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GST : सुब्रमण्यन समिति ने सौंपी रिपोर्ट, स्टैंडर्ड रेट 17-18 % रखने का सुझाव

Updated at : 04 Dec 2015 6:02 PM (IST)
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GST : सुब्रमण्यन समिति ने सौंपी रिपोर्ट, स्टैंडर्ड रेट 17-18 % रखने का सुझाव

नयी दिल्ली : प्रस्तावित जीएसटी को लेकर जारी गतिरोध को दूर करने के मकसद से प्रस्तुत अपनी सिफारिशों में मुख्य आर्थिक सलाहकारी (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यम की अध्यक्षता वाली समिति ने अंतर-राज्यीय बिक्री पर इस कर के उपर एक प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाने के प्रस्ताव को हटाने का आज सुझाव दिया है. हालांकि समिति ने प्रस्तावित […]

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नयी दिल्ली : प्रस्तावित जीएसटी को लेकर जारी गतिरोध को दूर करने के मकसद से प्रस्तुत अपनी सिफारिशों में मुख्य आर्थिक सलाहकारी (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यम की अध्यक्षता वाली समिति ने अंतर-राज्यीय बिक्री पर इस कर के उपर एक प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाने के प्रस्ताव को हटाने का आज सुझाव दिया है. हालांकि समिति ने प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दर जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक में शामिल करने का समर्थन नहीं किया है. प्रस्तावित नया कर मौजूदा उत्पाद शुल्क, सेवा कर तथा राज्यों में सालू बिक्री कर का स्थान लेगा.समिति ने जीएसटी की राजस्व निरपेक्ष दर 15 से 15.5 प्रतिशत तथा मानक दर 17 से 18 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया है.

गौरतलब है कि राज्यसभा में पिछले सत्र में जीएसटी विधेयक का विरोध करने वाली मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस एक सरल जीएसटी तथा वस्तुओं पर एक प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाने के प्रस्ताव को हटाने की मांग कर रही है. पार्टी यह भी मांग कर रही है कि जीएसटी की उच्चम दरों को संविधान संशोधन विधेयक का हिस्सा बनाया जाए.समिति को जीएसटी के लिये राजस्व निरपेक्ष दर के बारे में सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। समिति ने जीएसटी में प्रस्तावित एक प्रतिशत समेत अंतर-राज्यीय बिक्री पर अतिरिक्त कर नहीं लगाने की सिफारिश की है. सीईए की अध्यक्षता वाली समिति ने अल्कोहल तथा पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल करने का भी सुझाव दिया है जैसा कि कांग्रेस इसकी मांग कर रही थी.

ऐसा लगता है कि सिफारिशों में कांग्रेस तथा सरकार के बीच जीएसटी को लेकर गतिरोध को दूर करने के लिये मध्य मार्ग अपनाने का सुझाव दिया गया है. सरकार नहीं चाहती कि जीएसटी दर विधेयक का हिस्सा बने क्योंकि इससे भविष्य में किसी भी उत्पाद पर जीएसटी की दरों में बदलाव में संसद की दो तिहाई बहुमत से मंजूरी लेनी होगी.सरकार चाहती है कि जीएसटी विधेयक को संसद के मौजूदा सत्र में पारित किया जाए ताकि एक अप्रैल 2016 से इसे लागू करने का लक्ष्य हासिल किया जा सके.

राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा, ‘‘सरकार सीईए की अगुवाई वाली समिति की जीएसटी के लिये राजस्व निरपेक्ष दर रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और इस पर अपनी राय बनाएगी.’ समिति ने वित्त मंत्री मंत्री अरुण जेटली को आज अपनी रिपोर्ट सौंपी. इसमें महत्वकांक्षी कर सुधार की गुंजाइश को रेखांकित किया गया है जिसका मकसद पूरे देश में एकीकृत राष्ट्रीय बाजार सृजित करना है.

रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सुब्रमण्यम ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘देश के पास जीएसटी के साथ ऐतिहासिक अवसर है. यह देश के कर संस्थान को मजबूत करेगा, राज्यों के भीतर बाधाओं को हटाएगा और एक साझा बाजार तैयार करेगा।’ नीति आयोग द्वारा एक परिचर्चा के दौरान संवाददाताओं से अलग से बातचीत में वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि सीईए की रिपोर्ट जीएसटी परिषद के पास जाएगी और इन मानकों के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय करने होंगे.

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार कांग्रेस से फिर से बातचीत करेगी, सिन्हा ने कहा, ‘‘हम अपने सहयोगियों के साथ हमेशा चर्चा और परामर्श करते रहते हैं. हम यह उम्मीद कर रहे हैं कि अगले सप्ताह की शुरुआत में, हम अपनी चर्चा और परामर्श जारी रख पाएंगे.समिति ने महत्वपूर्ण राजस्व निरपेक्ष दर के आकलन के लिये तीन अलग-अलग तरीकों का विश्लेषण किया है. राजस्व निरपेक्ष दर वह दर है जिसको रखने से राज्य सरकारों एवं केंद्र सरकार को नई व्यवस्था लागू होने पर कर राजस्व में कोई नुकसान नहीं होगा.

समिति ने राजस्व निरपेक्ष दर के लिये 15 से 15.5 प्रतिशत के दायरे का सुझाव दिया है. जिस मानक दर पर अधिकतर उत्पादों पर कर लगेगा, उसके 17 से 18 प्रतिशत रखे जाने की सिफारिश की गयी है.मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा, ‘‘यह तकनीकी काम था और हमने इसमें प्रत्यक्ष कर, अप्रत्यक्ष कर में उपयोग किये जाने वाले गणना के तरीकों तथा एनआईपीएफपी द्वारा सुझाये गये तरीकों को ध्यान रखा.’ समिति ने विभिन्न उत्पादों एवं सेवाओं के लिये जीएसटी दर 12 प्रतिशत से 40 प्रतिशत दिया है. उच्च कर की दरें महंगी कार, तंबाकू उत्पाद जैसे चुनिंदा उत्पादों पर लागू होंगी.

समिति ने रीयल एस्टेट बिजली, तथा एवं पेट्रोलियम उत्पादों को इससे बाहर रखने का सुझाव दिया है. कुछ राज्यों ने आकर्षक जिंसों पर कर नियंत्रण छोडने के खिलाफ अपनी आपत्ति जतायी थी लेकिन सीईए समिति ने इन्हें जीएसटी के दायरे में लाने का सुझाव दिया है.

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