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लिक्विड फंड : कम समय के लिए निवेश का विकल्प

Updated at : 20 Jan 2020 9:47 AM (IST)
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लिक्विड फंड : कम समय के लिए निवेश का विकल्प

ललित त्रिपाठी, निदेशक, वेदांत एसेट्स कई बार अचानक कहीं से कोई राशि मिल जाती है, जिसे कहां निवेश करना है उसके लिए कोई योजना पास में नहीं होती. इसके अलावा यह भी निश्चित नहीं होता कि कब तक के लिए आप उसे निवेशित रख सकते हैं. एेसी स्थिति में लिक्विड फंड एक अच्छा विकल्प है. […]

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ललित त्रिपाठी, निदेशक, वेदांत एसेट्स
कई बार अचानक कहीं से कोई राशि मिल जाती है, जिसे कहां निवेश करना है उसके लिए कोई योजना पास में नहीं होती. इसके अलावा यह भी निश्चित नहीं होता कि कब तक के लिए आप उसे निवेशित रख सकते हैं. एेसी स्थिति में लिक्विड फंड एक अच्छा विकल्प है.
निवेश की तरलता और सुरक्षा पर होता है ध्यान
निवेश की तरलता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे बॉन्ड-पेपर्स में निवेश किया जाता है जिसकी मैचुरिटी 30-60 दिनों की होती है. लिक्विड फंड के मैनेजर को यह सुनिश्चित करना होता है कि निवेश की राशि का औसत परिपक्वता अवधि एक महीने से अधिक नहीं होना चाहिए. इस कारण लिक्विड फंड में किया गया निवेश में बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता है. कम अवधि के लिए अतिरिक्त पैसे को निवेश करने का यह अच्छा विकल्प है क्योंकि इसमें सेविंग्स और करेंट अकाउंट से ज्यादा रिटर्न देने की संभावना होती है. चूंकि इसमें एक्जिट लोड नहीं होता है, इससे निवेशक कभी भी अपना पैसा निकाल सकते हैं.
इन वित्तीय इंस्ट्रूमेंट्स में होता है निवेश
लिक्विड फंड का पैसा मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे ट्रेजरी बिल (टी बिल्स), कॉमर्शियल पेपर (सीपी), सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (सीडी) में ही निवेश किया जाता है. ट्रेजरी बिल भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है. इसके माध्यम से सरकार 365 दिनों ने कम समय के लिए पैसा लेती है.
इसलिए यह सबसे सुरक्षित निवेश का माध्यम है. कॉमर्शियल पेपर उन कंपनियों द्वारा निर्गत किया जाता है जिनकी रेटिंग्स बहुत अच्छे होते हैं. पेपर निर्गत करते समय ही इसे डिस्काउंटेड रेट पर दिया जाता है और मैचुरिटी होने पर पूरा पैसा दे दिया जाता है. इसी तरह सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट बैंकों द्वारा निर्गत किया जाता है.
किन लोगों को इसमें करना चाहिए निवेश
वैसे निवेशक जिनके अकाउंट में अतिरिक्त पैसा हो और वे कम समय के लिए उसे रखना चाहते हैं, वे लिक्विड फंड में निवेश कर इसका लाभ उठा सकते हैं. जैसे फ्लैट या जमीन बेचकर आपको अगर अतिरिक्त रकम मिलती है और आपने उसे फिर से सही जगह में निवेश करने का नहीं सोचा है, तो उसे सेविंग या करेंट अकाउंट में रखने से बेहतर है कि उसे लिक्विड फंड में निवेश कर दिया जाये.
निवेश से पहले इन चीजों को जानें और समझें
किसी भी विकल्प में निवेश करने से पहले उससे जुड़ी कुछ बातों पर ध्यान जरूर देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपने समयानुसार सही निर्णय ले रहे हैं. इसलिए लिक्विड फंड में निवेश करने से पहले इन बातों को जानना और समझना जरूरी है.
जोखिम (रिस्क) : लिक्विड फंड पर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता है क्योंकि इसकी मेच्योरिटी अवधि तीस दिनों की होती है. इसलिए इसमें जोखिम नहीं होता है. इसे सुरक्षित निवेश भी कहा जाता है. लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि यह रिस्क फ्री होता है क्योंकि किसी कंपनी की रेटिंग कम हो जाने से रिटर्न कम होने की संभावना बनी रहती है.
रिटर्न : लिक्विड फंड में ऐतिहासिक रूप से 5-7 प्रतिशत का रिटर्न मिलता आया है. यह सेविंग्स या करेंट अकाउंट से ज्यादा है. इसके अलावा इसमें लिक्विडिटी भी होती है यानी आप जब चाहें तब निकाल सकते हैं. वैसे तो लिक्विड फंड के रिटर्न गारंटीड नहीं होते पर यह बाकि विकल्पों की तुलना में बेहतर रिटर्न देते हैं.
निवेश का स्तर : लिक्विड फंड में वैसे पैसों का निवेश करना चाहिए जिसे आप बाजार की अनिश्चितताओं से बचाना चाहते हैं. मतलब सुरक्षित निवेश के साथ अच्छा रिटर्न भी प्राप्त करना चाहते हैं. साथ ही अपने सरप्लस मनी यानी अतिरिक्त पैसे यानी जिन पैसों की जरूरत एक साल के अंदर कभी भी पड़ सकती है, उसे लिक्विड फंड में निवेश करना चाहिए.
टैक्स : लिक्विड फंड एक तरह का डेट फंड होता है इसलिए इसमें तीन साल से पहले निकालने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है. इसको निकालने पर आपका पैसा आपकी आय के साथ जुड़ जाता है और सामान्य आयकर स्लैब के हिसाब से उसपर टैक्स लगता है.
ऐसे करें निवेश
निवेश करने से पहले केवाइसी करा लें. इसके बाद आप किसी भी म्यूचुअल फंड स्कीम में जाकर उसके लिक्विड फंड में निवेश कर सकते हैं. सभी म्यूचुअल फंड्स का अपना लिक्विड फंड होता है. अगर कोई परेशानी हो रही हो तो आप शहर के अनुभवी वित्तीय सलाहकार से मदद ले सकते हैं.
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