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खुदरा में एफडीआइ नहीं:निर्मला सीतारमण

Updated at : 14 Aug 2014 8:08 AM (IST)
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खुदरा में एफडीआइ नहीं:निर्मला सीतारमण

नयी दिल्ली : बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि राजग सरकार इसे स्वीकार नहीं करेगी. राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान निर्मला ने कहा कि भाजपा को चुनाव में उसके घोषणापत्र के आधार पर व्यापक जनादेश […]

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नयी दिल्ली : बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि राजग सरकार इसे स्वीकार नहीं करेगी. राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान निर्मला ने कहा कि भाजपा को चुनाव में उसके घोषणापत्र के आधार पर व्यापक जनादेश मिला है और पार्टी ने अपने घोषणापत्र में बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआइ का विरोध किया है.

उन्होंने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा, सरकार ने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार द्वारा मंजूर की गयी बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआइ की अनुमति देने संबंधी नीति को समाप्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है. निर्मला ने तेदेपा के सीएम रमेश के पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि बीते तीन साल के दौरान देश में एफडीआइ के प्रवाह में उतार-चढ़ाव रहा है. वर्ष 2011-12 की तुलना में वर्ष 2012-13 में इसमें 26.33 फीसदी की गिरावट आयी तो वर्ष 2012-13 की तुलना में वर्ष 2013-14 में इसमें 6.12 फीसदी की वृद्धि भी हुई.

* जीएएआर पर काम जारी : वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री ने कहा कि यहां तक कि जिन क्षेत्रों में स्वत: अनुमोदन के तहत एफडीआइ की अनुमति है वहां भारतीय रिजर्व बैंक निवेश प्रवाह की जांच करता है. सीतारमण ने कहा, उदारीकृत आर्थिक माहौल में निवेशकों का निवेश का निर्णय बड़ी आर्थिक नीति की रूपरेखा, निवेश के माहौल, अंतरराष्ट्रीय निगमों की निवेश नीतियों और अन्य वाणिज्यिक कारकों पर आधारित होता है.

* एफडीआइ नीतिगत निर्णय पर निर्भर

उन्होंने कहा कि एफडीआइ आर्थिक नीतिगत निर्णय, निवेश के माहौल तथा अन्य कारकों पर निर्भर होता है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 से 2014 के बीच मॉरीशस ने भारत में 80.809 अरब डॉलर का निवेश किया है. निवेश करनेवाली कंपनियों की जांच के बारे में तपन सेन के पूरक प्रश्न के उत्तर में सीतारमण ने बताया कि इसके लिए एफआइपीबी का उपयोग किया जा रहा है. एफआइपीबी के जरिये भारतीय रिजर्व बैंक और राजस्व विभाग भारत में किए जानेवाले निवेश की जांच करते हैं.

* विदेशी निवेश के लिए कई कदम उठाये

मंत्री ने कहा कि विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाये गये हैं. इनमें हंगरी, पोलैंड, स्वीडन, बेलारूस, लीबिया के साथ पांच संयुक्त आयोगों की स्थापना और जापान, फ्रांस, रूस, मलयेशिया तथा दक्षिण अफ्रीका के साथ सीइओज शामिल हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने 83 देशों के साथ बीआइपीए पर तथा नौ देशों के साथ सीइपीए पर भी हस्ताक्षर किये हैं.

* रेलवे में और एफडीआइ के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी

सरकार ने रेलवे के संवेदनशील क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) को लेकर कुछ अंकुश लगाये हैं. इन संवेदनशील क्षेत्रों में 49 फीसदी से अधिक के विदेशी निवेश के प्रस्तावों को सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की मंजूरी जरूरी होगी. इससे पहले इसी महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नकदी संकट से जूझ रही रेलवे के लिए लंबे समय से लंबित एफडीआइ को उदार बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. गृह मंत्रालय ने सीमा क्षेत्रों में रेल बुनियादी ढांचे को लेकर चिंता जतायी है.

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