कंपोजिशन स्कीम में शामिल कारोबारियों को राहत : अब सरल फॉर्म में हर तीसरे महीने दाखिल करनी होगी GSTR

Updated at : 24 Apr 2019 7:43 PM (IST)
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कंपोजिशन स्कीम में शामिल कारोबारियों को राहत : अब सरल फॉर्म में हर तीसरे महीने दाखिल करनी होगी GSTR

नयी दिल्ली : वित्त मंत्रालय ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की कंपोजिशन योजना के तहत आने वाले कारोबारियों को रिटर्न दाखिल करने के मामले में कुछ और राहत दी है. ऐसे कारोबारियों को एक सरल फॉर्म में हर तीसरे महीने ‘स्व:आकलन’ आधार पर रिटर्न भरने की अनुमति दी गयी है. अब तक की व्यवस्था […]

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नयी दिल्ली : वित्त मंत्रालय ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की कंपोजिशन योजना के तहत आने वाले कारोबारियों को रिटर्न दाखिल करने के मामले में कुछ और राहत दी है. ऐसे कारोबारियों को एक सरल फॉर्म में हर तीसरे महीने ‘स्व:आकलन’ आधार पर रिटर्न भरने की अनुमति दी गयी है. अब तक की व्यवस्था के मुताबिक, कंपोजिशन स्कीम के तहत कर देने का विकल्प चुनने वालों को हर तिमाही में जीएसटीआर-4 के जरिये कर रिटर्न दाखिल करनी होती थी. इस फॉर्म में सात पन्ने होते हैं.

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केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) की अधिसूचना के मुताबिक, कंपोजिशन योजना के करदाताओं को अब सालाना आधार पर जीएसटीआर-चार फॉर्म सालाना आधार पर भरना होगा और 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष के लिए 30 अप्रैल तक यह फार्म जमा करना होगा. सीबीआईसी ने कंपोजिशन स्कीम को चुनने वाले करदाताओं के लिए फॉर्म जीएसटी सीएमपी08 के तहत स्वआकलन के आधार पर कर भुगतान का विवरण पेश करने की व्यवस्था शुरू की है.

कंपोजीशन योजना में आने वाले कारोबारियों को कारोबार पर कम दर से कर का भुगतान करने की सुविधा दी गयी है. नयी व्यवस्था के तहत कारोबारियों को हर तिमाही के बाद अगले महीने की 18 तारीख तक सीएमपी08 दाखिल करने की जरूरत होगी. इस सरल फॉर्म में कारोबारियों द्वारा बाहर की गयी आपूर्ति, प्राप्त की गयी आपूर्ति, जिसमें खरीदार अथवा बड़ा सेवा प्रदाता ही शुल्क की वसूली कर उसका भुगतान करता है. इसके अलावा, इसमें सेवा आयात, कर, ब्याज भुगतान इत्यादि की जानकारी देनी होगी. कंपोजिशन स्कीम के कारोबारियों को नयी व्यवस्था के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही का रिटर्न जुलाई में भरना होगा.

सालाना डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले छोटे व्यापारी और निर्माता जीएसटी की कंपोजिशन योजना के तहत एक मुश्त एक फीसदी जीएसटी भुगतान कर सकते हैं, जबकि 50 लाख रुपये का कारोबार करने वाले सेवा प्रदाता और वस्तु एवं सेवाओं दोनों के आपूर्तिकर्ता छह फीसदी की दर से एकमुश्त जीएसटी का भुगतान कर सकते हैं.

जिन छोटे कारोबारियों ने कंपोजीशन योजना को नहीं अपनया है, उन्हें हर महीने जीएसटी रिटर्न दाखिल करनी होती है और जीएसटी की तय दरों के मुताबिक कर का भुगतान करना होता है. फिलहाल, जीएसटी व्यवस्था के तहत विभिन्न सामान एवं सेवाओं पर 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 और 28 फीसदी चार स्तरीय कर की दरें तय हैं. कुल मिलाकर जीएसटी में 1.21 करोड़ कारोबारी पंजीकृत हैं, जिनमें से 20 लाख कंपोजिशन योजना के दायरे में हैं.

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