चुनावी गर्मी में झुलसकर हांफने लगी सर्विस सेक्टर की ग्रोथ, अप्रैल में सात महीने के निचले स्तर पर

नयी दिल्ली : देश के सेवा क्षेत्र में गतिविधियों की वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ी है और अप्रैल में यह सात महीने के निचले स्तर पर रही है. इसकी अहम वजह नये कारोबार का धीमा होना और चुनावों के चलते व्यवधान पैदा होना है. कंपनियों के परचेजिंग मैनेजर के बीच किये जाने वाले एक मासिक […]
नयी दिल्ली : देश के सेवा क्षेत्र में गतिविधियों की वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ी है और अप्रैल में यह सात महीने के निचले स्तर पर रही है. इसकी अहम वजह नये कारोबार का धीमा होना और चुनावों के चलते व्यवधान पैदा होना है. कंपनियों के परचेजिंग मैनेजर के बीच किये जाने वाले एक मासिक सर्वेक्षण में यह बात सोमवार को सामने आयी. हालांकि, सर्वेक्षण में चुनाव बाद आर्थिक हालात बेहतर होने का अनुमान जताया गया है, जिससे सेवा क्षेत्र का परिदृश्य सकारात्मक नजर आता है और यह रोजगार को भी बढ़ावा देने में मदद करेगा.
इसे भी देखें : सेवा क्षेत्र में जुलाई में हुई अक्तूबर 2016 के बाद की सबसे तेज वृद्धि: पीएमआई
निक्की इंडिया सर्विसेस बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स (पीएमआई) अप्रैल में 51 अंक पर रहा, जो मार्च में 52 अंक पर था. यह पिछले साल सितंबर के बाद का सबसे निचला स्तर है. हालांकि, पीएमआई का 50 अंक से ऊपर रहना गतिविधियों में विस्तार और 50 अंक से नीचे से रहना गतिविधियों में संकुचन को दिखाता है. इस प्रकार अप्रैल में सेवा गतिविधियों में विस्तार तो हुआ है, लेकिन वह पिछले सात महीने के सापेक्ष में सबसे निचला स्तर है.
यह लगातार 11वां महीना है, जब सेवा क्षेत्र 50 अंक से ऊपर रहा है. आईएचएस मार्किट की प्रधान अर्थशास्त्री और इस रिपोर्ट की लेखिका पॉलीयाना डी लीमा ने कहा कि भारतीय निजी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था धीमी वृद्धि दर के दौर से गुजर रही है. इसकी एक बड़ी वजह चुनावों के कारण आया व्यवधान है. सरकार बन जाने के बाद कंपनियों के हाल में सामान्यत: सुधार देखा जायेगा. देश में आम चुनाव 11 अप्रैल से शुरू हुए हैं और इसका परिणाम 23 मई को आयेगा.
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