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1962 के चीन युद्ध में भारत की महिलाओं ने ट्रक के ट्रक दिया था सोना, आनंद महिंद्रा ने X पर किए भावुक पोस्ट

Updated at : 24 Oct 2025 4:59 PM (IST)
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महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा

Gold: 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भारतीय महिलाओं ने देश की रक्षा के लिए सोना और चांदी के गहनों के ट्रक के ट्रक दान किए थे. इस भावुक घटना को याद करते हुए उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने एक्स पर पोस्ट साझा किया. उन्होंने बताया कि उनकी मां ने भी उस समय अपनी चूड़ियां और हार देश को समर्पित किए थे. महिंद्रा ने लिखा, यह दर्शाता है कि किसी देश की ताकत सिर्फ नीतियों में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की देशभक्ति में निहित होती है.

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Gold: सोना भारत की महिलाओं की सबसे प्रिय वस्तु या सबसे बड़ी कमजोरी है. इसके लिए वे किसी भी हद तक जा सकती हैं. लेकिन, बात जब देश के आन-बान और शान की आती है, तो भारत की महिलाएं वीरांगना बनकर आगे बढ़ती हैं और दुश्मनों को छक्के छुड़ाने के लिए पुरजोर प्रयास करने में जुट जाती हैं. साल 1962 में भारत का चीन के साथ युद्ध चल रहा था और सरकार के पास पैसों की कमी हो गई. तब उसने देश के महिलाओं से सोना और ज्वेलरी दान करने की अपील की. सरकार की इस अपील का नतीजा यह निकला कि सरकार की एक अपील पर देश की महिलाओं ने ट्रक के ट्रक सोने-चांदी के गहने देश के लिए दान कर कर दिया. ये बातें हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि ऑटोमोबिल सेक्टर के दिग्गज उद्योगपति और महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया के प्रमुख प्लेटफॉर्म एक्स (पुराना ट्विटर) पर अपने एक पोस्ट के जरिए कही है.

आनंद महिंद्रा ने एक्स पर क्यों किया पोस्ट

अब सवाल यह पैदा होता है कि देश के दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने बिना चर्चा के एक्स पर 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भारतीय महिलाओं द्वारा सोने-चांदी के जेवरात दान करने की बात पोस्ट क्यों किया? इसका जवाब यह है कि एक्स पर वर्ल्ड अपडेट के हैंडल से एक पोस्ट किया गया है. इसमें कहा गया है, ‘दुनिया के 10 देशों से अधिक सोना अकेले भारत की महिलाओं के पास‘ है. सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले आनंद महिंद्रा ने एक्स पर अपने बचपन की याद तो ताजा करते हुए 1962 के युद्ध की भावुक करने वाली बातें कही हैं.

एक्स पर आनंद महिंद्रा ने क्या लिखा

अपने एक्स के पोस्ट में आनंद महिंद्रा ने लिखा है, ‘शानदार स्टैटिस्टिक. इससे मेरे बचपन की एक साफ याद ताजा हो गई. 1962 में चीन के साथ युद्ध के दौरान सरकार ने एक नेशनल डिफेंस फंड बनाया और लोगों से डिफेंस के लिए सोना और ज्वेलरी दान करने की अपील की. ​​नेट पर मौजूद जानकारी से मैंने देखा कि आज के दामों में हजारों करोड़ का सोना फंड के लिए इकट्ठा किया गया था. ऑनलाइन सोर्स के मुताबिक, अकेले पंजाब ने 252 किलो सोना दान किया.’

मेगाफोन से की जा रही थी ज्वेलरी दान की अपील

अपने पोस्ट में आनंद महिंद्रा ने आगे लिखा, ‘मुझे साफ याद है. जब मैं सात साल का था, तो मैं अपनी मां के साथ मुंबई (उस समय बॉम्बे) की सड़क पर खड़ा था, जब सरकारी ट्रक गुजर रहे थे. मेगाफोन जोर-जोर से लोगों से देश की रक्षा के लिए अपनी ज्वेलरी दान करने की अपील कर रहे थे. मैं आज भी सोच सकता हूं कि वह चुपचाप अपनी कुछ सोने की चूड़ियां और हार इकट्ठा करती थीं. उन्हें कपड़े के थैले में रखती थीं और ट्रक पर वॉलंटियर्स को देती थीं. क्या आज की दुनिया में भी इतने बड़े लेवल, भावना और भरोसे के वॉलंटियरिंग काम होते होंगे? 1962 की वह याद मुझे याद दिलाती है कि किसी देश की नेशनल रेज़िलिएंस आखिरकार सिर्फ़ पॉलिसी टूल्स पर ही नहीं, बल्कि उसके लोगों की मिली-जुली इच्छा पर भी निर्भर करती है.

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आनंद महिंद्रा के पोस्ट पर मिल रहे रिएक्शन

आनंद महिंद्रा के पोस्ट पर भरपूर रिएक्शन मिल रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, ‘मेरी मां ने भी अपना सोना जमा किया था और समय आने पर वह सब शुद्ध रूप में वापस मिल गया. भारत सरकार को बधाई.’ दूसरे यूजर ने लिखा, ‘हमारे घर में आज भी यह बात रखी है कि मेरे पिता ने उस समय स्टूडेंट के तौर पर जो सोना दान किया था, वह आज भी वैसा ही है.’

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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