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भारत-रूस ने व्यापार संबंधों को मजबूत बनाने का फैसला किया

Updated at : 21 Oct 2015 4:21 PM (IST)
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भारत-रूस ने व्यापार संबंधों को मजबूत बनाने का फैसला किया

मास्को : भारत और रूस ने अगले 10 साल में 30 अरब डालर के द्विपक्षीय कारोबार का लक्ष्य हासिल करने के लिये अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रूस के उप प्रधानमंत्री दमित्री रोगोजिन ने कल यहां 21वें भारत-रूस अंतर-सरकारी परामर्श बैठक की संयुक्त […]

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मास्को : भारत और रूस ने अगले 10 साल में 30 अरब डालर के द्विपक्षीय कारोबार का लक्ष्य हासिल करने के लिये अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रूस के उप प्रधानमंत्री दमित्री रोगोजिन ने कल यहां 21वें भारत-रूस अंतर-सरकारी परामर्श बैठक की संयुक्त रूप से अध्यक्षता की और 2025 तक द्विपक्षीय प्रत्यक्ष निवेश बढाकर 15 अरब डालर करने के उपायों पर चर्चा की. दोनों पक्षों ने इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिये विभिन्न क्षेत्रों की पहचान की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने पिछले साल शिखर बैठक के दौरान व्यापार के लिए इन लक्ष्यों पर सहमति जतायी थी.

दोनों देशों के बीच 2014 में द्विपक्षीय व्यापार 9.51 अरब डालर था. इसमें भारत का निर्यात 3.17 अरब डालर और आयात 6.34 अरब डालर था. कृषि, औषधि तथा बुनियादी ढांचा जैसे कुछ क्षेत्रों की पहचान की है जिनमें दोनों पक्ष पारस्परिक सहयोग सम्पर्क तेज करेंगे. दोनों पक्षों के बीच आज के विचार-विमर्श में आर्थिक एजेंडा प्रमुख रहा. इसके अलावा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर भी चर्चा की गयी. अधिकारियों के अनुसार भारत ने रूस से 12 परमाणु संयंत्र खरीदने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है. मोदी और पुतिन ने इस पर प्रस्ताव पर सहमति जतायी थी.

रूस परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में भारत का एक प्रमुख सहयोगी है. इससे पहले, सुषमा ने रूस के प्रमुख प्राच्यविद्या शस्त्रियों से मुलाकात की. विचारकों ने उन्हें रामायण और महाभारत के अनुवाद के साथ-साथ रूस में भारतीय भाषाओं को पढाने संबंधी आने अपने काम के बारे में बताया. विदेश मंत्री ने उनसे कहा कि भारत साहित्य एवं संस्कृति की विशेषता है कि इसमें सभी प्रकार के विचारों का सम्मान किया गया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप ने कहा, ‘रूसी विचारकों ने रामायण और महाभारत से लेकर रबीन्द्र संगीत का अनुवाद तथा भारतीय भाषाओं को पढाये जाने समेत अपने काम के बारे में विदेशी मंत्री को जानकारी दी.’

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