर ज्यादा फायदा नहीं मिलता है. अगर सरकार इन नियमों को आसान बनाती है, तो शहरों में रहने वाले यंग प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स के लिए सस्ते और बेहतर रेंटल ऑप्शंस खुल सकते हैं.

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क्या घर खरीदने के अलावा जॉब्स पर भी फोकस होगा?

CBRE के अंशुमान मैगजीन और लोहिया वर्ल्डस्पेस के पीयूष लोहिया का मानना है कि सिर्फ ईंट-पत्थर की बिल्डिंग बनाने से काम नहीं चलेगा. बजट में शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर और लोगों की स्किलिंग पर भी ध्यान देना होगा. जैसे-जैसे ग्लोबल कंपनियां भारत आ रही हैं, एआई (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसे सेक्टर्स में ट्रेनिंग की जरूरत बढ़ेगी. अगर लोगों की इनकम बढ़ेगी और पर्सनल इनकम टैक्स कम होगा, तभी उनके पास घर खरीदने के लिए पैसे बचेंगे. साथ ही, अब ‘ग्रीन कंस्ट्रक्शन’ यानी पर्यावरण का ध्यान रखने वाली बिल्डिंग्स बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे लंबे समय में रहने का खर्च कम हो सके.

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Soumya Shahdeo

लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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