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बाजार की गिरावट से डरने की जरुरत नहीं, देश में विदेशह मुद्रा का भंडार पर्याप्‍त : रघुराम राजन

Updated at : 24 Aug 2015 1:27 PM (IST)
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बाजार की गिरावट से डरने की जरुरत नहीं, देश में विदेशह मुद्रा का भंडार पर्याप्‍त : रघुराम राजन

मुंबई : चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर गहराई चिंता से शेयर और रुपये में भारी गिरावट के बीज रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आज कहा कि भारत की वृहद आर्थिक स्थिति अन्य देशों की तुलना में काफी मजबूत है और ऐसे में डर की कोई जरुरत नहीं है. राजन ने कहा, ‘मैं बाजारों […]

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मुंबई : चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर गहराई चिंता से शेयर और रुपये में भारी गिरावट के बीज रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आज कहा कि भारत की वृहद आर्थिक स्थिति अन्य देशों की तुलना में काफी मजबूत है और ऐसे में डर की कोई जरुरत नहीं है. राजन ने कहा, ‘मैं बाजारों को यह आश्वस्थ करना चाहता हूं कि हमारे वृहद आर्थिक कारक नियंत्रण में हैं और हमारी अर्थव्यवस्था औरों की तुलना में बहुत अच्छी स्थिति में है.’ आरबीआइ गवर्नर यहां राष्ट्रीय बैंकिंग सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. इसका आयोजन बैंकों के संघ आइबीए और फिक्की ने मिल कर किया है. उन्होंने कहा कि देश के पास इस समय 380 अरब डालर का विदेशी मुद्रा भंडार है. जब और जैसी जरुरत पडेगी इसका इस्तेमाल किया जाएगा.

आरबीआई गवर्नर राजन ने आने वाले समय में नीतिगत ब्याज दर में कमी किये जाने का संकेत भी दिया. उन्होंने कहा कि जिंसों की कीमतों में और अधिक कमी आने, सरकार की ओर से अनाज के अच्छे प्रबंध और मुद्रास्फीति के खिलाफ केंद्रीय बैंक की सख्त नीति से नरम मौद्रिक नीति (नीतिगत दरों में कमी) की बन रही गुंजाइश पर रिजर्व बैंक ध्यान देगा. राजन ने कहा, ‘जिंस बाजार में गिरती कीमतों और सरकार की ओर से खाद्य बाजार के अच्छे प्रबंध से रिजर्व बैंक को (नीतिगत ब्याज कम करने में) मदद मिलेगी.’

राजन ने कहा, उन्हें लगता है कि कच्चे तेल की कीमतें अभी एक दो साल नीचे ही चलेंगी. गौरतलब है कि आज भारत सहित एशियायी शेयर बाजारों में भारी उठापटक के बीच रुपया डालर के मुकाबले टूट कर शुरुआती कारोबार में 66 पैसे की तेज गिरावट के साथ 66.49 तक चला गया. यह दो साल में रुपये का न्यूनतम स्तर है. रुपये में यह गिरावट ऐसे समय देखी गयी जबकि अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं के समक्ष डालर कमजोर रहा.

शेयर बाजारों से विदेशी धन की निकासी बढने से रुपये पर दबाव बढ गया था. आरबीआइ गवर्नर ने कहा कि विदेशी विनियम बाजार में उथल पुथल चल रही थी और उसमें चीन तो आखिरी पडाव है. उन्होंने कहा कि यूं तो जापानी येन और यूरो के समक्ष रुपये की विनिमय दर मजबूत हुई है. गवर्नर ने कहा कि विनिमय बाजार में अप्रत्याशित उतार चढाव से निपटने के लिए रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त संसाधन है. स्थानीय शेयर बाजारों में आज कारोबार के दौरान इस वर्ष अब तक सबसे बडी गिरावट देखी गयी.

प्रारंभिक कारोबार में मुंबई बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1006 अंक टूट गया. खास कर संस्थागत निवेशकों की बिकवाली के दबाव में नेशनल स्टाक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला निफ्टी भी गिर कर 8,000 से नीचे चला गया. चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर गहराती चिंताओं के बीच आज एशिया के प्रमुख शेयरों में भारी उथल पुथल रही. शंघाई शेयर बाजार में आठ फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी. चीन की अर्थव्यवस्था का संकट पहले के अनुमानों से भी गहरा माना जा रहा है जिससे निवेशकों में घबराहट देखी गयी. सुबह सेंसेक्स 1006.54 अंक या 3.67 फीसदी गिर कर 26,359.53 अंक तथा एनएसइ का निफ्टी भी 3.72 प्रतिशत (309.05 अंक) नीचे 7,990.90 पर चल रहा था. निफ्टी के सभी 50 शेयर गिरावट में थे.

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