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आर्थिकी के पहिये को धीमा कर गया नोटबंदी, अच्छे नतीजों का अब भी है इंतजार

Updated at : 26 Dec 2016 6:03 PM (IST)
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आर्थिकी के पहिये को धीमा कर गया नोटबंदी, अच्छे नतीजों का अब भी है इंतजार

नयी दिल्ली : नोटबंदी के बाद से देश की अर्थव्यवस्था में आयी रुकावट को लेकर अलग -अलग तरह के अनुमान व्यक्त किये जा रहे हैं. आठ नवबंर को नोटबंदी की घोषणा के बाद से लेकर आज तक देश की आर्थिकी का मूड भांपने में सिर्फ सरकार ही नहीं बल्कि विश्लेषक भी नाकाम रहे. अब भी […]

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नयी दिल्ली : नोटबंदी के बाद से देश की अर्थव्यवस्था में आयी रुकावट को लेकर अलग -अलग तरह के अनुमान व्यक्त किये जा रहे हैं. आठ नवबंर को नोटबंदी की घोषणा के बाद से लेकर आज तक देश की आर्थिकी का मूड भांपने में सिर्फ सरकार ही नहीं बल्कि विश्लेषक भी नाकाम रहे. अब भी इस फैसले से होने वालों प्रभावों का इंतजार है. हर रोज बदलते नियमों से यह शक और भी गहराने लगा कि सरकार ने नोटबंदी को लेकर व्यापक तैयारी नहीं की थी. कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीति आयोग के विशेषज्ञों के साथ मिलकर बैठक करेंगे. 30 दिसंबर को नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने वाले हैं, ऐसे में यह सवाल अब भी बरकरार है कि अर्थव्यवस्था में इसके क्या प्रभाव पड़ सकते हैं.

1. रोजगार सृजन
: नरेंद्र मोदी सरकार 2014 में रोजगार के मुद्दे को लेकर सत्ता में आयी थी. चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने नौकरियों को अपना मुद्दा बनाया. निजी क्षेत्र में धीरे-धीरे नौकरियां बढ़ रही थी. रेटिंग एजेंसी केयर के रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2014 -15 के मुताबिक 2015-16 में कॉरपोरेट नियुक्तियों में वृद्धि दर्ज की गयी है. केयर ने यह रिपोर्ट 2,112 कंपनियों के आधार पर निष्कर्ष निकाला है. नोटबंदी के बाद से असंगठित सेक्टर व लघु उद्योगों पर बुरा प्रभाव पड़ा है. औद्योगिक राज्यों से बिहार व यूपी जाने वाले ट्रेनों में लोग वापस अपने गांव लौट रहे हैं. नौकरियों में कटौती की जा सकती है.

2.औद्योगिक उत्पादन
: अक्टूबर महीने में औद्योगिक उत्पादन में 2.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी. समझा जा रहा है कि नोटबंदी के बाद औद्योगिक उत्पादन में और गिरावट देखने को मिल सकती है. कम औद्योगिक उत्पादन का असर नौकरियों पर पड़ेगा. सरकार
की महत्वाकांक्षीयोजना मेक इन इंडिया पर बुरा असर हो सकता है.

3.राजस्व में वृद्धि
: फिलहाल नोटबंदी का एकमात्र फायदा दिखाई पड़ रहा है वह है राजस्व में वृद्धि. लोग अनावश्यक छापेमारी और जांच के डर से आयकर चुकायेंगे. नोटबंदी के दौरान बड़े व्यापक पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया गया. कई जगहों से नये नोट बरामद किये गये. देश में सिर्फ एक प्रतिशत लोग ही टैक्स चुकाते हैं. नोटबंदी के बाद से टैक्स चुकाने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है.

4. निर्यात:लगातार तीन महीने से निर्यात में वृद्धि दर्ज की जा रही थी. पिछले महीने निर्यात 2.29 प्रतिशत से बढ़कर 20 अरब डॉलर पर पहुंच गया. गौरतलब है कि 2014 के बाद लगातार 18 महीने तक निर्यात में गिरावट दर्ज की गयी थी. निर्यात में मामूली वृद्धि से लोगों की उम्मीद जगी थी कि भारत की अर्थव्यवस्था अब तेजी से उड़ान भरेगी लेकिन नोटबंदी के फैसले के बाद संशय बरकरार है.

5.जीडीपी : विभिन्न क्रेडिट एजेंसियों ने जीडीपी के अनुमान को फिर से संशोधित किया है. क्रेडिट एजेंसियों की माने तो जीडीपी की दर में गिरावट हो सकती है. मूडीज इन्वेस्टर सर्विस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी से आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित होंगी और इससे निकट भविष्य में वृद्धि कमजोर पड़ेगी. वहीं, दीर्घावधि में इससे कर राजस्व बढ़ेगा और यह तेजी से राजकोषीय मजबूती में तब्दील हो सकती है.

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